डूब रहा था अनिल कपूर का करियर, तभी उनके लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ ये सुपरस्टार, फिर दोनों ने मिलकर मचाई तबाही

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बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अनिल कपूर आज जिस कामयाबी की ऊंचाई पर हैं, वहां तक ​​पहुंचने का रास्ता आसान नहीं था. उनके शुरुआती स्ट्रगल के दिनों में जब उनकी फिल्में ठीक से नहीं चल रही थीं, सुपरस्टार जैकी श्रॉफ के साथ काम उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. इस जोड़ी ने न सिर्फ ‘राम लखन’ और ‘परिंदा’ जैसी टाइमलेस फिल्में दीं, बल्कि बॉक्स ऑफिस का माहौल भी बदल दिया. आज हम आपको बताने की कोशिश करेंगे कि कैसे जैकी श्रॉफ की एंट्री ने अनिल कपूर के डूबते करियर को सहारा दिया और कैसे इन दोनों दिग्गजों ने मिलकर दशकों तक सिल्वर स्क्रीन पर राज किया.

नई दिल्ली. बॉलीवुड में अक्सर स्टार्स के बीच ‘कोल्ड वॉर’ और कॉम्पिटिशन की खबरें आती रहती हैं, लेकिन 1980 के दशक में एक ऐसी जोड़ी सामने आई जिसने दोस्ती और प्रोफेशनल बॉन्डिंग को एक नई पहचान दी. यह जोड़ी थी अनिल कपूर और जैकी श्रॉफ. आज जब हम अनिल कपूर को एक ग्लोबल स्टार और एवरग्रीन एक्टर के तौर पर देखते हैं तो हम भूल जाते हैं कि शुरुआती दिनों में उनका करियर एक टर्निंग प्वाइंट पर था जो एक बड़ी हिट की तलाश में था. उस समय जैकी श्रॉफ उनकी जिंदगी में लकी चार्म बनकर आए.

अनिल कपूर ने ‘मशाल’ और ‘वो सात दिन’ जैसी फिल्मों से अपना टैलेंट साबित कर दिया था, लेकिन कमर्शियल सिनेमा डिस्ट्रीब्यूटर उन्हें सोलो हीरो के तौर पर लेने में हिचकिचा रहे थे. वो फिल्म इंडस्ट्री में चॉकलेटी हीरो के दिन थे और अनिल कपूर का स्टाइल थोड़ा अलग था. दूसरी ओर सुभाष घई की ‘हीरो (1983)’ ने जैकी श्रॉफ को रातों-रात सुपरस्टार बना दिया. उस समय जैकी का स्टारडम अपने पीक पर था.

अनिल कपूर और जैकी श्रॉफ की पहली बड़ी मुलाकात और कोलेबोरेशन 1984 की फिल्म ‘अंदर बाहर’ से शुरू हुआ. जैकी पहले से ही सेटल्ड थे, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उन्होंने अनिल कपूर को कभी साइड एक्टर के तौर पर नहीं देखा. जैकी श्रॉफ का बेबाक अंदाज और स्क्रीन पर अनिल कपूर की जबरदस्त एनर्जी और इन दोनों के मेल ने दर्शकों को कुछ नया दिया.

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फिल्म पंडितों का मानना ​​है कि जैकी श्रॉफ की मौजूदगी ने अनिल कपूर को वह मास अपील दी जिसकी उन्हें जरूरत थी. जैकी के साथ स्क्रीन शेयर करने से अनिल कपूर उन दर्शकों तक पहुंच पाए जो पहले सिर्फ एक्शन और डैशिंग हीरो देखने सिनेमा जाते थे. 1989 की ब्लॉकबस्टर ‘राम-लखन’ इस जोड़ी के लिए सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुई. सुभाष घई ने उनकी केमिस्ट्री को पहचाना.

फिल्म ‘राम-लखन’ में जहां जैकी श्रॉफ ने सीरियस पुलिस ऑफिसर (राम) का रोल किया, वहीं अनिल कपूर ने अपने चंचल और बिंदास ‘लखन’ के रोल से सनसनी मचा दी. ‘माई नेम इज लखन’ गाने पर अनिल कपूर का डांस आज भी बॉलीवुड के सबसे आइकॉनिक पलों में से एक माना जाता है. इस फिल्म की सफलता ने अनिल कपूर को टॉप लीग में पहुंचा दिया. इसके बाद ‘कर्मा’ और ‘युद्ध’ जैसी फिल्मों ने यह पक्का कर दिया कि अगर जैकी और अनिल स्क्रीन स्पेस शेयर करते हैं तो फिल्म सुपरहिट होगी.

जहां ‘राम लखन’ कमर्शियल सक्सेस थी, वहीं ‘परिंदा’ ने दोनों को लेजेंडरी एक्टर के तौर पर स्थापित किया. जैकी और अनिल के बीच इमोशनल सीन ने साबित कर दिया कि उनका बॉन्ड सिर्फ डांसिंग और सिंगिंग तक ही लिमिटेड नहीं था. जैकी श्रॉफ ने इस फिल्म के लिए फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवॉर्ड जीता, लेकिन कहा जाता है कि उन्होंने हमेशा अपनी हर अचीवमेंट में अनिल कपूर के कंट्रीब्यूशन को माना.

बॉलीवुड में अक्सर दो हीरो वाली फिल्मों में क्रेडिट के लिए कॉम्पिटिशन होता है, लेकिन जैकी और अनिल के बीच कभी कोई झगड़ा नहीं हुआ. जैकी श्रॉफ हमेशा अनिल को बड़े भाई की तरह प्रमोट करते हैं. आज भी जब दोनों अवॉर्ड फंक्शन में साथ होते हैं तो उनकी केमिस्ट्री नई जेनरेशन के एक्टर्स के लिए एक मिसाल कायम करती है.

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