किचन वेस्ट से बनाएं मुफ्त जैविक खाद I bahraich news
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गार्डनिंग के शौकीनों के लिए अच्छी खबर है, अब पौधों की देखभाल के लिए महंगी खाद खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी. घर में रोज निकलने वाले फल-सब्जियों के छिलके और दूध वाले बर्तन का पानी पौधों के लिए बेहतरीन जैविक खाद का काम कर सकता है. इन वेस्ट चीजों को इकट्ठा कर इस्तेमाल करने से पौधों को जरूरी पोषण मिलता है, उनकी तेजी से वृद्धि होती है और घर का कचरा भी कम होता है.
बहराइच. गार्डनिंग का शौक तो लगभग हर किसी को होता है, लेकिन जब बात आती है देखभाल की तो लोग परेशान होने लगते हैं. ऐसे में बहुत सारे लोग तो खाद और पानी से ही परेशान रहते हैं और जानकारी न होने के अभाव से उनके पौधे एक समय के बाद सूख जाते हैं. ऐसे लोगों को अब परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि उनको मुफ्त में उनके घर से ही खाद वेस्ट चीजों से प्राप्त होगी.
घर में ही छिपी है बेहतरीन खाद
अक्सर हम खाने, पीने के लिए साग, सब्जी फल, फ्रूट घर लेकर आते हैं. उनके छिलके उतारने के बाद उनको बनाकर या काट कर खाते हैं. लेकिन क्या आपको पता है. जिस छिलके को हम कचरा समझकर बाहर फेंक देते हैं. दरअसल, वह हमारे गार्डन के लिए किसी जैविक खाद से कम नहीं है चाहे फल का छिलका हो या फिर सब्जियों का विटामिन और प्रोटीन ये सब इसमें होता है. तो अब आगे से जब भी फल या सब्जी के छिलके उतारे तो उनको इकट्ठा कर लें और अपने गार्डन में डाल दें या सड़ने के बाद एक अच्छी खाद के रूप में आपके पौधों को ऊर्जा प्रदान करते हैं. इससे आपके घर का कचरा भी साफ हो जाता है और पौधों को खाद भी मिल जाती है.
हर रोज घरों से फेंका जाता है या पानी यह भी है वरदान
शायद ही कोई घर ऐसा हो जहां पर दूध का इस्तेमाल न किया जाता हो और दूध को रखने के लिए बर्तन का, लेकिन क्या आपको पता है, जिस दूध को बर्तन में उबाला या रखा जाता है. सुबह उसको मांज धो कर उसका पानी फेंक दिया जाता है. अब आप उस बर्तन में पानी इकट्ठा करके अपने पौधों को दे सकते हैं यह पानी पौधों के लिए वरदान साबित होता है और इससे पौधों में तेजी से वृद्धि होती है. पौधों को एनर्जी मिलती है इससे पौधे जल्दी मरते नहीं है और लंबे समय तक चलते हैं. तो आगे से जब भी दूध वाले बर्तन का पानी हो आप इसको पौधे में जरूर डालें.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें