पुरानी कार, रील कैमरा और तार वाला फोन
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अमेठी में आज भी पुराने दौर की कई अनमोल धरोहरें सुरक्षित हैं, जो 90 के दशक और उससे पहले की यादों को जीवित रखे हुए हैं. कहीं 1991 मॉडल की विंटेज बुलेट है तो कहीं चंदन की लकड़ी से बना मियाना, राजमहल की ऐतिहासिक कार, तार वाला फोन, रील कैमरा और बैलगाड़ी जैसी विरासतें आज भी लोगों के पास मौजूद हैं. आधुनिक दौर के बीच इन चीजों को संजोकर अमेठी के लोग अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को जिंदा रखे हुए हैं.
हमारे आसपास कई ऐसी चीज होती हैं जो पुराने दौर की होती हैं, जिससे हम 90 के दशक का खजाना बिना किसी संकोच के कह सकते हैं. इस पुरानी धरोहर की तरह अमेठी के अलग-अलग लोगों के पास कुछ चीज मौजूद है जिसमें एक शख्स के पास विंटेज संग्रह में 1991 मॉडल की रॉयल एनफील्ड बुलेट भी मौजूद है. यह बुलेट आज भी स्टार्ट होते ही पुराने दौर की याद दिला देती है. ये शख्स अमेठी के संग्रामपुर के रहने वाले हैं उनके पास कई पुरानी चीज हैं और उसके लिए वह प्रसिद्ध भी हैं.
आज के आधुनिक दौर में जहां शादियों में कार और लक्जरी गाड़ियां आम हो गई हैं, वहीं एक समय ऐसा भी था जब दुल्हन की विदाई लकड़ी से बने मियाना में होती थी. अब यह परंपरा लगभग समाप्त हो चुकी है, लेकिन उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के छिटेपुर गांव में यह विरासत आज भी जीवित है. गांव वाले इसे बड़े गर्व और श्रद्धा से संजोए हुए हैं और अब भी इसका इस्तेमाल धार्मिक और पारिवारिक आयोजनों में करते हैं. गांव में मियाना आज भी मौजूद है और 1959 में इसका निर्माण चंदन की लकड़ी से कराया गया था आज भी यह नया जैसा है.
विदेश में मौजूद कार जो राजा के जमाने की हुआ करती थी और अंग्रेज भी इसका इस्तेमाल अपने सफ़र में करते थे. वह कार आज भी अमेठी जिले के जामों राजमहल में मौजूद है. यही नहीं इस कार के पहिए जाम हो कार आज भी चलने फिरने की स्थिति में है. इसके साथ ही इसकी पहचान कार में दिए गए नंबर us763 से है. इसे मजबूत धरोहर के रूप में आज भी प्रदर्शित करते है. इसका इस्तेमाल जब कोई मॉडल प्रदर्शनी लगती है या फिर कोई बड़ा आयोजन जो ऐतिहासिक और हिस्टोरिकल होता है उसमें किया जाता है. जिसे लोग देखने के लिए दूर-दूर से आते हैं इसके साथ ही राजमहल में भी लोग जाकर इसके साथ तस्वीरें खींचते हैं.
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तार वाला फोन भी पुरानी धरोहर से कम नहीं हुआ करता था, पहले के जमाने में जब लोगों के पास कीपैड या एंड्रॉयड फोन नहीं हुआ करते थे तो इसी के जरिए सूचनाओं का आदान-प्रदान होता था. इस फोन को आज भी अमेठी में संजोकर रखा गया है. अमेठी के गौरीगंज के एक व्यक्ति हेरम्भ शुक्ला के यहां ये आज भी मौजूद है. आज भी यह चलता है और चलनें की स्थिति में है. इससे फोन पर बातचीत भी होती है. लेकिन अब इसका इस्तेमाल बहुत ही कम हो रहा है क्योंकि इसकी जगह आजकल बड़े और महंगे एंड्रॉयड फोन ने ले ली है.
रील वाला कैमरा भी पहले के जमाने में खूब चर्चा में रहा है. ऐसे में एक पूराना कैमरा भी आज के डिजिटल दौर में एकदम नया जैसा है. जब डिजिटल दौर नहीं था तो इसी कैमरे के जरिए तस्वीर खींच कर उसे संजोया जाता था. वह कैमरा भी आज गांव के एक शख्स शुभम शुक्ला के पास मौजूद है.
बैलगाड़ी का भी पुराने जमाने में अपना क्रेज हुआ करता था आज तो इसका इस्तेमाल बहुत ही कम होता है. ऐसें मे यह सफर के लिए एक पारम्परिक गाड़ी हुआ करती थी, लोग चाहे पास का सफर होता था चाहें दूर का जब ट्रेन बस और लग्जरी वाहनों का क्रेज नहीं था उस दौर में इसका इस्तेमाल करते थे. आज भी यह अमेठी के सैदपुर गांव मे मथुरा नाम के शख्स के पास मौजूद है.