डिंपल कपाड़िया का वो जिगरी दोस्त, डेब्यू फिल्म से बना ‘धुरंधर’, 18 हिट फिल्में देकर मचाया तहलका

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Dharmendra Sunny Deol movies : बॉलीवुड में बाप-बेटे की जोड़ी हमेशा चर्चा में रही है. राज कपूर-ऋषि कपूर, राजेंद्र कुमार-कुमार गौरव और सुनील दत्त-संजय दत्त ने अभिनय की दुनिया में खासी छाप छोड़ी. 1980 के दशक में सुपर स्टार पिता के बेटे ने डेब्यू फिल्म से ही तहलका मचा दिया. दोनों ने एक के बाद एक 20 से भी ज्यादा हिट फिल्में दीं. बेटे ने अपने पिता का बदला अमिताभ बच्चन से लिया. दोनों की एक्शन फिल्मों का जलवा इतना ज्यादा था कि बिग बी एक हिट के लिए तरस गए. सुपर स्टार बाप-बेटे की यह जोड़ी कौन थी, आइये जानते हैं. उनकी वो 20 हिट फिल्में कौन सी हैं, आइये जानते हैं….

1980 के दशक में अमिताभ बच्चन का स्टारडम पीक पर था. सिर्फ विनोद खन्ना ही उनके स्टारडम के आसपास थे लेकिन वो भी ओशो आश्रम चले गए. 1980 से 1982 तक अमिताभ ने एकछत्र बॉलीवुड पर राज किया. फिर आया साल 1983. इस साल बॉलीवुड में एक ऐसा नया सुपर स्टार जिसका जलवा आज तक बरकरार है. इस सुपर स्टार के पिता ने भी अमिताभ बच्चन के स्टारडम को चुनौती दी. दोनों बाप-बेटा ने 1980-90 के दशक में 20 हिट फिल्में देकर बिग बी की नींद उड़ा दी. हम बात कर रहे हैं सुपर स्टार धर्मेंद्र और सनी देओल की. 1983 से लेकर 2001 तक सनी देओल ने कई हिट फिल्में दीं. धर्मेंद्र ने 1987 में बॉक्स ऑफिस पर एकतरफा राज किया.

सुपर स्टार धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन ने 70 के दशक में ‘शोले’ और ‘चुपके-चुपके’ जैसी फिल्मों में काम किया. दीवार-शोले ने अमिताभ बच्चन को बॉलीवुड का ‘शहंशाह’ बना दिया. शोले के बाद धर्मेंद्र सीधे तौर पर अमिताभ को चुनौती नहीं दे सके. 1975 से 1982 तक अमिताभ ने एकतरफा राज किया. साल 1983 में धर्मेंद्र के बेटे सनी देओल ने ‘बेताब’ फिल्म से अपना करियर शुरू किया था. सनी देओल का असल नाम ‘अजय सिंह देओल’ है. धर्मेंद्र ने ही उनका नाम बदलकर ‘सनी देओल’ रखा. धर्मेंद्र ने फिल्म के दौरान सनी को खूब गाइड किया. दोनों ने मिलकर अमिताभ बच्चन के स्टारडम की नींव हिला दी.

1983 में अमिताभ बच्चन की ‘कुली’ और ‘अंधा कानून’ जैसी सुपरहिट फिल्में सिनेमाघरों में आई थीं. उनका स्टारडम लखलड़ा रहा था. यही सिर्फ दो फिल्में ही इस साल हिट हो पाई थीं. इधर, सनी देओल ने अपनी पहली ही फिल्म से धाक जमा ली. धर्मेंद्र भी पीछे नहीं थे. इस साल उनकी दो फिल्मों ‘नौकर बीवी का (1983) और रजिया सुल्तान (1983) की खूब चर्चा हुई. दोनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर ठीकठाक कलेक्शन किया.

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1984 में अमिताभ बच्चन राजनीति में आ गए थे. इलाहाबाद से वो सांसद चुने गए थे. इस साल उनकी सिर्फ एक फिल्म ‘शराबी’ ही कमाल दिखा पाई. बाकीं फिल्में ‘पान खाए सैंया हमार’, ‘कानून क्या करेगा’ और ‘पेट प्यार और पाप’ डिजास्टर साबित हुईं. 1984 में धर्मेंद्र की एक फिल्म ‘जीने नहीं दूंगा’ आई थी. इस फिल्म की छोटे शहरों में बड़ी चर्चा हुई थी. बस इसी साल से सिनेमा में एक्शन फिल्मों का नया दौर शुरू हुआ.

