यहां मौजूद है हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के गुरु का घर, इनाम में मिले थे सैकड़ों बीघे

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सुल्तानपुर के हैधना खुर्द में जन्मे सूबेदार मेजर बाले तिवारी वो नाम हैं, जिन्होंने मेजर ध्यानचंद जैसे महान खिलाड़ी की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें तराशा. खेलों के प्रति उनकी दीवानगी और मार्गदर्शन ने भारतीय हॉकी को नया आयाम दिया, हालांकि उनका योगदान आज भी गुमनाम सा है.

सुल्तानपुर. जब भी हॉकी शब्द किसी की जुबान पर आता है तो मेजर ध्यानचंद का नाम जरूर आता है. कहा जाता है कि मेजर ध्यानचंद हॉकी के जादूगर थे, लेकिन इस पत्थर को तराशने का काम जिसने किया उनका नाम मेजर सूबेदार बाले तिवारी था. वह उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के रहने वाले थे. मेजर सूबेदार बाले तिवारी ब्राह्मण रेजीमेंट के मेजर थे और उनका पैतृक आवास सुल्तानपुर में मौजूद है. सुल्तानपुर के हैधना खुर्द में उनका मकान भी है. इसके साथ ही मेजर सूबेदार बाले तिवारी को ब्रिटिश सरकार ने उस समय इनाम के रूप में कई सारी संपत्तिया भी दी थी. सूबेदार मेजर बाले तिवारी के वंशज राकेश कुमार तिवारी लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताते हैं कि 1883 में सुल्तानपुर के हैधना खुर्द गांव में जन्मे बाले तिवारी अपने आठ भाइयों में छठवें स्थान पर थे. उनके अंदर बचपन से ही खेलों के प्रति दीवानगी थी. वह दौड़, कबड्डी, रस्सा कसी, लंबी कूद में पारंगत रहे. उनके बारे में कहा जाता है कि वह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर दौड़ लगाया करते थे. साल 1901 में लगभग 18 वर्ष की उम्र में सेना में भर्ती हो गए और उन्होंने हॉकी खेल में हाथ आजमाना शुरू कर दिया, बाले तिवारी अच्छे धावक थे. उनकी क्षमता को देखकर अंग्रेज अधिकारियों ने उन्हें खेलने के प्रति प्रेरित किया. आगे चलकर बाले तिवारी हॉकी टीम के खिलाड़ी के रूप में खेलने लगे और अपना नाम हॉकी के धुरंधर खिलाड़ियों में अंकित कराया, वे ब्राह्मण रेजिमेंट का हिस्सा थे.

ध्यानचंद के थे गुरु
हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को आज पूरी दुनिया जानती है. जब 1901 में मेजर बाले तिवारी सेना में भर्ती हुए तो उसके कुछ दिनों बाद ध्यान चंद भी सेना में भर्ती हुए. मेजर ध्यानचंद के द्वारा खेली जा रही हॉकी को देखकर मेजर बाले तिवारी ने जौहरी का काम किया और उन्हें हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया और हॉकी के कई टिप्स दिए.जिससे मेजर ध्यानचंद ने दुनिया में भारत का परचम लहराया.

रियासतों ने किया था सम्मान 
राय बहादुर की उपाधि से सम्मानित सूबेदार मेजर वाले तिवारी एक ऐसे व्यक्ति थे जिनके कामों को देखते हुए उनका नाम उसे वक्त न केवल सुल्तानपुर जिले के लोगों के बीच समर था. बल्कि अगल-बगल के जिलों में भी चर्चित रहा उनके द्वारा किए गए कार्यों की वजह से उनको कई रियासतें सम्मान भेजी थी. उनके उत्कृष्ट सेवा और प्रथम विश्व युद्ध में बेहतरीन मार्गदर्शन के लिए उन्हें इनाम के रूप में मिर्जापुर में 500 बीघा जमीन भी मिली थी. सेवा से मिले मेडल के अलावा उन्हें खेल और बहादुरी के लिए सुल्तानपुर जिले की कुड़वार रियासत की महारानी भुवनेश्वरी ने दान में कोई जमीन दी थी, इसके अलावा वाराणसी रियासत के महाराज प्रभु नारायण सिंह ने भी उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर बिजली नाम का एक घोड़ा उन्हें भेंट किया था.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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