अवसर भुनाने और आपदा को ठोकर मारने वाले ‘ठाकुर’ की कहानी, नाम नहीं काम का खिलाड़ी, नए सीजन के लिए ‘AI तीर’
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मुंबई इंडियंस की प्लेइंग इलेवन में शार्दुल ठाकुर जगह पक्की नहीं मानी जा रही थी. ज्यादातर लोगों का मानना था कि मौका दीपक चाहर को मिलेगा, लेकिन चयन हुआ ‘लॉर्ड’ शार्दुल ठाकुर का और उन्होंने किसी को निराश नहीं किया. हाई-स्कोरिंग मुकाबले में 39 रन देकर तीन विकेट जब फिन एलन और अजिंक्य रहाणे तेजी से रन बना रहे थे, तब शार्दुल ने मैच का रुख मोड़ते हुए मुंबई इंडियंस को वापसी दिलाई और साबित किया कि आज भी वो भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रभावी गोल्डन ऑर्म है.

शार्दुल ठाकुर ने एक बार फिर साबित किया कि वो देश के सबसे बेहतरीन गोल्डन ऑर्म है
नई दिल्ली. कभी टीम इंडिया का भरोसेमंद चेहरा, फिर अचानक प्लेइंग इलेवन से बाहर लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. ये कहानी है जज़्बे, मेहनत और वापसी की. जब मौके कम हो जाएं, तभी असली खिलाड़ी सामने आता है और इस बार ‘लॉर्ड’ ने फिर साबित कर दिया कि वो क्यों खास हैं. बल्लेबाज को आउट करने की कला, बड़ी साझेदारी को तोड़ने का हुनर और संकट के समय टीम के लिए वो कर देना जो किसी आम खिलाड़ी के बस में ना हो वो सबसे अलग होता है.
वह इस समय भारतीय टीम का हिस्सा नहीं हैं लखनऊ सुपर जायंट्स से ट्रेड होने के बाद भी मुंबई इंडियंस की प्लेइंग इलेवन में शार्दुल ठाकुर जगह पक्की नहीं मानी जा रही थी. ज्यादातर लोगों का मानना था कि मौका दीपक चाहर को मिलेगा, लेकिन चयन हुआ ‘लॉर्ड’ शार्दुल ठाकुर का और उन्होंने किसी को निराश नहीं किया. हाई-स्कोरिंग मुकाबले में 39 रन देकर तीन विकेट जब फिन एलन और अजिंक्य रहाणे तेजी से रन बना रहे थे, तब शार्दुल ने मैच का रुख मोड़ते हुए मुंबई इंडियंस को वापसी दिलाई और साबित किया कि आज भी वो भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रभावी गोल्डन ऑर्म है.
आपदा को अवसर में बदलने वाला ठाकुर
देश के हीरो से लेकर नेशनल सेटअप से बाहर होने तक, शार्दुल ने सब कुछ देखा है.बॉर्डर गाव्सकर ट्राफी के लिए चयन न होने का दर्द उन्हें भी हुआ था लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय खुद से सवाल किया क्या वापसी करनी है या हार मान लेनी है? जवाब साफ था, और तब से वह हर पल को एंजॉय कर रहे हैं. शार्दुल उन चुनिंदा खिलाड़ियों में से हैं जिन्होंने बीसीसीआई के निर्देश से पहले ही घरेलू क्रिकेट को प्राथमिकता दी. उनकी मेहनत और समर्पण ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है. उन्हें अलग बनाता है उनका “ऑल-इन” एटीट्यूड. उनका मानना है कि अगर आप अपनी प्रक्रिया पर भरोसा रखें और 100 प्रतिशत दें, तो नतीजे अपने आप मिलते हैं.
मुंबई वापसी पर भर गई झोली
कहावत है अगर आपमें टैलेंट है, तो मुंबई आपको खाली हाथ नहीं लौटने देता. इस बार भी वानखेड़े स्टेडियम में यही सच साबित हुआ. अब सवाल ये है क्या शार्दुल पूरे आईपीएल में ऐसा ही प्रदर्शन जारी रख पाएंगेक्या ‘लॉर्ड’ सच में वानखेड़े के ‘लॉर्ड’ बन पाएंगे? सवालों के जवाब अभी भविष्य के गर्भ में हैं, लेकिन उनके फैंस के लिए उम्मीद और भरोसा दोनों जिंदा हैं—और इस बार ये भरोसा बेवजह नहीं लगता. वैसे शार्दुल इस सीजन में अलग रंग में नजर आ रहे है और उनकी गेंदबाजी की तरकश में कई नए तीर भी नजर आ रहे है बस ये देखना दिलचस्प होगा कि कप्तान उनका इस्तेमाल कैसे करता है.