कोस्ट गार्ड के ‘ध्रुव’ ने फिर आसमान में फैलाए पंख, 15 महीने से थे ग्राउंडेड, समंदर की सुरक्षा हुई मजबूत
नई दिल्ली: भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. करीब 15 महीने के लंबे इंतजार और गहन तकनीकी जांच के बाद एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) ध्रुव ने एक बार फिर आसमान में उड़ान भरना शुरू कर दिया है. 5 जनवरी 2025 को पोरबंदर में हुए एक दुखद हादसे के बाद इन हेलीकॉप्टरों को ग्राउंड (उड़ान पर रोक) कर दिया गया था. अब चरणबद्ध तरीके से इन्हें दोबारा ऑपरेशन्स में शामिल किया जा रहा है.
क्यों थमी थी उड़ान?
पोरबंदर हादसे के बाद सुरक्षा कारणों से सेना के तीनों अंगों और कोस्ट गार्ड के 300 से ज्यादा एएलएच ध्रुव हेलीकॉप्टरों की उड़ान रोक दी गई थी. सुरक्षा ऑडिट और HAL (Hindustan Aeronautics Limited) की डिफेक्ट इन्वेस्टिगेशन टीम की बारीकी से जांच के बाद अब इन्हें क्लीन चिट मिली है. कोच्चि, भुवनेश्वर और चेन्नई बेस से इसकी शुरुआत हो चुकी है और जल्द ही पोरबंदर में भी ये उड़ान भरते नजर आएंगे.
नौसेना और कोस्ट गार्ड के लिए क्यों था विशेष इंतजार?
थलसेना और वायुसेना के हेलीकॉप्टरों को पिछले साल ही मंजूरी मिल गई थी लेकिन कोस्ट गार्ड और नौसेना के लिए मानक अलग थे.
· समुद्री चुनौतियां: ये हेलीकॉप्टर समुद्र के ऊपर विशेष सेंसर और फ्लोटेशन डिवाइस के साथ काम करते हैं.
· डेक लैंडिंग: युद्धपोतों के संकरे डेक पर लैंडिंग के लिए इनका ओवर-द-नोज विजन और अंडरकैरेज अधिक उन्नत होता है.
· कठोर परीक्षण: अब हर 100 घंटे की उड़ान के बाद इनका गहन निरीक्षण किया जाएगा, जो सामान्य प्रक्रिया से कहीं अधिक सख्त है.
मुख्य प्वाइंट्स
· वर्तमान फ्लीट: कोस्ट गार्ड के पास अभी 18 ध्रुव हेलीकॉप्टर हैं जबकि 6 और पाइपलाइन में हैं.
· थलसेना का दबदबा: सबसे ज्यादा 145 ALH थलसेना के पास हैं जिनमें 75 वेपनाइज्ड रुद्र (मार्क 4) शामिल हैं.
· वायुसेना की ताकत: भारतीय वायुसेना लगभग 70 ध्रुव हेलीकॉप्टरों का संचालन करती है.
· विभिन्न वर्जन: सेना मार्क-1 से लेकर वेपनाइज्ड मार्क-4 तक के अलग-अलग वर्जन्स का उपयोग कर रही है.
समुद्री सुरक्षा के लिए संजीवनी
एएलएच ध्रुव का दोबारा सक्रिय होना भारत की तटीय सुरक्षा के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है. समुद्री सीमाओं की निगरानी, सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन और आपदा प्रबंधन में यह हेलीकॉप्टर रीढ़ की हड्डी माना जाता है. 100 घंटे के अंतराल पर होने वाला विशेष निरीक्षण यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में तकनीकी खामी की गुंजाइश शून्य रहे.
सवाल-जवाब
एएलएच ध्रुव हेलीकॉप्टरों को ग्राउंड क्यों किया गया था?
5 जनवरी 2025 को पोरबंदर में कोस्ट गार्ड का एक एएलएच क्रैश हो गया था, जिसके बाद सुरक्षा जांच के लिए पूरे फ्लीट की उड़ान पर रोक लगा दी गई थी.
कोस्ट गार्ड के हेलीकॉप्टर थलसेना के हेलीकॉप्टरों से कैसे अलग होते हैं?
कोस्ट गार्ड के हेलीकॉप्टरों में समुद्र में लैंडिंग के लिए फ्लोटेशन डिवाइस और विशेष समुद्री सेंसर लगे होते हैं, जो उन्हें पानी के ऊपर ऑपरेशन के लिए सक्षम बनाते हैं.
एएलएच का सबसे शक्तिशाली वर्जन कौन सा है?
एएलएच मार्क 4, जिसे ‘रुद्र’ के नाम से जाना जाता है, सबसे शक्तिशाली और वेपनाइज्ड (हथियारों से लैस) वर्जन है.
अब हेलीकॉप्टरों की जांच का नया नियम क्या है?
सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब हर 100 घंटे की उड़ान के बाद इन हेलीकॉप्टरों का विशेष तकनीकी निरीक्षण किया जाएगा.