1999 वर्ल्ड कप का पोस्टर बॉय, 4 साल में खत्म हुआ करियर, बॉल मानती थी जिसका इशारा, गुमनामी के गलियारे में गायब गेंदबाज

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1999 वर्ल्ड कप का पोस्टर बॉय, 4 साल में खत्म हुआ करियर, बॉल मानती थी इशारा

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देबाशीष मोहंती का करियर छोटा रहा, लेकिन प्रभावी था.  उन्होंने 45 वनडे मैचों में 57 विकेट लिए, जिसमें उनका औसत और स्ट्राइक रेट उस दौर के दिग्गज गेंदबाजों के बराबर था लेकिन हैरानी की बात यह रही कि जिस गेंदबाज में 500 विकेट लेने की काबिलियत दिखती थी, उसे टेस्ट क्रिकेट में सिर्फ 2 मैच खेलने का मौका मिला. टेस्ट क्रिकेट में पर्याप्त मौके न मिलना उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ.

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1999 वर्ल्ड कप का पोस्टर बॉय देबाशीष मोहंती 4 साल में खेल पाया सिर्फ 2 टेस्ट, खत्म हो गया करियर

नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई खिलाड़ी आए और गए, लेकिन कुछ अपनी एक अमिट छाप छोड़ गए उनमें से एक ऐसा ही नाम है ओडिशा के देबाशीष मोहंती.  मोहंती केवल एक गेंदबाज नहीं थे, बल्कि वह एक ‘आर्टिस्ट’ थे, जिनके हाथ से निकली गेंद हवा में बातें करती थी.  साल 1999 के विश्व कप का वह आधिकारिक लोगो  याद कीजिए एक गेंदबाज का अनोखा डिलीवरी स्ट्राइड. वह कोई काल्पनिक चित्र नहीं था, बल्कि देबाशीष मोहंती का सिग्नेचर बॉलिंग एक्शन था.

देबाशीष मोंहती के बारें में एक सचिन तेंदुलकर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि एक बार टोरंटो में खेले गए सहारा कप के मैचों के दौरान पाकिस्तान के महान ओपनर  सईद अनवर को बहुत परेशान किया था. लगातार मोहंती की गेंद पर आउट होने के बाद सईद अनवर ने सचिन से कहा था कि विकेट के पास से कोई गेंदबाज इनस्विंग कैसे कर सकता है.

धमाकेदार शुरुआत और वर्ल्ड कप का नायक

1997 में डेब्यू करने वाले मोहंती ने अपनी बेहतरीन आउट-स्विंग और इन-स्विंग से बल्लेबाजों को परेशानी में डाल दिया था. उनके करियर का सबसे सुनहरा दौर 1999 का इंग्लैंड विश्व कप था. उन परिस्थितियों में मोहंती की स्विंग इतनी घातक थी कि उन्होंने महज 6 मैचों में 10 विकेट चटकाए. जवागल श्रीनाथ के साथ उनकी साझेदारी ने भारत को कई मैच जिताए.  उस समय मोहंती को भारतीय गेंदबाजी का भविष्य माना जा रहा था.

मोहंती का करियर 

देबाशीष मोहंती का करियर छोटा रहा, लेकिन प्रभावी था.  उन्होंने 45 वनडे मैचों में 57 विकेट लिए, जिसमें उनका औसत और स्ट्राइक रेट उस दौर के दिग्गज गेंदबाजों के बराबर था लेकिन हैरानी की बात यह रही कि जिस गेंदबाज में 500 विकेट लेने की काबिलियत दिखती थी, उसे टेस्ट क्रिकेट में सिर्फ 2 मैच खेलने का मौका मिला. टेस्ट क्रिकेट में पर्याप्त मौके न मिलना उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ.

अचानक गायब होने की पहेली

सन 2001 के बाद मोहंती अचानक भारतीय टीम से ओझल हो गए इसके पीछे कई कारण माने जाते हैं. उस दौर में जहीर खान, आशीष नेहरा और अजीत अगरकर जैसे युवा और तेज गेंदबाजों का उभार हो रहा था. मोहंती मुख्य रूप से स्विंग पर निर्भर थे. जैसे ही पिचों से मदद मिलनी कम हुई, उनकी गति को लेकर सवाल उठने लगे. घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन के बावजूद उन्हें दोबारा वह भरोसा नहीं मिला जो एक मैच्योर गेंदबाज को मिलना चाहिए था.

क्रिकेट के बाद का सफर

भले ही अंतरराष्ट्रीय करियर 4 साल में सिमट गया, लेकिन मोहंती ने हार नहीं मानी उन्होंने घरेलू क्रिकेट रणजी ट्रॉफी में ओडिशा के लिए विकेटों की झड़ी लगा दी और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 400 से ज्यादा विकेट लिए बाद में उन्होंने कोचिंग और चयनकर्ता के रूप में भी भारतीय क्रिकेट की सेवा की.  देबाशीष मोहंती का करियर इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा होने के बावजूद कभी-कभी सही समय और सही समर्थन न मिलना एक खिलाड़ी को इतिहास के पन्नों में धुंधला कर देता है लेकिन जब भी 1999 वर्ल्ड कप का जिक्र होगा, उस ‘एक्शन’ के जरिए मोहंती हमेशा क्रिकेट प्रेमियों की यादों में जीवित रहेंगे.

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