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Moong Ki Kheti Tips: क्या आप मूंग की बुवाई के सही समय से चूक गए हैं? तो घबराएं नहीं, कृषि वैज्ञानिकों ने देर से बुवाई करने वाले किसानों के लिए एक ऐसी तकनीक और खास किस्मों के बारे में बताया है, जो तपती गर्मियों में भी आपकी फसल को सुरक्षित रखेंगी. जानिए कैसे गुड़ और एक विशेष कल्चर के घोल से बीज उपचार करने से पैदावार कई गुना तक बढ़ सकती है. इसलिए मार्च के इन आखिरी दिनों में बंपर मुनाफे वाली खेती का यह गोल्डन चांस हाथ से न जाने दें.

सुलतानपुर: इन दिनों उड़द और मूंग की खेती का समय है. आमतौर पर मूंग की बुवाई फरवरी से लेकर मार्च के मध्य तक पूरी कर ली जाती है, लेकिन जो किसान भाई अभी तक बुवाई नहीं कर पाए हैं, उनके लिए राहत की खबर है. कृषि वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक और किस्मों की जानकारी साझा की है, जिससे मार्च के बचे हुए दिनों में भी मूंग की बुवाई करके शानदार मुनाफा कमाया जा सकता है.
कृषि विज्ञान केंद्र सुलतानपुर के वैज्ञानिक डॉ. जे बी सिंह के अनुसार, मूंग की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय वैसे तो 15 फरवरी से 15 मार्च के बीच होता है, लेकिन विशेष परिस्थितियों में 10 अप्रैल तक भी बुवाई की जा सकती है.

देरी होने पर इन किस्मों का करें चुनाव
डॉ. जे बी सिंह बताते हैं कि यदि किसान भाई मुख्य सीजन चूक गए हैं, तो उन्हें अब ऐसी किस्मों को चुनना चाहिए जो कम समय में पककर तैयार हो जाएं. इसके लिए ‘सम्राट’ और ‘एच यू एम 16’ सबसे बेहतरीन प्रजातियां हैं. इन किस्मों की बुवाई अभी की जा सकती है. ध्यान रहे कि अप्रैल माह में केवल जल्दी पकने वाली प्रजातियां ही बोई जानी चाहिए, अन्यथा बाद में होने वाली वर्षा और तेज गर्म हवाएं फलियों को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं. तराई क्षेत्रों में कोशिश यही होनी चाहिए कि मार्च के अंदर ही बुवाई का काम निपटा लिया जाए.
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बीज उपचार में गुड़ और राइजोबियम कल्चर का कमाल
मूंग की पैदावार कई गुना बढ़ाने के लिए बीज का शोधन और उपचार सबसे जरूरी कदम है. डॉ. सिंह ने इसके लिए एक खास विधि बताई है:
जिसके लिए 10 किलोग्राम बीज के लिए आधा लीटर पानी में 50 ग्राम गुड़ और 200 ग्राम राइजोबियम कल्चर मिलाकर एक मिश्रण तैयार करें. इस मिश्रण को बीजों पर हल्के हाथों से छिड़ककर मिलाएं ताकि उन पर एक महीन परत बन जाए. इसके बाद बीजों को छांव में 2 घंटे सुखाएं. बुवाई का सबसे सही समय सुबह 9 बजे से पहले या शाम 4 बजे के बाद है, क्योंकि तेज धूप राइजोबियम के जीवाणुओं को नष्ट कर सकती है.

बुवाई की सही विधि और दूरी
मूंग की बुवाई हमेशा कूड़ों (Lines) में करनी चाहिए. बेहतर बढ़वार के लिए पंक्ति से पंक्ति की दूरी 25 से 30 सेंटीमीटर और बीज की गहराई 4 से 5 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. एक हेक्टेयर खेत के लिए लगभग 20 से 25 किलोग्राम बीज पर्याप्त माना जाता है. इस सटीक दूरी और गहराई से बुवाई करने पर पौधों को फैलने और पोषण लेने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है, जिससे फलियां स्वस्थ और वजनदार होती हैं.

कब और कितनी बार करें सिंचाई?
मूंग की फसल में सिंचाई पूरी तरह से जमीन की किस्म और तापमान पर निर्भर करती है. सामान्य तौर पर इस फसल को 3 से 4 सिंचाई की जरूरत पड़ती है. पहली सिंचाई बुवाई के 25 से 30 दिन बाद करनी चाहिए, जबकि दूसरी और उसके बाद की सिंचाई 10 से 15 दिन के अंतराल पर मौसम को देखते हुए करनी चाहिए. यदि किसान इन वैज्ञानिक विधियों का पालन करते हैं, तो देरी से बुवाई करने के बावजूद वे मूंग की खेती से बंपर मुनाफा कमा सकते हैं.

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Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें

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