गोंडा का रहस्यमयी स्थान, जहां ईंट खिलाने से पशुओं को मिलता है आराम..यहां जानिए सच्चाई
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लोकल 18 से बातचीत के दौरान ग्रामीणों के अनुसार यह परंपरा कई सालों से चली आ रही है. गांव के बुजुर्ग पारस नाथ मिश्र बताते हैं कि पहले के समय में जब पशुओं के इलाज के लिए डॉक्टर या दवाइयां आसानी से उपलब्ध नहीं होती थीं, तब लोग इस ईंट का सहारा लेते थे. उस समय पशुओं को यह ईंट खिलाई जाती थी और कई बार पशु ठीक भी हो जाते थे.
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिला के विकासखंड मुजेहना के उज्जैनी कला में एक ऐसा अनोखा स्थान है, जहां के ईंट को ग्रामीण बहुत खास मानते हैं. यहां के लोगों का कहना है कि इस जगह की ईंट पशुओं के लिए काफी फायदेमंद होती है. अगर कोई पशु बीमार हो जाता है, तो ग्रामीण उसे यहां की ईंट खिलाते हैं. उनका मानना है कि इससे पशुओं को आराम मिलता है और उनकी तबीयत धीरे-धीरे ठीक होने लगती है.
सालों से चली आ रही है परंपरा
लोकल 18 से बातचीत के दौरान ग्रामीणों के अनुसार यह परंपरा कई सालों से चली आ रही है. गांव के बुजुर्ग पारस नाथ मिश्र बताते हैं कि पहले के समय में जब पशुओं के इलाज के लिए डॉक्टर या दवाइयां आसानी से उपलब्ध नहीं होती थीं, तब लोग इस ईंट का सहारा लेते थे. उस समय पशुओं को यह ईंट खिलाई जाती थी और कई बार पशु ठीक भी हो जाते थे. इसी वजह से लोगों का इस ईंट पर भरोसा बढ़ता गया.
कितनी पुरानी है परंपरा
पारस नाथ मिश्र बताते हैं कि हमारे पूर्वजों के द्वारा इसी स्थान पर ठाकुर द्वारा का निर्माण हुआ था, लेकिन समय बितता गया और ठाकुर द्वारा गिर गया. फिर गांव के एक लोग के पशु बीमार हो गया तो उन्होंने यहां का एक ईंट ले जाकर अपने पशु को पीसकर पिलाया तो उसको काफी आराम मिला. फिर ये बात पूरे गांव में फैल गई और इसके बाद जिसके पशु बीमार होते थे वह यहां के ईंट ले जाकर अपने पशु को पीसकर पिलाते थे और पशुओं को आराम मिल जाता था. तब से यह परंपरा चली आ रहा है.
पशुओं को पेट की समस्या में मिलता है आराम
यह परंपरा काफी पुरानी और प्राचीन मानी जाती है. आज भी यदि हमारे ग्राम सभा में और अगल-बगल के गांव में यदि किसी के पशु बीमार होते हैं तो यहां पर आते हैं और ठाकुर द्वारा पर माथा टेकते हैं, तो उसके बाद यहां से एक ईंट ले जाकर अपने पशु को पीसकर पिला देते हैं तो उनके पशुओं को आराम हो जाता है. उन्होंने बताया कि पशुओं के पेट में समस्या है तो यहां का ईंट पिलाने से उनकी समस्या दूर हो जाती है.
हमारे पशु को हुआ आराम
शिवांश मिश्रा बताते हैं कि एक बार हमारे यहां एक पशु बीमार हो गया था. फिर हमने यहां पर आकर एक ईंट ले जाकर उसकी पिसाई करने के बाद सुबह-शाम जैसे दवा दी जाती है. उसी प्रकार से मैं इस ईंट को अपने पशु को पिलाया तो हमारे पशु को आराम मिल गया.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें