यूट्यूब और गूगल से सीख लिया पैसा छापना, फिर तो प्रिंटर से धड़ाधड़ निकलने लगे नोट, पर खुल गई पोल
चंदौली: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के अलीनगर थाना क्षेत्र के मानस नगर में मकान के ऊपरी मंजिल पर चल रहे जाली नोट गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया. 100 रुपये के जाली नोटों, अर्धनिर्मित नोटों की बड़ी खेप और अत्याधुनिक उपकरण बरामद के साथ एक व्यक्ति गिरफ्तार हुआ. वहीं, 2 बाल अपचारी पुलिस अभिरक्षा में हैं.
कहां से सीखी नोट छापने की प्रक्रिया
पूछताछ में गिरफ्तार बलुआ थाना क्षेत्र के महदेवा अमिलाई गांव निवासी उधम सिंह यादव (42) ने बताया कि उसने जाली नोट छापने की प्रक्रिया यूट्यूब और गूगल के माध्यम से सीखी थी. इंस्टाग्राम के जरिए उसकी पहचान एक व्यक्ति से हुई, जिसने उसे उपकरण और सामग्री उपलब्ध कराई. उसने बताया कि वह 3500 रुपये के जाली नोट के बदले 1000 रुपये असली नोट लेता था और इसी तरह अवैध कमाई कर रहा था.
अर्धनिर्मित नोटों की बड़ी खेप बरामद
सीओ अरूण सिंह ने इस मामले का खुलासा करते हुए कहा कि एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया है, जबकि 2 बाल अपचारियों को पुलिस अभिरक्षा में लिया गया है. कार्रवाई के दौरान मौके से जाली नोट, अर्धनिर्मित नोटों की बड़ी खेप और अत्याधुनिक उपकरण बरामद किए गए हैं. अभियान के तहत हुई इस कार्रवाई में थाना अलीनगर पुलिस, स्वाट और सर्विलांस टीम ने संयुक्त रूप से छापेमारी कर सफलता हासिल की.
100 रुपये के बरामद हुए जाली नोट
पुलिस टीम 22 मार्च 2026 को आलमपुर अंडरपास के पास संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की चेकिंग कर रही थी. इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि मानस नगर गेट के पास एक मकान की पहली मंजिल पर जाली नोट छापे जा रहे हैं. सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दबिश दी. दबिश के दौरान कमरे में मौजूद लोग भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 2 व्यक्तियों को मौके पर ही पकड़ लिया. तलाशी में मौके से 100 रुपये के 42 जाली नोट बरामद हुए.
छापेमारी में मिला मिनी प्रिंटिंग प्रेस
कमरे की तलाशी लेने पर पुलिस को जाली नोट छापने का पूरा सेटअप मिला. बरामद सामान में 100 रुपये के कुल 55 जाली नोट, 452 अर्धनिर्मित जाली नोट, वाटर मार्क शीट, बांड पेपर, बटर पेपर सहित कई अत्याधुनिक उपकरण शामिल हैं. इसके अलावा एप्सन और कैनन के प्रिंटर, लैमिनेटर, लाइट बॉक्स, हेयर ड्रायर और डेल कंपनी का लैपटॉप भी बरामद हुआ, जिसमें 200 और 500 रुपये के नोटों के प्रिंट फॉर्मेट भी मिले. यह पूरी व्यवस्था किसी छोटे प्रिंटिंग प्रेस की तरह संचालित की जा रही थी. पूछताछ के आधार पर पुलिस ने एक बाल अपचारी को उसके घर से अभिरक्षा में लिया, जिसके पास से 100-100 रुपये के 13 जाली नोट (कुल 1300 रुपये) बरामद किए गए.
सोशल मीडिया से सीखी जालसाजी
पूछताछ में गिरफ्तार अभियुक्त उधम सिंह यादव (42 वर्ष), निवासी महदेवा अमिलाई थाना बलुआ ने बताया कि उसने जाली नोट छापने की प्रक्रिया यूट्यूब और गूगल के माध्यम से सीखी थी. इंस्टाग्राम के जरिए उसकी पहचान एक व्यक्ति से हुई, जिसने उसे उपकरण और सामग्री उपलब्ध कराई. अभियुक्त ने बताया कि वह 3500 रुपये के जाली नोट के बदले 1000 रुपये असली नोट लेता था और इसी तरह अवैध कमाई कर रहा था. पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराधी अब तकनीक और सोशल मीडिया का सहारा लेकर अपराध के नए तरीके अपना रहे हैं, लेकिन पुलिस भी लगातार सतर्क है. इस कार्रवाई से जाली नोट तस्करी पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है.