1985 में अमिताभ बच्चन की ‘मर्द’ और ‘गिरफ्तार’ जैसी फिल्में सिनेमाघरों में आईं. ‘मर्द’ को खूब सराहना मिली. इस साल से अमिताभ के स्टारडम की चमक फीकी पड़ने लगी. 1985 में ही सनी देओल की एक कल्ट मूवी ‘अर्जुन’ आई थी जिसे जावेद अख्तर ने लिखा था. इस फिल्म को खूब पसंद किया गया. ‘अर्जुन’ फिल्म ने ही सनी देओल की इमेज एक्शन हीरो की बनाई. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई. बात धर्मेंद्र की करें तो उनकी चर्चित फिल्म ‘गुलामी’ आई थी. गुलामी फिल्म का एक गाना ‘जीहाल मस्किन मकुन बरंजिश’ आज भी दिल को छू जाता है. फिल्म गुलामी का निर्देशन जेपी दत्ता ने किया था. फिल्म राजस्थान के जातीय भेदभाव पर आधारित थी.

फिर आया साल 1987. यह साल धर्मेंद्र का था. उन्होंने पर्दे पर जबर्दस्त वापसी की. अमिताभ के स्टारडम को चकनाचूर कर दिया. इस साल धर्मेंद्र की ‘इंसानियत के दुश्मन’, ‘लोहा’, ‘दादागिरी’, ‘हुकूमत’, ‘आग ही आग’, ‘मेरा करम मेरा धरम’, ‘वतन के रखवाले’, ‘इंसाफ मैं करूंगा’ जैसी सुपरहिट फिल्में दीं. अमताभ की ‘जलवा’, ‘कौन जीता कौन हारा’ जैसी फिल्में डिजास्टर साबित हुईं. अमिताभ ने राजनीति से संन्यास लेकर बॉलीवुड में वापसी की कोशिश की.

1988 में बिग बी की एक फिल्म ‘शहंशाह’ ने उनकी लाज बजाई. फिल्म सुपरहिट रही. फिल्म का एक डायलॉग ‘रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लगते हैं’ कालजयी साबित हुआ. इसी साल अमिताभ बच्चन की ‘गंगा जमुना सरस्वती’ भी आई लेकिन मूवी औसत ही रही. सनी देओल ने अमिताभ बच्चन को टक्कर देने की कोशिश की. सनी देओल की ‘पाप की दुनिया’ और ‘यतीम’ जैसी फिल्मों की इस साल खूब चर्चा हुई. 1989 में अमिताभ बच्चन का स्टाडम बिल्कुल ही फीका पड़ गया. उनकी दो फिल्में ‘तूफान’ और ‘जादूगर’ बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रहीं. मनमोहन देसाई और प्रकाश मेहरा का दौर खत्म हो गया. तीनों के बीच दोस्ती टूट गई.

अमिताभ बच्चन की 1990 में दो फिल्में ‘आज का अर्जुन’ और ‘अग्निपथ’ की खूब चर्चा हुई. 1991 में उनकी फिल्म ‘हम’ ने ठीकठाक बिजनेस किया. 1992 में ‘खुदा गवाह’ में श्री देवी के साथ उनकी जोड़ी को खूब सराह गया. इधर, सनी देओल की 1989 में ‘त्रिदेव’, चालबाज, 1990 में आई फिल्म ‘घायल’ ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया. उनकी इमेज एक्शन हीरो की बन गई. 1992 में ‘विश्वात्मा’, 1993 में ‘लुटेरे’, ‘दामिनी’ और ‘डर’ जैसी फिल्मों से सनी देओल की लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से बढ़ा. वो स्टारडम के पीक की ओर बढ़ने लगे. सनी देओल के कदम रुके नहीं. चलकर उन्होंने 1996 में ‘घातक’, ‘जीत’ ‘अजय’, जिद्दी, ‘बॉर्डर’ जैसी सदाबहार फिल्में दी. बॉर्डर तो ऑलटाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म रही.

1998 में ‘जोर’ और ‘सलाखें’, 1999 में ‘जिद्दी, अर्जुन पंडित’, 2001 में ‘फर्ज’ जैसी फिल्मों ने सनी देओल की साख को बचाया. 2001 में अनिल शर्मा की फिल्म ‘गदर : एक प्रेम कथा’ ने सनी देओल के स्टारडम को अर्श पर पहुंचा दिया. 2000 में अमिताभ बच्चन ने एक बार फिर से यश चोपड़ा का सहारा लिया. करण जौहर भी उनके साथ आए. ‘मोहब्बतें’, ‘कभी खुशी कभी गम’ जैसी फिल्मों में अमिताभ बच्चन नजर आए. सनी देओल आज भी स्टारडम के शिखर पर हैं. ‘गदर 2’ और ‘बॉर्डर 2’ जैसी 500 करोड़ी फिल्में दे चुके हैं. सनी देओल 67 साल की उम्र में भी ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्में दे रहे हैं.

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