पशुओं में दिखे ये खतरनाक लक्षण, तुरंत अपनाएं गांव का पुराना फॉर्मूला, बहती रहेगी दूध की नदियां
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Animal husbandry : गर्मियों के साथ पशुओं को बीमारी घेरना शुरू कर देगी. ये समय मुंहपका और खुरपका जैसी खतरनाक बीमारी फैलने का है. सही जानकारी और थोड़ी सावधानी से पशुओं के बीमारियों पर बिना ज्यादा खर्च किए काबू पाया जा सकता है. लोकल 18 ने इस बारे में बलिया के पशु चिकित्सक डॉ. अशोक कुमार सिंह से बात की. वे बताते हैं कि पशुओं में खुरपका और मुंहपका संक्रमण जनित रोग है. इसमें पशु के मुंह में छाले पड़ जाते हैं और खुर सड़ने लगता है.
बलिया. आज भी गांव-देहात में अधिकतर लोग पशुओं पर निर्भर हैं. ऐसे में जब पशु बीमार पड़ते हैं, तो चिंता न केवल एक जानवर की होती है, बल्कि पूरे घर की रोजी-रोटी पर संकट आ जाता है. महंगे इलाज और दूर जाने में हर कोई सक्षम नहीं होता हैं. अब पशुओं में मुंहपका और खुरपका जैसी खतरनाक बीमारी फैलने का समय आ गया है. इस विपरीत परिस्थिती में हमारे देसी नुस्खों में आज भी दम है. सही जानकारी और थोड़ी सावधानी से पशुओं के बीमारियों पर बिना ज्यादा खर्च किए काबू पाया जा सकता है.
डॉ. अशोक कुमार सिंह बताते हैं कि वे श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया में कृषि रसायन और मृदा विज्ञान विभाग में विभागाध्यक्ष हैं. पशुपालन विभाग और दुग्ध विज्ञान विभाग में इनके संकाय में ही शामिल है. इस समय पशुओं में कुछ सामान्य बीमारियों के बढ़ने की संभावना तेज है. पशुओं में खुरपका और मुंहपका संक्रमण जनित रोग है, जिसमें जब पशु को इन्फेक्शन हो जाता है, तो उनके मुंह में छाले और खुर सड़न होने लगता है.
जो पशु इस रोग के चपेट में आ गया है, उसको अन्य पशुओं से दूर रखें. फिटकरी के 2% का घोल बनाकर सुबह शाम पशु के मुंह और खुर को धोते रहें. कोशिश करें कि वह जानवर खाने और पीने का प्रयास करें. ऐसा करने से धीरे-धीरे पशु ठीक हो जाएगा. पशु के रहने की जगह को एकदम स्वच्छ रखें. प्रयास करें कि प्रभावित पशु अन्य से दूर रहे. पशुओं में फैल रही बीमारी से बचाव के लिए देसी उपाय कारगर साबित हो सकते हैं. नीम-पीपल के काढ़े से खुर धोना, घाव पर नारियल तेल में बोरिक एसिड या कत्था लगाने से आराम मिलता है.
न मिले राहत तब…
मक्खियों से बचाव के लिए हल्दी-नीम तेल उपयोगी है. मुंह की सफाई फिटकरी या नमक पानी से करें. बीमार पशु को अलग रखें, नरम आहार दें और बाड़े में चूना-फिनाइल का छिड़काव करना बहुत उपयोगी है. साल में दो बार कीड़े की दवा जरूर दें और टीकाकरण जरूर कराना चाहिए. अगर घरेलू नुस्खे से लाभ नहीं मिल रहा है, तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय से सम्पर्क करें.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें