रिवेंज पर बनी वो थ्रिलर फिल्म, मोहम्मद रफी-आशा भोसले ने गाया कालजयी सॉन्ग, मूवी ने की बंपर कमाई

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Bollywood Movie based on Revenge : कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, सीधे दिल में बस जाती हैं. बॉलीवुड के इतिहास की पहली मसाला फिल्म 70 के दशक में आई थी. इस फिल्म में एक्शन, रोमांस, ड्रामा, म्यूजिक, क्राइम-थ्रिल हर फॉर्मूला आजमाया गया था. फिल्म की स्क्रिप्ट सलीम-जावेद ने लिखी थी. सबसे दिलचस्प बात यह है कि फिल्म का टाइटल ट्रैक दो लीजेंड सिंगर मोहम्मद रफी और किशोर कुमार ने गाया था. इस फिल्म ने सिनेमाघरों में धूम मचा दी थी. इस फिल्म में बॉलीवुड के सुपर स्टार आमिर खान ने भी काम किया था. यह फिल्म कौन सी थी, सदाबहार गाने कौन से थे, आइये जानते हैं…..

आमिर खान के पिता नासिर हुसैन ने ‘यादों की बारात’ नाम से फिल्म बनाई. फिल्म का निर्देशन-प्रोडक्शन भी नासिर हुसैन ने ही किया था. फिल्म में धर्मेंद्र, विजय अरोड़ा, तारिक खान, जीनत अमान, नीतू सिंह, अजीत और कैप्टन राजू लीड रोल में थे. आरडी बर्मन की सुरीली धुनों पर मजरूह सुल्तानपुरी ने गीत लिखे थे. फिल्म का म्यूजिक सदाबहार था. फिल्म का पॉप्युलर गाना ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को’ मूवी की पहचान बन गया. आशा भोसले और मोहम्मद रफी ने इस कालजयी गीत को गाया था.

‘यादों की बारात’ में कुल 6 गाने थे. नासिर हुसैन की फिल्मों का म्यूजिक हमेशा कर्णप्रिय रहा है. फिल्म के टाइटल ट्रैक ‘यादों की बारात निकली है दिल के द्वारे’ के दो वर्जन थे. एक वर्जन मोहम्मद रफी-किशोर कुमार ने गाया था. दूसरा वर्जन लता मंगेशकर, पद्मिनी कोल्हापुरे और सुष्मा श्रेष्ठ (पूर्णिमा) ने गाया था. 

फिल्म का सबसे रोमांटिक सदाबहार गाना ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को, नजर नहीं चुराना सनम’ था. यह गाना हॉलीवुड के एल्बम सॉन्ग ‘इफ इट्स ट्यूजडे, दिस मस्ट बी बेल्जियम’ से इंस्पायर्ड था.

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दिलचस्प बात यह है कि 1973 में सलीम-जावेद की जोड़ी ने ‘वक्त’ फिल्म से इंस्पायर्ड होकर एक कहानी लिखी. ‘वक्त’ और ‘यादों की बारात’ फिल्मों में कई समानताए हैं. दोनों फिल्मों में परिवार के सदस्य शुरू में बिछड़ते हैं और कहानी के अंत में मिल जाते हैं. यानी इस फिल्म में ‘खोया-पाया’ का फॉर्मूला आजमाया गया था. यह फॉर्मूला आगे चलकर मनमोहन देसाई ने अपनी फिल्मों में खूब आजमाया और कई सुपरहिट फिल्में दीं जिसमें धरम-वीर, अमर अकबर एंथोनी प्रमुख रूप से शामिल हैं.

‘यादों की बारात’ की कहानी 1973 की सलीम-जावेद की फिल्म ‘जंजीर’ से भी मिलती-जुलती है. दोनों कहानियां बदले की हैं. ‘यादों की बारात में धर्मेंद्र अपने पिता का कातिल का चेहरा नहीं देख पाते. जंजीर में भी हमें कुछ इसी तरह की कहानी देखने को मिली थी. दोनों फिल्मों की कहानी में फर्क सिर्फ इतना था कि ‘यादों की बारात में’ तीन बच्चे थे जबकि जंजीर में सिर्फ एक बच्चा था जो बड़ा होकर इंस्पेक्टर बनता है और जंजीर से अपने पिता के कातिल की पहचान करता है.

‘यादों की बारात’ और ‘जंजीर’ के मेन विलेन अजीत ही थे. ‘यादों की बारात’ में वो शाकाल के रोल में थे तो ‘जंजीर’ में उन्होंने सेठ धरम दयाल तेजा का किरदार निभाया था. ‘यादों की बारात’ ने नीतू सिंह को पहचान दी. ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ के बाद जीनत अमान की यह एक और सुपरहिट फिल्म थी.

फिल्म में आमिर खान ने चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर काम किया था. उन्होंने तारिक खान के बचपन का रोल निभाया था. जो गिटार तारिक खान ने फिल्म में बजाया, उसी गिटार को आमिर खान ने अपनी डेब्यू फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ में बजाया था.

यादों की बारात फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया था. मूवी ने करीब 4.25 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह उस साल की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी. 1973 का साल धर्मेंद्र के लिए बहुत ही खास रहा. इसी साल बॉलीवुड को अमिताभ बच्चन के रूप में एंग्रीमैन मिला.

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