बरेली के 5 सितारे नेता, जिनकी बातें और कारनामे पूरे देश में हैं चर्चित, पढ़िए सफर की अनसुनी कहानियां
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बरेली की राजनीति में संतोष कुमार गंगवार, प्रवीण और सुप्रिया ऐरन, काका जोगिंदर सिंह, प्रमोद यादव और धर्मपाल सिंह जैसे नेता सक्रिय हैं. ये सिर्फ राजनीतिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास के क्षेत्र में भी अपनी छाप छोड़ चुके हैं. मॉडल डेयरी गांव, पीलिया नदी पुनर्जीवन और विभिन्न सामाजिक योजनाओं के जरिए उन्होंने क्षेत्र में स्थायी बदलाव लाने का प्रयास किया है.
संतोष कुमार गंगवार का सफर बरेली के सामान्य छात्र से शुरू होकर झारखंड के 11वें राज्यपाल बनने तक का है. उनका यह सफर त्याग, सादगी और अटूट जनसेवा की मिसाल है. आपातकाल के दौरान वह जेल भी गए थे. उन्होंने 1981 में पहला चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा. बरेली से वह 8 बार सांसद रहे. संतोष गंगवार केवल राजनीति में ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं. राजनीति में पूरी तरह सक्रिय होने से पहले उन्होंने बरेली में शहरी सहकारी बैंक की स्थापना की और 1996 से इसके अध्यक्ष रहे, जिससे स्थानीय लोगों को आर्थिक मदद मिली. उनके योगदान से बरेली में चौपला रेलवे ओवरब्रिज, पुस्तकालय और मिनी बाईपास जैसी जनोपयोगी परियोजनाएं बनीं. राज्यपाल बनने के बाद उन्हें मिले लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड की 1 लाख रुपये की राशि उन्होंने बच्चों के कल्याण के लिए दान करने की घोषणा की. उनके सानिध्य में भारत सेवा ट्रस्ट के तहत नेत्र रोगियों के लिए एनजीओ महत्वपूर्ण रिसर्च और गंभीर ऑपरेशन मुफ्त में कराने का काम करता है. जमीनी स्तर पर बरेली क्षेत्र में संतोष कुमार गंगवार का परिवार मजबूत पकड़ रखता है.
बरेली के पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन और उनकी पत्नी सुप्रिया ऐरन उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रमुख चेहरे हैं. वर्तमान में दोनों समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए हैं. लोकसभा चुनाव 2024 के हलफनामे के अनुसार, प्रवीण सिंह ऐरन बरेली के सबसे अमीर उम्मीदवारों में से एक हैं, जिनकी संपत्ति लगभग 182.9 करोड़ रुपए आंकी गई है, जिसमें बरेली, नोएडा और दिल्ली में स्थित महंगी व्यावसायिक और आवासीय संपत्तियां शामिल हैं. ऐरन परिवार का मुख्य आय स्रोत वकालत और रियल एस्टेट कंपनियों में निवेश है. प्रवीण सिंह ऐरन पेशेवर वकील हैं और दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं. वे ‘अटॉर्नी एसोसिएट्स’ नाम की लॉ फर्म भी चलाते हैं. इसके अलावा वे ‘अतारी इंफॉर्मेटिक्स लिमिटेड’ सहित तीन प्रतिष्ठित कंपनियों के मालिक या हिस्सेदार हैं और सुचि एंटरप्राइजेज और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों के शेयर भी रखते हैं. सुप्रिया ऐरन एक वरिष्ठ पत्रकार रह चुकी हैं और वर्तमान में अपना समय मुख्य रूप से समाज सेवा और राजनीति में देती हैं. लंबे समय तक कांग्रेस में रहने के बाद, वे 2022 में समाजवादी पार्टी में शामिल हुईं. वे बरेली लोकसभा सीट पर भाजपा के गढ़ को चुनौती देने वाले प्रमुख नेताओं में गिनी जाती हैं और “इंडिया गठबंधन” के तहत क्षेत्र में एक बड़ा चेहरा हैं.
बरेली के मशहूर काका जोगिंदर सिंह, जिन्हें ‘धरती पकड़’ के नाम से जाना जाता था, का जन्म 1918 में हुआ था. वे विभाजन के बाद बरेली में बस गए थे. अपने कपड़े की दुकान (बड़ा बाजार, बरेली) के साथ-साथ उनका अनोखा चुनावी शौक उन्हें दुनिया भर में प्रसिद्ध बनाता था. काका जोगिंदर सिंह ने 1962 से 1998 तक लगभग 300 से 350 चुनाव लड़े, लेकिन हर बार हार का सामना किया. वे खुद लोगों से कहते थे कि उन्हें वोट न दें, क्योंकि वे केवल हारने के लिए चुनाव लड़ते थे. उन्होंने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के लिए भी नामांकन किया. 1992 के राष्ट्रपति चुनाव में वे डॉ. शंकर दयाल शर्मा के खिलाफ खड़े हुए और चौथे स्थान पर रहे. इसके अलावा उन्होंने के. आर. नारायणन के खिलाफ उपराष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ा.
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प्रमोद यादव, बरेली के समाजवादी पार्टी (सपा) के समर्पित नेता और अधिवक्ता हैं, जिन्हें उनकी लगभग 3 फीट की लंबाई के कारण जाना जाता है. वे अखिलेश यादव के बड़े प्रशंसक हैं और उन्हें प्रधानमंत्री बनाने के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत ले रखा है. अखिलेश यादव खुद प्रमोद यादव के भाषण कौशल के कायल हैं. जब भी बरेली मंडल में सपा की कोई बड़ी जनसभा होती है, तो उन्हें विशेष निमंत्रण दिया जाता है. अपनी छोटी कद-काठी के बावजूद, प्रमोद यादव पार्टी के लिए स्टार प्रचारक की भूमिका निभाते हैं और चुनावी रैलियों में अपने भाषणों से बड़े वक्ताओं को मात दे देते हैं.
बरेली जिले में पीलिया नदी को पुनर्जीवित करने का प्रयास पूर्व सिंचाई मंत्री और आंवला से विधायक धर्मपाल सिंह की ओर से किया गया था. उन्होंने कई दशकों से सूखी पड़ी नदी को फिर से जीवित करने की योजना के साथ जंगल में प्रवास किया. उत्तर प्रदेश के 190 गांवों को मॉडल डेयरी उत्पादन गांव के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि दूध उत्पादन बढ़े और रोजगार के अवसर बढ़ें. इस योजना के तहत दुग्ध उत्पादकों को उचित मूल्य दिलाने और उन्नत नस्ल की गायों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है. पशुओं को उच्च गुणवत्ता वाला संतुलित आहार उपलब्ध कराने के लिए स्वचालित प्लांट और वितरण नेटवर्क को मजबूत किया गया है. धर्मपाल सिंह ने ‘बेसहारा गौवंश सहभागिता योजना’ के तहत किसानों को आवारा गायों की देखभाल के लिए आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था की है. इसके अलावा, स्वदेशी नस्ल की गायों (जैसे साहिवाल, गिर) की खरीद और डेयरी यूनिट लगाने पर भारी सब्सिडी और परिवहन सहायता प्रदान की जा रही है. सामान्य किसान परिवार से राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में आने के बाद, धर्मपाल सिंह उत्तर प्रदेश की राजनीति में ओबीसी राजपूताना लोधी समाज के नेताओं में प्रमुख नाम बन गए हैं.