झारखंडी आदिवासी झीलपिठा, साल के पत्तों और चिकन से तैयार होती है जबरदस्त डिश, जानें स्टेप-बाय-स्टेप रेसिपी
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Jheel Pitha Recipe: झारखंड के आदिवासी समाज में झीलपिठा एक पारंपरिक और लोकप्रिय व्यंजन है. इसे चिकन, चावल का आटा और पत्तों को जलाकर बनाया जाता है. सेक्टर 12 की निवासी नेहा मुर्मू बताती हैं कि झीलपिठा संथाली भाषा में ‘मांस’ को दर्शाता है. पारंपरिक रूप से इसे चावल के घोल और मांस/चिकन से बनाते हैं, लेकिन अब शाकाहारी लोग पनीर भी इस्तेमाल करते हैं. आइए जानते हैं घर पर झारखंडी झील पिठा बनाने की रेसिपी.
बोकारो. झारखंड के आदिवासी समाज में झीलपिठा एक पारंपरिक और लोकप्रिय व्यंजन है, जिसे खास मौकों और त्योहारों पर बड़े चाव से बनाया और खाया जाता है. इस आदिवासी व्यंजन की खासियत है कि इसे मुख्य रूप से चिकन, चावल का आटा का मिश्रण और पत्तों को जलाकर तैयार किया किया जाता है जिसे सभी वर्गों के लोग बड़े ही चाव से खाते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं घर पर झारखंडी झील पिठा बनाने की रेसिपी से जुड़ी जानकारी.
सेक्टर 12 की निवासी नेहा मुर्मू बताती हैं कि ‘झील पिठा’ एक प्रमुख जनजातीय व्यंजन है जिसे संथाली भाषा में ‘झील’ का अर्थ ‘मांस’ होता है. पारंपरिक रूप से इसे चावल के घोल और मांस चिकन के मिश्रण से बनाया जाता है. हालांकि, आधुनिक समय में शाकाहारी लोग इसमें पनीर का भी इस्तेमाल करने लगे है.
झीलपिठा बनाने के लिए जरूरी सामग्री में भिगोया हुआ अरवा चावल, स्टफिंग के लिए छोटे टुकड़ों में बोनलेस चिकन ,मसाले में अदरक-लहसुन का पेस्ट, हरी मिर्च पेस्ट, हल्दी, चिकन मसाला, जीरा धनिया पाउडर, सरसों का तेल, नमक और साल या सुखवा के पत्ते कि जरूरत पड़ती है.
बनाने की विधि
सबसे पहले अरवा चावल को करीब 1 घंटे तक पानी में भिगोकर रखें, इसके बाद पानी छानकर मिक्सर की मदद से महीन पाउडर तैयार कर लें, इसके बाद बोनलेस चिकन को कढ़ाई पर सरसों तेल डालकर इसमें बारीक कटा हुआ प्याज अदरक लहसुन-मिर्च का पेस्ट, सरसों तेल और सभी सूखे मसाले मिलाकर अच्छी तरह मैरीनेट कर लें और चिकन को अच्छी तरह से पकाए फिर चिकन के ऊपर चावल का आटा को अच्छी तरह मिलाकर स्टफिंग तैयार कर ले.
इसके बाद साल के पत्तों के दोनों तरफ सरसों का तेल लगाएं और फिर स्टफिंग को पत्तों पर समान रूप से फैलाकर अच्छी तरह से दोनों ओर से पत्तों को ढक दें और फिर इसे तवे पर तेज आंच में पकाएं और जब पत्ते पूरी तरह से जल जाए फिर इससे चटनी के साथ इसका स्वाद ले सकते हैं.
ध्यान रहे अगर आपके पास साल के पत्ते उपलब्ध नहीं हो तो पत्तल का भी उपयोग कर सकते हैं. इसके अलावा झील पेठा बनाते समय स्टफिंग और चावल का संतुलन बेहद जरूरी है क्योंकि अगर पिठा ज्यादा मोटा हो गया तो झीलपिठा अंदर से कच्चा रह सकता है और अगर यह बहुत पतला हुआ तो टूटने की समस्या हो सकती है.
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