रूस ने भर दी भारत की झोली, होर्मुज की वजह से तेल संकट आया तो भर-भरकर भेजा ‘काला सोना’
Agency:एजेंसियां
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होर्मुज संकट की वजह से आने वाले दिनों में एनर्जी क्राइसिस न होने पाए, इसलिए भारत ने रूस से कोयले का इंपोर्ट बढ़ा दिया है. रूस ने भी निराश नहीं किया. आंकड़े बता रहे है कि मार्च महीने के पहले तीन हफ्तों में ही शिपमेंट में 25% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. महीने के अंत तक आयात में 20–35% तक और बढ़त हो सकती है.

रूस ने भारत को बड़ी मात्रा में कोयले की खेप भेजी है. (Reuters)
कहते हैं पुरानी दोस्ती समय की कसौटी पर हमेशा खरी उतरती है… कुछ ऐसा ही इन दिनों भारत-रूस के रिश्तों में नजर आ रहा है. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद किया तो पहले तो रूस ने तेल के टैंकर भारत की ओर मोड़ दिए. फिर गैस के टैंकर भेजने शुरू कर दिए. और अब खबर आ रही कि रूस भर भरकर भारत को ‘काला सोना’ यानी कोयला भेज भारत के बंदरगाहों पर रहा है. रूस ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि संकट की घड़ी में वह हमेशा अपने सबसे पुराने और भरोसेमंद दोस्त के साथ खड़ा है. रूस ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि संकट की घड़ी में वह नई दिल्ली के साथ मजबूती से खड़ा है.
होर्मुज संकट ने भारत ही नहीं पूरी दुनिया के लिए संकट खड़ा कर दिया है. ऐसे में भारत ने रूस की ओर हाथ बढ़ाया और उसने निराश भी नहीं किया . इस बार केवल कच्चे तेल की बात नहीं है, बल्कि भारत ने रूस से हाई क्वालिटी वाले कोयले का आयात बड़े पैमाने पर तेज कर दिया है. भारत के बिजलीघरों और विशाल उद्योगों की धड़कन इसी कोयले से चलती है. ऐसे में जब पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में आग लगी हुई है, तब देश के पावर ग्रिड को बिना किसी रुकावट के चालू रखने के लिए यह रूसी कोयला किसी संजीवनी बूटी या ‘काले सोने’ से कम नहीं है. रूस ने भी भारत की इस जरूरत को समझते हुए बिना किसी देरी के कोयले से लदे अपने बड़े-बड़े मालवाहक जहाजों का रुख भारतीय बंदरगाहों की तरफ कर दिया है.
आंकड़े दे रहे गवाही
- मार्च महीने के ताजा आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि रूस और भारत के बीच यह ऊर्जा व्यापार किस तूफानी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है. आरटी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने मार्च महीने की शुरुआत से ही रूस से कोयले के आयात में जबरदस्त इजाफा किया है.
- इस महीने के पहले तीन हफ्तों के आंकड़े ही हैरान करने वाले हैं. इन शुरुआती 21 दिनों में ही रूस से आने वाले कोयले के शिपमेंट में पिछले महीने यानी फरवरी की तुलना में 25 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
अगर इस आंकड़े की तुलना पिछले साल के इसी समय से की जाए, तो यह छलांग और भी ज्यादा चौंकाने वाली है. साल-दर-साल के हिसाब से देखें तो रूस से कोयले के आयात में लगभग 50 प्रतिशत का बंपर उछाल आया है. - यह आंकड़ा साफ बताता है कि होर्मुज संकट से बचने के लिए भारत ने कितनी तेजी से अपनी रणनीति में बदलाव किया है और रूस पर अपना भरोसा बढ़ाया है.
क्या कह रहे एनर्जी एक्सपर्ट
बाजार के जानकारों और ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि कोयला आयात का यह तूफानी रुझान यहीं रुकने वाला नहीं है. मिडिल ईस्ट में जिस तरह से तनाव लगातार खिंचता जा रहा है और लाल सागर से लेकर ओमान की खाड़ी तक जहाजों की आवाजाही खतरे में पड़ी हुई है, उसे देखते हुए भारत आने वाले दिनों में रूसी कोयले पर अपनी निर्भरता और भी ज्यादा बढ़ाने वाला है. विश्लेषकों ने भविष्यवाणी की है कि मार्च महीने के अंत तक इस आयात में 20 से लेकर 35 प्रतिशत तक की और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. इसका मतलब यह है कि आने वाले कुछ हफ्तों में भारतीय बंदरगाहों पर रूसी कोयले से लदे जहाजों की कतारें और भी लंबी होने वाली हैं.
गर्मी में पड़ेगी कोयले की जरूरत
रूस से आ रहे इस ‘काले सोने’ का भारत की अर्थव्यवस्था पर बहुत ही सकारात्मक और व्यापक असर पड़ने वाला है. भारत इस समय तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है और जैसे-जैसे गर्मी का मौसम करीब आ रहा है, देश भर में बिजली की मांग अपने चरम पर पहुंचने वाली है. ऐसे समय में अगर बिजलीघरों के पास कोयले की कमी हो जाए, तो पूरे देश को भारी बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है, जिसका सीधा असर कारखानों के उत्पादन और आम आदमी की जिंदगी पर पड़ेगा. लेकिन रूस से आ रहे इस सस्ते और सुलभ कोयले ने भारत सरकार की इस सबसे बड़ी चिंता को दूर कर दिया है. इस कोयले की मदद से भारत अपने पावर प्लांट को पूरी क्षमता के साथ चला सकेगा और देश में बिजली की कीमतों को भी नियंत्रण में रखा जा सकेगा.
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Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें