शादी में देरी क्यों होती है? गरुड़ पुराण में बताए 7 चौंकाने वाले कारण जो कोई नहीं बताता, आपको भी जानना जरूरी

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Marriage Delay Reasons: आजकल एक बात बहुत कॉमन हो गई है-रिश्ते आते हैं, बात आगे बढ़ती है, फिर अचानक सब रुक जाता है. घरवाले परेशान, और खुद इंसान अंदर से थक चुका होता है. कई लोग इसे किस्मत, टाइमिंग या बस “अभी सही इंसान नहीं मिला” कहकर टाल देते हैं, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि इसके पीछे कुछ गहरे कारण भी हो सकते हैं? दिलचस्प बात ये है कि हजारों साल पहले लिखे गए ग्रंथों में भी इन सवालों के जवाब मिलते हैं. खासकर गरुड़ पुराण, जिसे लोग अक्सर सिर्फ मृत्यु से जोड़ते हैं, लेकिन असल में ये जीवन के हर पहलू को छूता है-रिश्तों से लेकर मन की उलझनों तक. इस आर्टिकल में हम उसी नजरिए से समझेंगे कि आखिर शादी में बार-बार रुकावट क्यों आती है और क्या इसका हल सिर्फ भाग्य नहीं, बल्कि हमारे अपने भीतर भी छिपा है.

गरुड़ पुराण क्या कहता है रिश्तों के बारे में?<br />गरुड़ पुराण के मुताबिक शादी सिर्फ दो लोगों का मिलना नहीं है, बल्कि दो आत्माओं का फिर से जुड़ना है. यानी यह एक तरह से “कॉस्मिक कनेक्शन” है, अगर यह सही समय और परिस्थिति में नहीं बनता, तो रिश्ते बार-बार अटकते हैं.

1. पिछले कर्मों का असर हम जो आज जी रहे हैं, वो सिर्फ इस जन्म का नहीं होता. कई बार पुराने कर्म भी असर डालते हैं, अगर कभी किसी रिश्ते में भरोसा टूटा हो या किसी को दुख दिया गया हो, तो उसका असर आगे चलकर रिश्तों में देरी के रूप में दिख सकता है. असल बदलाव तब आता है जब इंसान अपनी गलतियों को स्वीकार करता है, दूसरों को माफ करता है और खुद को भी माफ करना सीखता है.

2. पितृ दोष और पूर्वजों की अनकही कहानियां बहुत लोग इसे अंधविश्वास मानते हैं, लेकिन इसे एक अलग नजर से भी समझा जा सकता है. आज की साइंस में “एपिजेनेटिक्स” बताता है कि हमारे पूर्वजों के अनुभव और भावनाएं हमारे अंदर तक आ सकती हैं, अगर परिवार में किसी के साथ अन्याय हुआ हो, या कुछ अधूरा रह गया हो, तो उसका असर अगली पीढ़ी के रिश्तों पर भी पड़ सकता है.

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3. खुद का स्वभाव भी बनता है रुकावट सच थोड़ा कड़वा होता है-कई बार समस्या बाहर नहीं, हमारे अंदर होती है. “मुझे परफेक्ट पार्टनर चाहिए”, “मैं कॉम्प्रोमाइज नहीं करूंगा”-ये बातें सुनने में सही लगती हैं, लेकिन यही सोच रिश्तों को बनने से रोक देती है. जितना हम दूसरों में कमी ढूंढते हैं, उतना ही हम खुद को सीमित कर लेते हैं.

4. ग्रहों का असर, लेकिन पूरी कहानी नहीं कई लोग मानते हैं कि कुंडली और ग्रह शादी में देरी का कारण बनते हैं. शुक्र और मंगल जैसे ग्रहों का असर माना जाता है, लेकिन एक जरूरी बात-ग्रह सिर्फ संकेत देते हैं, फैसला नहीं करते. जैसे मौसम का अनुमान होता है, वैसे ही ये भी एक संकेत हैं. असली बदलाव हमारे कर्म और सोच से आता है.

5. घर का माहौल और ऊर्जा अगर घर में रोज झगड़े होते हों, सम्मान की कमी हो, या माहौल भारी रहता हो, तो इसका असर रिश्तों पर पड़ता है. आपने खुद भी महसूस किया होगा-कुछ घरों में जाते ही अच्छा लगता है, और कुछ जगहों पर बिना वजह बेचैनी होती है. रिश्ते सिर्फ दो लोगों के नहीं होते, पूरे माहौल से प्रभावित होते हैं.

6. मन के अंदर छिपे डर बहुत बार हम कहते हैं कि हमें शादी करनी है, लेकिन अंदर कहीं न कहीं डर बैठा होता है. -“अगर रिश्ता टूट गया तो?” -“अगर सामने वाला बदल गया तो?” -“मेरी आजादी खत्म हो जाएगी?” ये डर हमें अच्छे रिश्तों से भी दूर कर देते हैं. कई बार हम अनजाने में ऐसे लोगों को चुनते हैं जो उपलब्ध ही नहीं होते.

7. अधूरी मन्नतें और वादे<br />कभी आपने घर के बड़ों से सुना होगा-“मन्नत मांगी थी, पूरी नहीं हुई.” गरुड़ पुराण के अनुसार, अगर कोई वादा अधूरा रह जाए, तो वह भी जीवन में रुकावट बन सकता है. यह जरूरी नहीं कि हर केस में ऐसा हो, लेकिन कई परिवारों में यह एक कारण के रूप में सामने आता है.

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