हाथ-पैर बिना भी जुनून बरकरार, दिव्यांग क्रिकेटर्स ने संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी

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Satna News: मध्य प्रदेश दिव्यांग क्रिकेट टीम के कप्तान और भारतीय दिव्यांग टीम के वाइस कैप्टन अंकित सिंह बघेल ने लोकल 18 से कहा कि सभी खिलाड़ी छोटे-छोटे गांवों से आते हैं और वे बचपन से ही क्रिकेट के प्रति जुनून रखते थे. स्कूल के बाद मैदान में खेलने निकल जाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा.

सतना. जब कोई खिलाड़ी बिना पैर, बिना सही हाथ या शारीरिक चुनौतियों के बावजूद मैदान में उतरकर पूरे जोश के साथ खेलता है, तो वह दृश्य सिर्फ खेल नहीं बल्कि हौसले की जीवंत मिसाल बन जाता है. सतना की धरती से निकली ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी इन दिनों चर्चा में है, जहां दिव्यांग खिलाड़ियों की क्रिकेट टीम ने अपनी मेहनत, जुनून और आत्मविश्वास के दम पर देशभर में पहचान बनाई है. यह टीम न केवल खेल रही है बल्कि समाज की सोच बदलने का काम भी कर रही है. इस टीम की नींव में सतना के दिव्यांग खिलाड़ी बृजेश द्विवेदी की प्रेरणा और क्रिकेट प्रेमी अंकित शर्मा की मेहनत छिपी है. खास बात यह रही कि अंकित को क्रिकेट की बारीकियां खुद दिव्यांग खिलाड़ी बृजेश द्विवेदी से ही सीखने का मौका मिला और तब से ही वह अंकित के गुरु बन गए. यही सोच आगे चलकर एक मिशन भी बन गया और उन्होंने दिव्यांग खिलाड़ियों को एक मंच पर लाकर टीम का गठन किया. आज अंकित शर्मा इस टीम के कोच हैं और टीम में वह अकेले ऐसे सदस्य हैं, जो फिजिकली फिट हैं, बाकी इस संगठन से जुड़े खिलाड़ी और फाउंडर किसी न किसी डिसेबिलिटी से जूझ रहे हैं.

मध्य प्रदेश दिव्यांग टीम के कप्तान और भारतीय दिव्यांग टीम के वाइस कैप्टन अंकित सिंह बघेल ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि सतना और मैहर से चार खिलाड़ियों का चयन हुआ था, जिनमें मिथलेश सिंह मनकहरी, दिनेश सिंह अबेर और संजय कुमार भर्जुना शामिल हैं. उन्होंने बताया कि सभी खिलाड़ी छोटे-छोटे गांवों से आते हैं और बचपन से ही क्रिकेट के प्रति जुनून रखते थे. स्कूल खत्म होते ही मैदान में खेलने निकल जाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था. उनका सपना था कि एक दिन वह भी विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर की तरह बड़े मंच पर खेलें.

पहला मौका और पहचान की शुरुआत
उन्होंने कहा कि यह सपना साल 2018 में साकार होने लगा, जब मध्य प्रदेश दिव्यांग क्रिकेट एसोसिएशन के सदस्य बृजेश द्विवेदी ने टीम को जयपुर में पहला नेशनल टूर्नामेंट खेलने का मौका दिया. इस टूर्नामेंट में टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए उपविजेता स्थान हासिल किया. अंकित सिंह बघेल ने एक पुराना किस्सा साझा करते हुए कहा कि जब वह दसवीं कक्षा में थे, तब जिला स्तर के चयन में उन्हें यह कहकर बाहर कर दिया गया था कि क्रिकेट में केवल फिजिकली फिट खिलाड़ी ही चुने जाते हैं लेकिन आज इसी खेल में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना के बहुत अच्छा महसूस हो रहा है.

300 से ज्यादा खिलाड़ियों का जुड़ाव
कोच अंकित शर्मा ने कहा कि वह खुद बचपन से क्रिकेट के दीवाने रहे हैं और पांच साल तक यूनिवर्सिटी क्रिकेट खेले हैं. वह एपीएस यूनिवर्सिटी की टीम के कप्तान भी रह चुके हैं. उनके कोच बृजेश द्विवेदी पोलियो से ग्रसित थे लेकिन उनके खेल ने सभी को हैरान कर दिया था. एक समय ऐसा भी था, जब जयपुर टूर्नामेंट में टीम के पास 12 खिलाड़ी तक नहीं थे लेकिन इसी चुनौती ने उन्हें ठानने पर मजबूर किया कि वह अपने क्षेत्र में दिव्यांग क्रिकेट को नई पहचान दिलाएंगे.

आज स्थिति यह है कि मध्य प्रदेश में इस एसोसिएशन से 300 से अधिक दिव्यांग खिलाड़ी जुड़े हुए हैं. सतना और मैहर क्षेत्र में ही 40-50 खिलाड़ी सक्रिय रूप से खेल रहे हैं. टीम ने पटना जैसे बड़े नेशनल टूर्नामेंट में जीत हासिल कर कई ट्रॉफियां अपने नाम की हैं. यह कहानी सिर्फ क्रिकेट की नहीं बल्कि उस जज्बे की है, जो हर बाधा को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना सिखाता है.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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