काशी विश्वनाथ मंदिर जा रहे हैं? धाम से 1 KM दूर इस गुप्त शिवलिंग का जरूर करें दर्शन, गर्भगृह देख रह जाएंगे हैरान

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Varanasi Lord Shiva Temple: काशी को महादेव की नगरी कहा जाता है. यहां ऐसे कई शिवलिंग हैं, जो काफी चमत्कारी हैं. ऐसा ही एक शिवलिंग बाबा विश्वानथ के धाम से करीब 1 किलोमीटर दूर गलियों में है, जिन्हें पिता महेश्वर के नाम से जाना जाता है. आइए इसे शिवलिंग के चमत्कार और मान्यता के बारे में जानते हैं.

वाराणसी: धर्म नगरी काशी भगवान भोले के त्रिशूल पर बसी है. इस ऐतिहासिक शहर में कई शिवालय हैं, लेकिन काशी के तंग गलियों के बीच यहां ऐसा चमत्कारिक शिवलिंग है, जो धरती से करीब 40 फीट नीचे पाताललोक में स्थापित है. इस शिवलिंग को पिता महेश्वर के नाम से जाना जाता है. महादेव का यह गुप्त धाम बेहद चमत्कारिक है. स्कंद पुराण में भी इस मंदिर का उल्लेख है.

बाबा विश्वानथ के धाम से करीब 1 किलोमीटर दूर गलियों में यह महादेव का यह गुप्त लोक स्थापित है. महादेव के इस धाम में महज 1 फीट के छोटे से छेद से भक्त बाबा का दर्शन और जलाभिषेक करते हैं. ऐसी मान्यता है कि पिता महेश्वर का तेज इतना प्रबल है कि भक्त सामने से इनका दर्शन नहीं कर सकते हैं. यही वजह है कि छोटे से छेद से इनका नित्य दर्शन और जलाभिषेक किया जाता है.

बेहद चमत्कारिक है शिवलिंग
मंदिर के महंत परिवार से जुड़े अंकित मिश्रा ने बताया कि पिता महेश्वर का यह शिवलिंग स्वयम्भू शिवलिंग है और यह मंदिर भी काफी पुराना है. इस मंदिर के आस पास घर भी हैं. जो इस स्थान को नहीं जानता, वो यहां आने के बाद भी महादेव के इस शिवलिंग को ढूंढते रह जाता है. साल में सिर्फ महाशिवरात्रि और रंगभरी एकादशी के दिन यहां भक्तों को नीचे जाने की अनुमति दी जाती है. भक्त भी यहां दर्शन कर खुद को काफी सौभाग्यशाली मानते हैं. भक्तों का ऐसा मानना है कि यहां दर्शन से उन्हें सभी कष्ट और कलेश दूर होते हैं.

कार्तिकेय ने की थी स्थापना
कथाओं के अनुसार, काशी में इस शिवलिंग की स्थापना महादेव के बड़े पुत्र कार्तिकेय ने की थी. उन्होंने इसे पिता महेश्वर का नाम दिया. मान्यता यह भी है कि यहां शिवलिंग के दर्शन से पितृ दोष से भी मुक्ति मिल जाती है. इसके अलावा मनुष्य के 20 पीढ़ियों को भी मुक्ति मिलती है.

पिता महेश्वर का मंदिर शीतला गली में स्थित है. इस मंदिर में आप चौक की तंग गलियों से होते हुए भी पहुंच सकते हैं. इसके अलावा सिंधिया घाट से सीढ़ी चढ़कर भी आप गलियों के सहारे पिता महेश्वर के गुप्त धाम तक आ सकते हैं.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

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