1979 की वो 1 गलती, जिसने बर्बाद कर दिया सुपरस्टार राजेश खन्ना का साम्राज्य, ऐसे हुआ था सुपरस्टारडम का ‘द एंड’
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1969 से 1971 के बीच लगातार 17 सुपरहिट फिल्में देकर राजेश खन्ना ने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो आज भी नहीं टूटता. हालांकि, 1979 में हुई एक बड़ी गलती ने उनके बड़े एम्पायर की नींव हिला दी. कहा जाता है कि फिल्म ‘जनता हवलदार’ में रोल की गलत कास्टिंग और डायरेक्टर महमूद के साथ झगड़े की वजह से उनका करियर ऐसी खाई में गिर गया, जहां से उबरना नामुमकिन था. ऐसे समय में जब दर्शक अमिताभ बच्चन के ‘एंग्री यंग मैन’ अवतार के दीवाने थे, राजेश खन्ना का ‘हवलदार’ का रोल उनके करियर का सबसे बड़ा नुकसानदायक फैसला साबित हुआ.
नई दिल्ली. बॉलीवुड के इतिहास में एक समय ऐसा भी था जब ‘ऊपर आका, नीचे काका’ कहावत मशहूर थी. राजेश खन्ना, जिन्होंने 1969 से 1971 के बीच लगातार 17 सुपरहिट फिल्में दीं. हालांकि, किस्मत का पहिया ऐसा घूमा कि जिस सुपरस्टार की एक मुस्कान से लड़कियां दीवानी हो जाती थीं, उसका एम्पायर 1979 में रिलीज हुई एक फिल्म के साथ ताश के पत्तों की तरह ढह गया. यह उस फिल्म की कहानी है, जिसने राजेश खन्ना का साम्राज्य बर्बाद कर दिया और अमिताभ बच्चन का रास्ता साफ कर दिया.
70 के दशक के आखिर तक राजेश खन्ना का जादू फीका पड़ने लगा था. अमिताभ बच्चन की ‘जंजीर’, ‘दीवार’ और ‘शोले’ ने दर्शकों की पसंद बदल दी थी. लोग अब गुलाबी रोमांस और फूलों के बगीचों के बजाय ऐसे हीरो की तलाश में थे जो समाज के अन्याय के खिलाफ लड़े. राजेश खन्ना इस बदलाव को महसूस कर रहे थे, लेकिन वे अपनी ‘रोमांटिक किंग’ वाली इमेज छोड़ने को तैयार नहीं थे.
इसी बीच मशहूर कॉमेडियन और डायरेक्टर महमूद उनके पास एक स्क्रिप्ट लेकर आए. फिल्म का नाम था ‘जनता हवलदार.’ यह उस गलती की शुरुआत थी, जिसने बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार के सुनहरे सफर को अंधेरे में धकेल दिया. राजेश खन्ना के करियर की सबसे बड़ी गलती गलत रोल चुनना था. जहां अमिताभ बच्चन ‘विजय’ के रोल में एक पुलिस इंस्पेक्टर की यूनिफॉर्म में खौफ और इज्जत भर रहे थे, वहीं राजेश खन्ना ने एक भोले और थोड़े ‘बेवकूफ’ कांस्टेबल का रोल चुना.
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‘आनंद’ और ‘अमर प्रेम’ के सीरियस राजेश खन्ना को फटी हुई यूनिफॉर्म में कॉमेडी करते देखना दर्शकों के लिए एक शॉक था. ट्रेड पंडितों का मानना है कि ‘जनता हवलदार’ ने राजेश खन्ना की लार्जर-दैन-लाइफ इमेज को तोड़ दिया, जो उन्होंने सालों की कड़ी मेहनत से बनाई थी. पब्लिक ने उन्हें ‘हवलदार’ के तौर पर रिजेक्ट कर दिया, क्योंकि वे हमेशा उन्हें ‘प्रिंस’ के तौर पर देखना चाहते थे. ‘जनता हवलदार’ की नाकामी का कारण सिर्फ स्क्रिप्ट ही नहीं, बल्कि सेट पर हुई घटनाएं भी थीं. राजेश खन्ना अपने स्टारडम के उस पड़ाव पर थे, जहां वे डिसिप्लिन भूल गए थे.
महमूद एक सख्त डायरेक्टर थे. कहा जाता है कि राजेश खन्ना सेट पर कई घंटे लेट पहुंचते थे, जिससे महमूद को गुस्सा आता था. एक मशहूर किस्सा है कि एक दिन जब राजेश खन्ना हमेशा की तरह देरी से सेट्स पर आए और महमूद पहले से ही गुस्से में भरे बैठे थे. उन्होंने बिना कुछ सोचे समझे राजेश खन्ना को तमाचा जड़ते हुए कहा, ‘तुम सुपरस्टार अपने घर के होगे, मैने यहां तुम्हें फिल्म के लिए पूरे पैसे दिए हैं, तुम्हें अपना काम समय पर करना ही पड़ेगा. राजेश खन्ना हक्के बक्के रह गए थे. कुछ समय के लिए तो उनकी समझ में ही नहीं आया कि ये क्या हो गया है. कहा जाता है कि इस दिन के बाद से वह कभी सेट पर देरी से नहीं पहुंचे थे.
जब ‘जनता हवलदार’ रिलीज हुई, तो थिएटर्स में सन्नाटा छा गया. फिल्म न सिर्फ फ्लॉप हुई, बल्कि राजेश खन्ना की मार्केट वैल्यू भी जीरो कर दी. इस फिल्म के बाद, डिस्ट्रीब्यूटर्स ने राजेश खन्ना की सोलो फिल्मों में इन्वेस्ट करने से हाथ खींच लिए. इस फिल्म के फेल होने के बाद, प्रोड्यूसर्स ने राजेश खन्ना को मल्टी-स्टारर फिल्मों या सेकंड लीड के लिए अप्रोच करना शुरू कर दिया. उनकी सोलो पावर जो कभी बॉलीवुड पर छाई हुई थी, वह चली गई.
1979 के सदमे ने राजेश खन्ना को दिमागी तौर पर भी तोड़ दिया था. कहा जाता है कि वह अपने घर की छत पर घंटों अकेले रहते थे. सच तो यह था कि सिनेमा बदल गया था और राजेश खन्ना उसमें ढलने में नाकाम रहे थे. ‘जनता हवलदार’ ने यह बता दिया था कि बॉलीवुड में राजेश खन्ना युग खत्म हो गया है और बच्चन युग शुरू हो गया है.