Som Pradosh Vrat March 2026 Date: कब है चैत्र माह का अंतिम प्रदोष? त्रयोदशी व्रत के क्या हैं 5 नियम, जानें तारीख, मुहूर्त और महत्व
सोम प्रदोष किस दिन है?
पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 30 मार्च को सुबह 7 बजकर 9 मिनट पर होगा. यह तिथि 31 मार्च को सुबह 6 बजकर 55 मिनट तक मान्य है.
ऐसे में उदयातिथि के आधार पर चैत्र शुक्ल त्रयोदशी तिथि 31 मार्च को है, लेकिन त्रयोदशी तिथि का प्रदोष मुहूर्त 30 मार्च को प्राप्त हो रहा है, इसलिए सोम प्रदोष व्रत भी 30 मार्च को रखना उचित है.
सोम प्रदोष 2026 मुहूर्त
30 मार्च को सोम प्रदोष व्रत के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को 6 बजकर 38 मिनट पर प्रारंभ है और रात को 8 बजकर 57 मिनट तक है. 2 घंटे 19 मिनट के शुभ मुहूर्त में आपको प्रदोष व्रत की पूजा कर लेनी चाहिए.
इस दिन का ब्रह्म मुहूर्त 04:41 ए एम से 05:27 ए एम तक रहेगा, वहीं दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त दोपहर में 12:01 पी एम से लेकर 12:51 पी एम तक है.
प्रदोष व्रत के दिन निशिता मुहूर्त रात 12 बजकर 02 मिनट से प्रारंभ है, जो मध्य रात्रि 12 बजकर 48 मिनट तक है.
रवि योग में सोम प्रदोष व्रत
इस बार के प्रदोष व्रत पर रवि योग बन रहा है. रवि योग दोपहर में 02 बजकर 48 मिनट पर बनेगा और 31 मार्च को सुबह 06 बजकर 13 मिनट तक रहेगा. इस योग में सूर्य देव का प्रभाव अधिक होता है, जिसकी वजह से इस योग में दोष मिट जाते हैं. इसमें आप कोई शुभ कार्य कर सकते हैं. यह शुभ फलदायी योग माना जाता है.
कैलाश पर शिववास
प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव का वास कैलाश पर सुबह 7 बजकर 9 मिनट तक रहेगा. उसके बाद शिव का वास नंदी पर होगा. इस वास में रुद्राभिषेक करना शुभ फलदायी होता है.
प्रदोष व्रत के 5 नियम
- प्रदोष व्रत रखने के लिए एक दिन पहले से सात्विक भोजन करें. तामसिक वस्तुओं का सेवन न करें.
- प्रदोष की सुबह में स्नान के बाद व्रत और पूजा का संकल्प करें. दिन में दैनिक पूजा कर लें.
- प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में ही होती है. जब सूर्यास्त हो जाए तो प्रदोष काल शिव मंदिर या अपने पूजा घर में महादेव की पूजा करें.
- इस व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद होगा. सोम प्रदोष व्रत का पारण 31 मार्च को सुबह 6 बजकर 55 मिनट के बाद करें.
- शिव जी की पूजा में तुलसी के पत्ते, शंख, केवड़ा, केतकी के फूल आदि का उपयोग न करें.