चैत्र नवरात्रि का छठा दिन आज: मां कात्यायनी की कृपा पाने के लिए जानें शुभ रंग, भोग, आरती, मंत्र और पूजा विधि

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Chaitra Navratri 2026 Day 6 : चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व इस साल 19 मार्च से शुरू हुआ और आज इसका छठा दिन है. हर वर्ष की तरह इस दिन भक्तजन मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना में रमे हुए हैं. घर-घर मंदिरों में भव्य फूलों और दीपों की सजावट देखने को मिल रही है. छोटे-छोटे बच्चे भी अपनी माँ के साथ पूजा में शामिल होकर माता का आशीर्वाद पाने की चाह में उत्साहित हैं. मां कात्यायनी को दुर्गा माता के छठे स्वरूप के रूप में पूजा जाता है. कहा जाता है कि उनकी कृपा से भय, शोक और रोग से मुक्ति मिलती है. इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है और भक्त मां को घी का दीपक, रोली, अक्षत और पीले फूल अर्पित करते हैं.

मां कात्यायनी की पूजा विधि
छठे दिन की पूजा का शुभ समय प्रातःकाल माना जाता है.
1. स्नान और सफाई: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें. पूजा स्थल की सफाई कर गंगाजल से शुद्ध करें.
2. मूर्ति स्थापना: घर या मंदिर में मां कात्यायनी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें.
3. पूजा सामग्री: घी का दीपक जलाएं, रोली, अक्षत और पीले फूल अर्पित करें.
4. भोग अर्पण: मां को शहद या शहद से बनी खीर का भोग लगाएं.
5. मंत्र जाप और आरती: कात्यायनी मां के मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती उतारकर प्रसाद बाटें.

छोटे-छोटे बच्चे अक्सर अपनी मासूम भक्ति के साथ फूल और मिठाई अर्पित करते हैं, जिससे घर का माहौल और भी धार्मिक और प्रसन्नता से भर जाता है.

कात्यायनी मां के मंत्र
मुख्य मंत्र:
कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी.
नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः.

स्तुति मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मंत्र जाप के दौरान घर में शांति का अनुभव होता है और भक्तों का मन चिंताओं से मुक्त होता है.

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शुभ रंग और भोग
मां कात्यायनी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है. इस दिन पीले कपड़े पहनकर पूजा करना शुभ माना जाता है. भोग में शहद या शहद से बनी खीर अर्पित करना परंपरा है. छोटे-छोटे बच्चे भी अपने हाथों से मिठाई अर्पित कर माता की कृपा पाने का प्रयास करते हैं.

मां कात्यायनी की कथा
कथा के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने कठोर तपस्या की और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माता जगदम्बा ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया. यही पुत्री बाद में मां कात्यायनी के नाम से प्रसिद्ध हुई. कहा जाता है कि उन्होंने महिषासुर का वध कर देवताओं को मुक्ति दिलाई, इसलिए उन्हें महिषासुर मर्दनी भी कहा जाता है. मां कात्यायनी की पूजा से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है. लोग इस दिन विशेष रूप से अपने परिवार की रक्षा और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए माता की आराधना करते हैं.

कात्यायनी माता की आरती

जय जय अम्बे, जय कात्यायनी,
जय जगमाता, जग की महारानी।

बैजनाथ स्थान तुम्हारा,
वहां वरदाती नाम पुकारा।कई नाम हैं, कई धाम हैं,
यह स्थान भी तो सुखधाम है।

हर मंदिर में जोत तुम्हारी,
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।

हर जगह उत्सव होते रहते,
हर मंदिर में भक्त हैं कहते।

कात्यायनी रक्षक काया की,
ग्रंथि काटे मोह माया की।

झूठे मोह से छुड़ाने वाली,
जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।

जय जगमाता, जग की महारानी,
अपना नाम जपाने वाली।

बृहस्पतिवार को पूजा करियो,
ध्यान कात्यायनी का धरियो।

हर संकट को दूर करेगी,
भंडारे भरपूर करेगी।

जो भी मां को भक्त पुकारे,
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।

जय जय अम्बे, जय कात्यायनी,
जय जगमाता, जग की महारानी।

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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