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Pahadi Food Spices: उत्तराखंड के पारंपरिक खान-पान में ‘जखिया’ और ‘पचरंगी तुड़की’ का तड़का स्वाद और सेहत का बेजोड़ संगम है. देहरादून में रहने वाली जौनसार की रीना बताती हैं कि भांग, भंगजीरा, जखिया और धनिये के मिश्रण से बनी पचरंगी तुड़की, कद्दू के रायते और पहाड़ी दालों का जायका बढ़ा देती है. आज भी लोग परेड ग्राउंड जैसे मेलों में स्वयं सहायता समूहों के जरिए इन शुद्ध पहाड़ी मसालों को खरीदकर अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं और ऑथेंटिक पहाड़ी फ्लेवर का आनंद ले रहे हैं.
Pahadi Food Spices: उत्तराखंड की वादियों की खूबसूरती जितनी मनमोहक है, उतना ही लाजवाब यहां का पारंपरिक खान-पान भी है. पहाड़ में भोजन सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि मसालों और जड़ी-बूटियों का एक ऐसा अनूठा विज्ञान है जो सेहत और स्वाद दोनों को साथ लेकर चलता है. आज के इस दौर में जहां लोग आधुनिक मसालों की ओर भाग रहे हैं, वहीं देहरादून में रह रहे पहाड़ के लोग अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं. दाल में जखिया का तड़का हो या रायते में पचरंगी तुड़की का मेल, ये पारंपरिक स्वाद आज भी लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं.
पहाड़ी रसोई की शान: जखिया का तड़का
पहाड़ के खान-पान की जब भी बात आती है, तो ‘जखिया’ का जिक्र सबसे पहले आता है. वैसे तो हर क्षेत्र का अपना अलग रहन-सहन और खान-पान होता है, लेकिन पहाड़ में भोजन पकाने का अंदाज काफी जुदा है. यहां सब्जियों और दालों में जखिया का तड़का लगाया जाता है. बारीक दानों वाला यह मसाला जब गर्म तेल में चटकता है, तो इसकी खुशबू पूरे घर में फैल जाती है. आलू के गुटके हों या हरी साग की भाजी, बिना जखिया के इनका स्वाद अधूरा माना जाता है.
क्या है ‘पचरंगी तुड़की’?
पहाड़ी जायके को खास बनाने में ‘पचरंगी तुड़की’ का बड़ा हाथ है. यह पांच खास मसालों का मिश्रण होता है जिसमें भांग, धनिया, भंगजीरा, जीरा और जखिया को मिक्स किया जाता है. पचरंगी तुड़की का उपयोग विशेष रूप से पल्लर, दाल और डुबके जैसे व्यंजनों में होता है. रीना बताती हैं कि कद्दू के रायते में अगर पचरंगी तुड़की का तड़का लग जाए, तो उसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है.
जड़ों से जुड़ाव: रीना की जुबानी पहाड़ी स्वाद
देहरादून की स्थानीय निवासी रीना, जो मूल रूप से जौनसार क्षेत्र की रहने वाली हैं, बताती हैं कि शादी के बाद देहरादून में बसने के बावजूद वह अपने गांव का स्वाद नहीं भूल पाई हैं. वह आज भी अपने घर में उन्हीं पारंपरिक मसालों का उपयोग करती हैं. रीना के अनुसार, ‘भांग के पौधे से बीजों को झाड़कर और सुखाकर तैयार किया जाता है. फिर इन्हें मसालों के साथ मिलाकर ऑथेंटिक फ्लेवर तैयार होता है.’
शहरों में गांव का स्वाद पहुंचा रही हैं महिलाएं
देहरादून के परेड ग्राउंड में लगने वाले विभिन्न मेलों में उत्तराखंड के स्वयं सहायता समूह की महिलाएं इन दुर्लभ मसालों को उपलब्ध कराती हैं. जो लोग शहरों की भागदौड़ में अपने गांव के स्वाद को मिस करते हैं, उनके लिए ये मेले किसी वरदान से कम नहीं हैं. यहां से लोग जखिया, भंगजीरा और तैयार पचरंगी तुड़की खरीदकर अपने आधुनिक किचन में पहाड़ की खुशबू बिखेर रहे हैं.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें