एक खेत से डबल मुनाफा, इस तकनीक से खेती कर मालामाल बन गई यूपी की महिला किसान, बंपर हो रही कमाई

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एक खेत से डबल मुनाफा, इस तकनीक से खेती कर मालामाल बन गई यूपी की महिला किसान

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Agriculture News: आजकल खेती में वही किसान आगे बढ़ रहा है, जो नई तकनीक अपना रहा है. ऐसी ही एक बढ़िया तकनीक है खीरा और करेला की डबल खेती, जिसे अपनाकर महिला किसान कमलेश अच्छा मुनाफा कमा रही हैं. एक ही खेत में दो फसल लेकर उन्होंने कम लागत में कमाल कर दिया. खास बात ये है कि एक फसल जल्दी पैसा देती है और दूसरी लंबे समय तक चलती है. अगर आप ये तकनीक अपनाते हैं तो बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं.

रामपुर की महिला किसान कमलेश कई सालों से डबल खेती कर बढ़िया मुनाफ़ा कमा रही है. इस बार भी उन्होंने अपने 2 बीघा खेत में खीरा और करेला एक साथ लगाया है. इससे जमीन का कोई हिस्सा खाली नहीं रहा. ऊपर करेला और नीचे खीरा उगाकर उन्होंने एक ही खेत से दो फसल ली. इससे लागत वही रही, लेकिन कमाई दोगुनी हो गई और छोटे किसानों के लिए ये तरीका बहुत काम का है. क्योंकि कम जमीन में ज्यादा मुनाफा मिल सकता है.

महिला किसान कमलेश ने बताया कि उन्होंने अच्छी पैदावार के लिए मचान विधि से करेले की खेती की है. इस तकनीक में बेल को ऊपर चढ़ाया जाता है, जिससे फल हवा में लटकते हैं और खराब नहीं होते. धूप और हवा सही मिलने से उत्पादन भी बढ़ता है. उन्होंने बताया कि एक बीघा से हमने 5 क्विंटल तक करेले की पैदावार ली है. इस तरीके से करेला 6-7 महीने तक लगातार फल देता है, जिससे बार-बार बुवाई की जरूरत नहीं पड़ती और लागत भी कम हो जाती है.

किसान के मुताबिक खीरा जमीन पर फैलकर बढ़ता है. इसलिए इसके लिए अलग से ज्यादा व्यवस्था नहीं करनी पड़ती. बुवाई के करीब 50-55 दिन में खीरा तैयार हो जाता है. बाजार में उनका खीरा 35 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है. जल्दी तैयार होने के कारण किसान को तुरंत कैश मिल जाता है, जिससे बाकी खेती का खर्च भी आसानी से निकल जाता है.

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महिला किसान कमलेश ने बताया कि करेले का भाव भी सीजन में काफी अच्छा मिल जाता है. शुरुआत में करेला 40 रुपए से 60 रुपए किलो तक बिक जाता है, क्योंकि मचान विधि से फल साफ और बढ़िया क्वालिटी का आता है. इसलिए व्यापारी भी अच्छा रेट देते हैं. एक बार बेल चली गई तो हर 2-3 दिन में तुड़ाई होती है, जिससे लगातार आमदनी बनी रहती है.

इस खेती की सबसे बड़ी खासियत यही है कि एक फसल खत्म होती है तो दूसरी तैयार मिलती है. खीरा जल्दी निकलकर पैसा दे देता है. वहीं करेला बाद में लंबे समय तक चलता रहता है. इससे खेत कभी खाली नहीं रहता और किसान की आमदनी भी नहीं रुकती, लेकिन खीरा और करेला दोनों में नियमित सिंचाई बहुत जरूरी होती है. गर्मी के मौसम में 3-4 दिन के अंतर पर पानी देना पड़ता है. साथ ही खेत में पानी जमा न हो इसका भी ध्यान रखना होता है. समय पर निराई-गुड़ाई करने से पौधे स्वस्थ रहते हैं और कीट-रोग का खतरा भी कम हो जाता है, जिससे फसल खराब नहीं होती.

यह फसल लगाने से पहले गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट और जरूरत के हिसाब से डीएपी व पोटाश का इस्तेमाल बहुत जरूरी है. शुरुआत में खेत की अच्छी जुताई कर उसमें जैविक खाद मिलाई गई थी, इससे मिट्टी की ताकत बढ़ी और पौधे तेजी से बढ़े समय-समय पर हल्की खाद देने से फसल हरी-भरी रहती है और फल भी ज्यादा लगते हैं जिससे उत्पादन बढ़ जाता है.

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