भिंडी की खेती में चाहिए ज्यादा पैदावार तो अपनाएं ये जरूरी टिप्स, विशेषज्ञ ने बताया पूरा तरीका

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भिंडी की खेती के लिए सबसे पहले खेत की सही तैयारी बेहद जरूरी होती है. खेत की गहरी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरी बनाना चाहिए. इसके बाद, गोबर की सड़ी हुई खाद या कम्पोस्ट खेत में अच्छी तरह मिला दें. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों को शुरुआती अवस्था में जरूरी पोषण मिलता है.

रायबरेली: भिंडी की खेती देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर की जाती है. यह एक ऐसी सब्जी है जिसकी बाजार में सालभर मांग बनी रहती है, इसलिए किसान इससे अच्छी कमाई भी कर सकते हैं. लेकिन कई बार सही जानकारी के अभाव में किसानों को उम्मीद के मुताबिक उत्पादन नहीं मिल पाता है .आईए कृषि विशेषज्ञ से जानते हैं भिंडी की बुवाई से पहले किसान कौन सी जरूरी बातों का ध्यान रखना है जिससे उन्हें अच्छी पैदावार मिल सके.

दरअसल, रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी कृषि रक्षा अधिकारी ऋषि कुमार चौरसिया बीएससी एग्रीकल्चर (कानपुर विश्वविद्यालय) लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि भिंडी की खेती के लिए सबसे पहले खेत की सही तैयारी बेहद जरूरी होती है. खेत की गहरी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरी बनाना चाहिए. इसके बाद, गोबर की सड़ी हुई खाद या कम्पोस्ट खेत में अच्छी तरह मिला दें. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों को शुरुआती अवस्था में जरूरी पोषण मिलता है. अगर मिट्टी उपजाऊ होगी, तो पौधों की बढ़वार भी बेहतर होगी.

उन्नत किस्म के बीज का चयन

ऋषि चौरसिया के मुताबिक हमेशा प्रमाणित और उन्नत किस्म के बीज का ही उपयोग करना चाहिए. बुवाई से पहले बीज उपचार करना भी जरूरी होता है.वह बताते हैं कि बीज को फफूंदनाशक या जैविक घोल से उपचारित करने पर शुरुआती रोगों से बचाव होता है और अंकुरण बेहतर होता है. इससे पौधे मजबूत बनते हैं और नुकसान की संभावना कम हो जाती है.

भिंडी की बुवाई के समय दूरी का भी विशेष ध्यान 

सामान्यतः कतार से कतार की दूरी 30 से 45 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. इससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और हवा का संचार अच्छा रहता है.घनी बुवाई करने से पौधों में रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है और उत्पादन घट सकता है.

सिंचाई प्रबंधन: बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें और फिर मिट्टी की नमी के अनुसार पानी दें. अधिक पानी देने से बीज सड़ सकते हैं, जबकि नमी की कमी से अंकुरण प्रभावित होता है. इसलिए संतुलित सिंचाई ही बेहतर परिणाम देती है. साथ ही खेत में खरपतवार नियंत्रण पर ध्यान दें. समय-समय पर निराई-गुड़ाई करने से पौधों की जड़ों को हवा मिलती है और पोषक तत्वों का सही उपयोग होता है.अगर किसान इन सभी बातों का ध्यान रखते हुए भिंडी की बुवाई करें, तो उन्हें अच्छी पैदावार के साथ बेहतर मुनाफा भी मिल सकता है.

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