लाल-सफेद को जाइये भूल… अब खाइये कम शुगर वाला कुफरी नीलकंठ आलू, किसानों के लिए बना सोना!
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Kufri Neelkanth Potato: बहराइच में आलू की एक खास किस्म किसानों के लिए कमाई का नया जरिया बनती जा रही है. लाल और सफेद आलू के बीच अब कुफरी नीलकंठ आलू की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिल रहे है. बड़े आकार, कम शुगर और लंबे समय तक सुरक्षित रहने की क्षमता के कारण यह किस्म बाजार में खास पसंद की जा रही है और किसान इससे अच्छा मुनाफा कमा रहे है.
बहराइच: लाल और सफेद आलू तो आम तौर पर हर किसी ने देखा और खाया होगा. लेकिन अब धीरे-धीरे कुफरी नीलकंठ आलू भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. बाहरी मंडियों में इस किस्म के आलू की इतनी जबरदस्त मांग है कि किसानों को इसकी अच्छी-खासी कीमत मिल रही है. कई जगहों पर इसका भाव प्रति किलो ₹100 से ऊपर तक पहुंच जाता है, जबकि उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में किसान इसे ₹40 से ₹50 प्रति किलो तक बेच रहे है.
कुफरी नीलकंठ आलू स्वाद और गुणों के मामले में सामान्य आलू से अलग माना जा रहा है. कृषि वैज्ञानिकों का दावा है कि इसमें शुगर की मात्रा कम होती है. इसकी पहचान इसके ऊपर की विशेष परत से होती है, जबकि इसका स्वाद भी लोगों को खासा पसंद आ रहा है. इससे बनने वाली सब्जी बेहद स्वादिष्ट मानी जा रही है और इसकी खासियत यह भी है कि इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखकर इस्तेमाल किया जा सकता है.
खेती कर मालामाल हो रहे किसान
बहराइच जिले के भटपुरवा गांव के किसान जियाउल हक बताते है कि उन्हें बहराइच कृषि विज्ञान केंद्र से 1 किलो कुफरी नीलकंठ आलू बीज के रूप में मिला था. इसे लगाने के बाद पहले साल 25 किलो उत्पादन हुआ. अगले चरण में उन्होेंने वही 25 किलो बीज के रूप में लगाकर 5 कुंटल की पैदावार ली. इसके बाद 5 कुंटल बीज बोकर अब 50 कुंटल तक उत्पादन हासिल कर चुके है.
कीमत की बात करे तो पिछले साल जियाउल हक ने यह आलू 50 रुपये प्रति किलो तक बेचा था, जबकि इस समय बाजार में आलू के दाम सामान्य रूप से कम होने के बावजूद वे कुफरी नीलकंठ आलू 40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेच रहे है. उनका कहना है कि कुफरी नीलकंठ आलू किसानों के लिए मुनाफे का अच्छा सौदा है और अगर इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाए, तो बेहद अच्छी कमाई संभव है.
खेती का तरीका सामान्य आलू जैसा ही
जियाउल हक के अनुसार कुफरी नीलकंठ आलू की खेती भी सामान्य आलू की तरह ही की जाती है. बस समय पर बीज की बुवाई करनी होती है और फसल अपने आप तैयार हो जाती है. सामान्य आलू की तुलना में इसका आकार बड़ा होता है. जिसके कारण वजन भी अधिक होता है. 1 किलो में आमतौर पर केवल 2 से 3 आलू ही आते है. बड़े आकार और बेहतर गुणवत्ता की वजह से बाजार में इसके अच्छे दाम मिल जाते है.
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काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें