फर्जी सर्टिफिकेट, 40 हजार का खेल, सॉल्वर… CBSC की JSA भर्ती परीक्षा में खेल, STF ने खोला राज
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सीबीएससी जूनियर सेक्रेटरियट असिस्टेंट भर्ती परीक्षा मामले में हुई गड़बड़ी की जांच कर रही यूपी एसटीएफ की टीम ने कई राज खोले हैं. जांच के मुताबिक 40-40 हजार रुपये में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट बनाया गया था. साथ ही परीक्षा में अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर बैठाए गए थे.

यूपी एसटीएफ ने सीबीएससी की जेएसए भर्ती परीक्षा में हुई गड़बड़ी का खुलासा.
लखनऊः सीबीएससी बोर्ड की ओर से आयोजित जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट भर्ती परीक्षा में हुई सेंधमारी मामले की जांच कर रही एसटीएफ की टीम ने कई बड़े खुलासे किए हैं. जांच के दौरान पता चला है कि झांसी और ललितपुर सीएमओ दफ्तर से फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाए गए थे. फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने में झांसी सिविल अस्पताल के एक कर्मचारी की भूमिका भी सामने आई है. एसटीएफ कई संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही है. जल्द और गिरफ्तारियों की अटकलें लगाई जा रही हैं.
बीसीए पास मनीष मिश्रा निकला सरगना
फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर अभ्यर्थी की जगह सॉल्वर बिठाकर परीक्षा पास कराने का पूरा सिंडिकेट चल रहा था. इसगा सरगना कोई और नहीं बल्कि बीसीए पास मनीष मिश्रा है. एसटीएफ ने मनीष उसके साथी आकाश अग्रवाल, सौरभ सोनी और तीन अभ्यर्थी राज किशोर, राममिलन ,अभिषेक यादव और तीन सॉल्वर नीरज झा, सत्यम कुमार, दीपक कुमार को गिरफ्तार किया था.
40-40 हजार रुपये में बनवाया गया दिव्यंगता प्रमाण पत्र
राज किशोर का 40 फ़ीसदी लो विजन दिव्यांगता प्रमाण पत्र ललितपुर सीएमओ दफ्तर से बनाया गया था. अभ्यर्थी राममिलन ने 40 फ़ीसदी शारीरिक अक्षमता का प्रमाण पत्र सीएमओ झांसी के दफ्तर से बनवाया था. अभ्यर्थी अभिषेक यादव का भी लो विजन का प्रमाण पत्र इसी सिंडिकेट ने बनवाया था. 40 – 40 हज़ार रुपए में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाए गए थे.
दारोगा भर्ती की परीक्षा में भी हुआ था शामिल
राममिलन खुद को शारीरिक अक्षम दिखाकर परीक्षा में शामिल हुआ था. जबकि 14 मार्च को हुई दरोगा भर्ती परीक्षा में भी शामिल हुआ था. एसटीएफ ने इसकी रिपोर्ट पुलिस भर्ती बोर्ड को भी भेजी है. सॉल्वर नीरज झा कंप्यूटर साइंस से बीटेक है और दिल्ली में पीडब्ल्यूडी विभाग में मल्टी टास्किंग कार्य करता है. आकाश अग्रवाल पीडब्ल्यूडी झांसी में क्लर्क है. गिरफ्तार आरोपियों की रिपोर्ट संबंधित विभागों को भी भेज रही है एसटीएफ, जिसके आधार पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी.
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प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें