Chaitra Navratri 2026 Day 8: मां महागौरी की कृपा चाहिए? आज दुर्गाष्टमी पर जरूर करें ये खास पूजा, जानें पूजा विधि, मंत्र, भोग, शुभ रंग और आरती
Chaitra Navratri 2026 Day 8: चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन आते ही घरों का माहौल अपने आप बदल जाता है सुबह की आरती, रसोई में बनने वाले भोग की खुशबू और कन्या पूजन की तैयारियां. आज दुर्गाष्टमी है, यानी मां महागौरी की आराधना का विशेष दिन. माना जाता है कि इस दिन की गई पूजा न सिर्फ मन को शांति देती है, बल्कि जीवन की उलझनों को भी धीरे-धीरे सुलझा देती है. बहुत से लोग इस दिन को सिर्फ एक धार्मिक परंपरा मानते हैं, लेकिन असल में यह आत्मशुद्धि और नए संकल्प लेने का दिन भी है. मां महागौरी का स्वरूप सादगी, पवित्रता और धैर्य का प्रतीक है और यही वजह है कि उनकी पूजा का असर केवल आस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जीवनशैली में भी झलकता है.
पूजा का महत्व और जीवन से जुड़ाव
मां महागौरी की पूजा को केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन और सकारात्मकता से भी जोड़ा जाता है. कहा जाता है कि इस दिन की गई आराधना से घर में सुख-शांति बनी रहती है और वैवाहिक जीवन में स्थिरता आती है.
मां महागौरी की पूजा विधि
-सुबह जल्दी उठकर स्नान करना इस दिन का पहला और जरूरी कदम माना जाता है.
-इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थल को साफ कर मां महागौरी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है.
-कई परिवारों में आज भी गंगाजल से प्रतिमा को स्नान कराने की परंपरा निभाई जाती है, जो शुद्धता का प्रतीक है.
-पूजा के दौरान सफेद रंग का विशेष महत्व होता है.
-मां को सफेद वस्त्र अर्पित किए जाते हैं और साथ ही सफेद फूल जैसे मोगरा या चमेली चढ़ाए जाते हैं.
-रोली, कुमकुम और अक्षत से विधिवत पूजा की जाती है.
-इसके बाद मिष्ठान, फल और पंचमेवा का भोग लगाया जाता है.
कन्या पूजन का महत्व
अष्टमी के दिन कन्या पूजन को बेहद शुभ माना जाता है. नौ छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है. उन्हें पूड़ी, हलवा और काले चने का भोजन कराया जाता है. कई घरों में यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है, जहां परिवार के सभी सदस्य मिलकर इस अनुष्ठान में शामिल होते हैं.
मां महागौरी का प्रिय भोग और रंग
इस दिन बनाए जाने वाले भोग में सादगी और श्रद्धा दोनों दिखती हैं. हलवा-पूड़ी, काले चने और खीर को विशेष रूप से मां को अर्पित किया जाता है. नारियल भी मां को बेहद प्रिय माना जाता है.
शुभ रंग
सफेद रंग आज का शुभ रंग है. लोग अक्सर सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनते हैं, जो शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संकेत देते हैं. यह रंग मन को स्थिर रखने में भी मदद करता है शायद यही वजह है कि इसे महागौरी से जोड़ा जाता है.
मंत्र और पूजा का आध्यात्मिक असर
“या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः.”
नियमित जाप से मन में एक अलग तरह की शांति महसूस होती है. कई लोग बताते हैं कि इस दिन मंत्रोच्चारण के दौरान ध्यान लगाना आसान हो जाता है, जैसे वातावरण खुद ही ध्यानमय हो गया हो.
मां महागौरी की कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. वर्षों तक चली इस तपस्या के कारण उनका शरीर काला पड़ गया था. लेकिन जब भगवान शिव उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए, तो उन्होंने देवी को गंगा में स्नान करने का वर दिया. गंगा स्नान के बाद उनका स्वरूप अत्यंत उज्ज्वल हो गया दूध जैसा सफेद, शांत और तेजस्वी. तभी से उन्हें ‘महागौरी’ कहा जाने लगा. यह कथा केवल एक धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि यह भी बताती है कि कठिन परिस्थितियों के बाद भी जीवन में उजाला लौट सकता है.
मां महागौरी की आरती
जय महागौरी जगत की माया. जय उमा भवानी जय महामाया॥
हरिद्वार कनखल के पासा . महागौरी तेरा वहा निवास॥
चंदेर्काली और ममता अम्बे जय शक्ति जय जय मां जगदम्बे॥
भीमा देवी विमला माता कोशकी देवी जग विखियाता॥
हिमाचल के घर गोरी रूप तेरा महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥
सती ‘सत’ हवं कुंड में था जलाया उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥
हिमाचल के घर गोरी रूप तेरा महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥
सती ‘सत’ हवं कुंड में था जलाया उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥
बना धर्म सिंह जो सवारी मैं आया तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥
तभी मां ने महागौरी नाम पाया शरण आने वाले का संकट मिटाया॥
शनिवार को तेरी पूजा जो करता मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥
‘चमन’ बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)