दुनिया का सबसे महंगा है यह आम, बलिया में आकर्षण का केंद्र, कीमत जान उड़ जाएंगे होश, जानिए खासियत

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बलिया: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में इन दिनों एक दुर्लभ आम का पेड़ चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है. जी हां कोषागार परिसर स्थित पेंशनर आनंद उपवन में लगा यह अनोखा पौधा न केवल लोगों को आकर्षित कर रहा है, बल्कि पूरे जिले में कौतूहल का विषय बन गया है. हालांकि, आम के पेड़ तो अक्सर हर जगह देखने को मिल जाते हैं, लेकिन यहां लगा यह पेड़ कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहा है. यकीन मानिए इस आम के पेड़ की खासियत, नाम और कीमत जान आप भी चौंक जाएंगे. आगे विस्तार से जानिए…

कोषागार संघ के अध्यक्ष अवधेश कुमार यादव ने कहा कि, पेंशनर आनंद उपवन में कई तरह के पौधे लगाए गए हैं, जिनमें अलग-अलग किस्मों के आम भी शामिल हैं. लेकिन सबसे खास मियाजाकी आम का पौधा है, जिसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंच रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि जिस आम की सुरक्षा के लिए दुनिया भर में कड़ी निगरानी और गार्ड तैनात किए जाते हैं, वही पेड़ यहां बिना किसी विशेष सुरक्षा के सुरक्षित खड़ा है. इसकी देखभाल कोई पेशेवर गार्ड नहीं, बल्कि खुद कर्मचारी लोग करते हैं. हर पौधे को उन्होंने अपने हाथों से चुना और लगाया है, इसलिए इन पेड़ पौधों से कर्मचारियों का भावनात्मक जुड़ाव हो गया है.

रोज की भांति पेंशनर आनंद उपवन का निरीक्षण करने आए वरिष्ठ कोषाधिकारी (CTO) आनंद दुबे ने कहा कि, विलुप्त हो रही प्रजातियों को बचाना सभी की जिम्मेदारी है. यही वजह है कि यहां न केवल देशी, बल्कि विदेशी पौधों को भी लाकर संरक्षित किया जा रहा है. भारत में जहां अल्फांसो, दशहरी, बीजू, चौसा, आम्रपाली, दूधसागर और लंगड़ा जैसे आम मशहूर हैं, वहीं यह जापानी किस्म लोगों के लिए नया आकर्षण बन गया है. यह इधर के लिए एकदम नया सा है.

इस पौधे को लगभग एक साल पहले लगाया गया था और अब फल भी आ चुके हैं. इसका डंठल गुलाबी और आकार बेहद आकर्षक है, जो इसे अन्य आमों से अलग पहचान दे रहा है. इसी के चलते लोग इसे देखने के साथ-साथ छूकर खुद को भाग्यशाली मान रहे हैं. दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिने जाने वाले मियाजाकी आम की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 2 से ₹3 लाख रुपये प्रति किलो तक बताई जाती है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट, बीटा-कैरोटीन और फोलिक एसिड की उच्च मात्रा पाई जाती है, जिसके कारण यह बहुत लाभकारी भी है. इसका फल 350 से 550 ग्राम का हो सकता हैं.

यह गहरे लाल रंग, जबरदस्त मिठास और रेशारहित गूदे के कारण फेमस है. इसे सूरज का अंडा भी कहा जाता है. अब यह दुर्लभ पेड़ बलिया की पहचान बनता जा रहा है. कहीं न कहीं इससे यह कन्फर्म हो गया कि, यह पेड़ बलिया में लगाया जा सकता हैं. आनंद उपवन का यह छोटा सा पौधा न केवल फल दे रहा है, बल्कि लोगों के दिलों में भी खास जगह बना रहा है.

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