धर्मेंद्र की 1 बहुत बड़ी भूल, जिससे अमिताभ बच्चन के फ्लॉप करियर को मिला था ‘जीवनदान’, बांध चुके थे बोरिया-बिस्तर

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सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की सफलता की कहानी फिल्म ‘जंजीर’ के बिना अधूरी है, लेकिन इस सफलता की नींव सुपरस्टार धर्मेंद्र के एक इनकार पर टिकी थी. कहा जाता है कि 1973 में जब अमिताभ बच्चन ने लगातार 12 फ्लॉप फिल्में देने के बाद अपना बोरिया-बिस्तर बांध लिया था और इंडस्ट्री छोड़ने वाले थे तो किस्मत ने एक अनोखी चाल चली. ‘जंजीर’ वह फिल्म जिसने अमिताभ बच्चन को ‘एंग्री यंग मैन’ बनाया, असल में धर्मेंद्र के लिए लिखी गई थी. धर्मेंद्र के बिजी शेड्यूल और फिल्म को मना करने के उनके फैसले ने न सिर्फ अमिताभ बच्चन के डूबते करियर को सहारा दिया, बल्कि उन्हें गरीबी से अमीरी तक पहुंचा दिया.

नई दिल्ली. बॉलीवुड के इतिहास में सफलता की कई कहानियां हैं, लेकिन एक ऐसे एक्टर की कहानी है जो हार के कगार से उबरकर ‘शहंशाह’ बन गया, वो थे अमिताभ बच्चन. जिस एक्टर को हम आज सदी का महानायक कहते हैं, वह 1970 के दशक की शुरुआत में फ्लॉप की गारंटी बन गया था. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो लगातार 12 फ्लॉप फिल्मों का बोझ उठाए अमिताभ बच्चन मुंबई छोड़कर इलाहाबाद लौटने की तैयारी कर रहे थे. उनका बैग पैक हो चुका था, लेकिन फिर किस्मत ने ऐसा कार्ड खेला जिसने न सिर्फ अमिताभ की किस्मत बदली, बल्कि बॉलीवुड की दिशा और दशा भी हमेशा के लिए बदल दी.

दिलचस्प बात यह है कि अमिताभ बच्चन का यह पुनर्जन्म उस दौर के सबसे बड़े सुपरस्टार और ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र की एक बड़ी गलती की वजह से हुआ था. धर्मेंद्र के मना करने से अमिताभ के फ्लॉप करियर को ऐसा पुनर्जन्म मिला जिसकी कल्पना खुद बिग बी ने भी नहीं की थी. 1969 में ‘सात हिंदुस्तानी’ से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अमिताभ बच्चन में टैलेंट की कोई कमी नहीं थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा था.

‘बंसी बिरजू’, ‘एक नजर’, ‘संजोग’ और ‘रास्ते का पत्थर’ जैसी फिल्में एक के बाद एक फ्लॉप होती गईं. उनकी भारी आवाज और लंबे कद को उनकी कमजोरी माना गया. डिस्ट्रीब्यूटर्स ने उनके नाम पर इंवेस्ट करने से मना कर दिया. अमिताभ हार मान चुके थे और इंडस्ट्री छोड़ने का मन बना चुके थे. उसी समय राइटर जोड़ी सलीम-जावेद ने एक ऐसी स्क्रिप्ट तैयार की थी, जो उस समय के चॉकलेटी हीरो के जमाने के बिल्कुल खिलाफ थी. वे आंखों में गुस्से वाले हीरो की तलाश में थे. फिल्म का नाम ‘जंजीर’ रखा गया.

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डायरेक्टर प्रकाश मेहरा ने सबसे पहले इस फिल्म के लिए उस समय के ‘सुल्तान’ कहे जाने वाले धर्मेंद्र को अप्रोच किया. धर्मेंद्र को कहानी पसंद आई और उन्होंने साइन कर लिया, लेकिन इसमें एक ट्विस्ट था. धर्मेंद्र उस समय ‘लोफर’ और ‘यादों की बारात’ जैसी बड़ी फिल्मों में बिजी थे. प्रकाश मेहरा चाहते थे कि फिल्म तुरंत शुरू हो जाए, लेकिन धर्मेंद्र डेट्स नहीं दे पा रहे थे. आखिरकार, अंदरूनी झगड़ों और बिजी शेड्यूल की वजह से धर्मेंद्र ने प्रोजेक्ट छोड़ने का फैसला किया. यह धर्मेंद्र की ‘गलती’ थी जिसने भविष्य के ‘एंग्री यंग मैन’ का रास्ता बनाया.

धर्मेंद्र के मना करने के बाद, फिल्म के लिए देव आनंद और राजकुमार जैसे बड़े नामों से भी संपर्क किया गया, लेकिन सभी ने इसे रिजेक्ट कर दिया. कुछ को बिना गानों वाला पुलिसवाले का सीरियस रोल पसंद नहीं आया, तो कुछ अपनी इमेज को लेकर परेशान थे. आखिर में सलीम-जावेद के कहने पर प्रकाश मेहरा ने अमिताभ बच्चन को मौका दिया. अमिताभ के लिए यह करो या मरो वाली सिचुएशन थी. उन्होंने इस फिल्म में अपना दिल और जान लगा दी.

जब 1973 में ‘जंजीर’ रिलीज हुई तो इसने बॉक्स ऑफिस के सारे हिसाब-किताब बिगाड़ दिए. अमिताभ बच्चन, जिन्हें फ्लॉप मास्टर के नाम से जाना जाता था, रातोंरात नेशनल क्रश और ‘एंग्री यंग मैन’ बन गए. इस फिल्म ने न सिर्फ रिकॉर्ड तोड़ कमाई की, बल्कि अमिताभ के करियर का वह काला दौर भी हमेशा के लिए खत्म कर दिया. धर्मेंद्र की वह एक फिल्म छोड़ने की गलती अमिताभ के लिए ‘जीवनदान’ साबित हुआ.

ट्रेड एनालिस्ट का मानना ​​है कि अगर धर्मेंद्र ने ‘जंजीर’ की होती, तो यह सिर्फ एक और ‘मसाला हिट’ बनकर रह जाती, क्योंकि धर्मेंद्र की इमेज पहले से ही एक एक्शन हीरो की थी. लेकिन अमिताभ के लिए, वह फिल्म एक क्रांति थी. उस एक फैसले ने बॉलीवुड को उसका सबसे बड़ा स्टार दिया.

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