Dark Web Crime India: मिडिल ईस्ट से नेपाल और फिर ‘स्कूटी’ पर मौत! दिल्ली के शाहबाज अंसारी का ‘डार्क वेब’ वाला खूनी कारोबार
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Dark Web Crime India: दिल्ली में पकड़े गए हथियार तस्करी के इस बड़े नेटवर्क ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है. पाकिस्तान से नेपाल के रास्ते दिल्ली तक हथियार पहुंचाए जा रहे थे और स्कूटी के जरिए गैंग्स तक सप्लाई हो रही थी. पुलिस ने 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर 21 विदेशी हथियार बरामद किए हैं, जिससे एक बड़े क्रिमिनल प्लान का खुलासा हुआ है. पढ़िए चौंका देने वाली खबर.

दिल्ली में पाकिस्तान-नेपाल रूट से चल रहे हथियार तस्करी नेटवर्क का खुलासा. (AI फोटो)
Dark Web Crime India: राजधानी दिल्ली की भीड़भाड़ वाली गलियों में चलती एक आम सी स्कूटी… लेकिन उसके अंदर छिपा था मौत का सामान. यह कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि हकीकत है. मिडिल ईस्ट से नेपाल होते हुए दिल्ली तक पहुंचने वाले हथियारों का ऐसा नेटवर्क सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया. सवाल सिर्फ तस्करी का नहीं है. सवाल है उस सिस्टम का जो इतनी बड़ी साजिश को महीनों तक पनपने देता रहा. और यही वजह है कि इस पूरे मामले ने कानून-व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय तस्करी के खतरनाक गठजोड़ पर नई बहस छेड़ दी है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे सिंडिकेट के पीछे नाम सामने आया है शाहबाज अंसारी. एक ऐसा फरार मास्टरमाइंड, जिसने कबाड़ के नाम पर हथियारों की सप्लाई चेन बना दी. पाकिस्तान से हथियारों के पार्ट्स निकलते, मिडिल ईस्ट होते हुए नेपाल पहुंचते और फिर भारत की सीमा पार कर दिल्ली की तंग गलियों में इकट्ठा होते. यहां से स्कूटी, कार और छोटे-छोटे नेटवर्क के जरिए ये हथियार गैंगस्टर्स तक पहुंचाए जाते थे.
डार्क वेब नेटवर्क और स्कूटी मॉडल
- दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस हाईटेक गैंग का पर्दाफाश करते हुए 10 लोगों को गिरफ्तार किया और 21 विदेशी हथियार बरामद किए. इन हथियारों में चेक सबमशीन गन, ब्राजील, जर्मनी और इटली की पिस्टल्स शामिल हैं, जो आमतौर पर स्पेशल फोर्सेज इस्तेमाल करती हैं. पुलिस के मुताबिक इन हथियारों का इस्तेमाल उत्तर भारत में टारगेट किलिंग के लिए किया जाना था.
- जांच में खुलासा हुआ कि हथियारों को पहले पाकिस्तान में अलग-अलग पार्ट्स में तोड़ा जाता था. फिर इन्हें ‘मेटल स्क्रैप’ के नाम पर मिडिल ईस्ट और वहां से नेपाल भेजा जाता था. नेपाल में इन्हें दोबारा असेंबल किया जाता और फिर भारत-नेपाल बॉर्डर से तस्करी कर दिल्ली लाया जाता. इस पूरे ऑपरेशन में तकनीक का भी जमकर इस्तेमाल हुआ एन्क्रिप्टेड कॉल, फर्जी सिम और हवाला के जरिए पेमेंट.
- 13 मार्च की रात दरीयागंज में पुलिस ने जाल बिछाया और राहुल, हाशिम और साइम नाम के तीन लोगों को पकड़ा. उनकी स्कूटी से एक पिस्टल बरामद हुई. पूछताछ में खुलासा हुआ कि पिछले 9 महीनों में ये लोग करीब 75 हथियार गैंग्स तक पहुंचा चुके थे. इसके बाद पुलिस ने लगातार छापेमारी कर कई और आरोपियों को गिरफ्तार किया.
इस तस्करी नेटवर्क का सबसे खतरनाक पहलू क्या था?
इस नेटवर्क का सबसे खतरनाक पहलू इसकी अंतरराष्ट्रीय पहुंच और तकनीकी इस्तेमाल था. पाकिस्तान से शुरू होकर नेपाल और फिर भारत तक फैला यह नेटवर्क कई लेयर्स में काम करता था. एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और फर्जी सिम कार्ड के जरिए इसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो गया था.
दिल्ली में इस नेटवर्क का ऑपरेशन कैसे चलता था?
दिल्ली में पुराने इलाकों को हब बनाया गया था, जहां हथियारों को छिपाया और आगे सप्लाई किया जाता था. स्कूटी और छोटे वाहनों का इस्तेमाल इसलिए किया जाता था ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके और भीड़भाड़ में आसानी से मूवमेंट हो सके.
क्या इस नेटवर्क का संबंध बड़े गैंग्स से था?
पुलिस को शक है कि ये हथियार बड़े क्रिमिनल गैंग्स को सप्लाई किए जा रहे थे, जो इनका इस्तेमाल टारगेट किलिंग और गैंगवार में करते. यानी यह सिर्फ तस्करी नहीं, बल्कि बड़े अपराधों की तैयारी थी.
कबाड़ से ‘कातिल’ तक का सफर
इस पूरे मामले ने एक बात साफ कर दी है अपराधी अब सिर्फ बंदूक नहीं खरीदते, बल्कि पूरी सप्लाई चेन बनाते हैं. शाहबाज अंसारी का यह नेटवर्क उसी का उदाहरण है जहां कबाड़ के नाम पर मौत का सामान देश में घुसाया जा रहा था. पुलिस की कार्रवाई से भले ही इस गैंग को बड़ा झटका लगा हो, लेकिन यह भी साफ है कि ऐसी तस्करी को रोकने के लिए लगातार सतर्क रहना जरूरी है.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें