26 साल पहले, 2 स्टारकिड्स की हुई बॉलीवुड में एंट्री, 1 बना बॉक्स ऑफिस का ‘धुरंधर’, दूसरे का खत्म नहीं हो रहा स्ट्रगल

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साल 2000 में बॉलीवुड में दो ऐसे चेहरे दिखे, जो अपने सुपरस्टार पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे थे. ऋतिक रोशन ने अपने ग्रीक गॉड लुक्स और जादुई डांस मूव्स से ‘कहो ना प्यार है’ से बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया, जबकि मेगास्टार के बेटे अभिषेक बच्चन ने ‘रिफ्यूजी’ से अपनी एक सीरियस पहचान बनाने की कोशिश की. इस सफर को 26 साल बीत चुके हैं और जहां ऋतिक हर फिल्म के साथ ‘सुपरस्टार’ बनते गए, वहीं अभिषेक का टैलेंट तुलना और संघर्षों के जाल में फंसा रहा.

नई दिल्ली. साल 2000 में एक साथ 2 सुपरस्टार के बेटों ने बॉलीवुड में एंट्री मारी. एक तरफ सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के बेटे अभिषेक बच्चन थे और दूसरी तरफ दिग्गज अभिनेता व फिल्ममेकर राकेश रोशन के बेटे ऋतिक रोशन थे. तब से लगभग 26 साल बीत चुके हैं. जब इन दोनों स्टार्स ने पहली बार इंडस्ट्री में कदम रखा तो उम्मीदें बहुत ज्यादा थीं, लेकिन समय के पहियों ने दोनों के लिए बिल्कुल अलग कहानियां लिखीं. (तस्वीर बनाने में AI की मदद ली गई है.)

जहां ऋतिक रोशन अपनी पहली ही फिल्म से रातोंरात नेशनल क्रश और बॉक्स ऑफिस पर छा गए, वहीं अभिषेक बच्चन के लिए यह सफर मुश्किल रास्तों और कभी न खत्म होने वाले संघर्ष की कहानी बन गया. आइए, इन दोनों स्टार किड्स के करियर में आए उतार-चढ़ाव को विस्तार से जानते हैं, जिसने बॉलीवुड के डायनामिक्स को बदल दिया.

जनवरी 2000 में, ऋतिक रोशन ने ‘कहो ना प्यार है’ से डेब्यू किया. यह फिल्म सुनामी की तरह थी. ऋतिक का डांस, उनकी ग्रीक गॉड जैसी फिजीक और उनके डबल रोल ने दर्शकों को लुभाया. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड तोड़ दिए और ऋतिक को सीधे सुपरस्टार कैटेगरी में पहुंचा दिया. कुछ महीने बाद, जून 2000 में अभिषेक बच्चन ने जेपी दत्ता की ‘रिफ्यूजी’ से बड़े पर्दे पर डेब्यू किया. फिल्म को क्रिटिक्स ने सराहा, लेकिन इसे ऋतिक की पिछली फिल्मों जैसी कमर्शियल सफलता नहीं मिली. अभिषेक की तुलना उनके पिता अमिताभ बच्चन से होने लगी, जो उनके करियर के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई.

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ऋतिक रोशन ने अपनी पहली फिल्म के बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा, हालांकि बीच में कुछ फिल्में फ्लॉप रहीं, लेकिन ‘कोई मिल गया’ (2003) ने उनके करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया. इसके बाद, ‘कृष’ सीरीज, ‘धूम 2’, ‘जोधा अकबर’ और हाल के सालों में ‘वॉर’ और ‘फाइटर’ जैसी फिल्मों ने उन्हें बॉक्स ऑफिस का ‘गारंटी कार्ड’ बना दिया. ऋतिक ने खुद को सिर्फ एक एक्टर के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक परफॉर्मर के तौर पर भी स्थापित किया.

ऋतिक के डांस और एक्शन स्किल्स इंटरनेशनल लेवल के थे, जिससे उन्हें युवाओं के बीच मजबूत पकड़ बनाए रखने में मदद मिली. आज ऋतिक उन कुछ चुनिंदा स्टार्स में गिने जाते हैं जिनकी फिल्मों का पूरा देश बेसब्री से इंतजार करता है. वहीं, अभिषेक बच्चन के करियर की कहानी ऋतिक से बिल्कुल उलटी थी. लगातार 17 फ्लॉप फिल्मों के बाद, मणिरत्नम की ‘युवा’ (2004) ने उनके अंदर एक टैलेंटेड एक्टर का पोटेंशियल दिखाया. इसके बाद, ‘धूम’, ‘बंटी और बबली’ और ‘गुरु’ जैसी फिल्मों से उन्होंने अपनी काबिलियत साबित की.

अभिषेक का सबसे बड़ा स्ट्रगल उनके पिता से तुलना होना था. ऑडियंस हमेशा उनमें ‘यंग अमिताभ’ ढूंढती थी, जिससे उनकी अपनी ओरिजिनैलिटी खो जाती थी. ‘धूम’ जैसी ब्लॉकबस्टर सीरीज का हिस्सा होने के बावजूद, अभिषेक की सोलो हिट फिल्मों का चार्ट हमेशा अनस्टेबल रहा है. आज भी 26 साल बाद, जबकि ऋतिक रोशन 100-200 करोड़ की फिल्मों का चेहरा हैं, वहीं अभिषेक OTT और ‘ब्रीद’ या ‘दसवीं’ जैसे प्रोजेक्ट्स के जरिए अपनी जगह बना रहे हैं.

इन 26 सालों में एक बात साफ हो गई है कि ऋतिक रोशन ने एक बड़ी इमेज चुनी. वह स्क्रीन पर एक सुपरमैन की तरह दिखे और ऑडियंस ने उन्हें वैसे ही अपनाया. दूसरी ओर, अभिषेक बच्चन ने हमेशा ‘डाउन-टू-अर्थ’ और रियलिस्टिक किरदारों को प्राथमिकता दी है. शायद यही वजह है कि ऋतिक आज बॉक्स ऑफिस के किंग हैं, जबकि अभिषेक को एक मंझा हुआ एक्टर माना जाता है, जिसे इंडस्ट्री में वो मौके नहीं मिले जिनके वो हकदार हैं. अभिषेक का स्ट्रगल जारी है, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी है. वह हर फिल्म के साथ खुद को नए सिरे से डिफाइन करते रहते हैं.

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