गैस की किल्लत से बलिया में बढ़ी ऐसी चीज की डिमांड, सरकार भी चाहती यही, लोग बोले- ‘ये सबका बाप’
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LPG Crisis Ballia : देश के दूसरे हिस्सों की तरह बलिया में भी गैस की किल्लत आम लोगों पर आफत बनकर टूटी है. जिला प्रशासन की तरफ से तस्वीर कुछ और ही पेश की जा रही है. डीएम मंगला प्रसाद सिंह का कहना है कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है. किसी भी अफवाह में नहीं पड़ना है. सवाल उठता है कि अगर कमी नहीं है, तो ये हर गैस एजेंसी पर भारी भीड़ किस बात की गवाही दे रही है. इस अफरा-तफरी के बीच कुछ समाजसेवी फरिश्तों की तरह सामने आए हैं.
बलिया. देशभर में इन दिनों गैस सिलेंडर को लेकर जो हालात बने गए हैं, वो किसी छोटे-मोटे आपातकाल से कम नहीं लग रहे हैं. सुबह होते ही गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग जा रही है, मानों मुफ्त में सोना बंट रहा है. लोग धूप, पसीना और थकान सब भूलकर बस अपनी बारी का इंतजार करते नजर आते हैं. कई लोग तो घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ लौटने को मजबूर हो रहे हैं. यूपी के बलिया जिले में कई जगह हड़कंप की स्थिति बन जा रही हैं. जहां आम जनता सिलेंडर संकट से जूझ रही है, जिला प्रशासन की तरफ से तस्वीर कुछ और ही पेश की जा रही है. बलिया डीएम मंगला प्रसाद सिंह का कहना है कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है. किसी भी अफवाह में नहीं पड़ना है. जो जितना गैस चाहेगा, उसको जरूरत के हिसाब से उतना मिलेगा. अब सवाल ये उठता है कि अगर कमी नहीं है, तो ये हर गैस एजेंसी पर भारी भीड़ किस बात की गवाही दे रही है.
बढ़ी डिमांड
इस अफरा-तफरी के बीच कुछ समाजसेवी फरिश्तों की तरह सामने आ रहे हैं, जो लाइन में लगे लोगों को पानी, मिठाई और नाश्ता बांट रहे हैं. इससे कम से कम लोगों को दिनभर खड़े रहने की ताकत तो मिल रही है. इस बीच बलिया में सत्तू की डिमांड बढ़ गई है. यहां दुकानदार सड़क के किनारे सत्तू खिलाते हैं. सत्तू में भी बलिया का सत्तू बेहद खास होता है. इसलिए तो सरकार ने भी बलिया के सत्तू को One District One Product में शामिल किया है.
रामपुर महावल निवासी सत्यनारायण सत्तू का आनंद लेते हुए एक अलग ही संतुलित जीवन दर्शन देते नजर आए गए. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वह पेंटिंग का काम करते हैं, लेकिन सत्तू ही उनका असली सहारा है. इससे पेट तो भरता ही है, सेहत भी दुरुस्त रहती है. बस इसमें थोड़ा नमक मिलाइए, ऊपर से पानी पीजिए और फिर देखिए कैसे शरीर ठंडा, ऊर्जावान और दिमाग शांत हो जाता है. सत्तू के साथ प्याज, अचार, चटनी और मिर्च मिल गया तो मानों बंपर दावत पूरी हो गई.
सब दुरुस्त
सुनील कहते हैं कि यह सभी भोजन का बाप है. धनंजय के अनुसार, गर्मी में इससे बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता है. पढ़ाई करने वाले छात्र हरिओम ने कहा कि पिज्जा-बर्गर से जहां पेट खराब होता है, सत्तू से सब दुरुस्त रहता है. गैस सिलेंडर के परेशानी के बीच चुनमुन जी की सत्तू दुकान भी चर्चा में है, जो पीढ़ियों से चली आ रही है. यहां चना, जौ, मक्का और मिक्स चार तरह के सत्तू मिलते हैं, जिसकी कीमत ₹20 से ₹30 तक है. मतलब ₹20 से ₹30 में पेट भर जाता हैं. अब हालात ऐसे हैं कि एक तरफ लोग गैस के लिए जूझ रहे हैं, तो दूसरी तरफ सत्तू उन्हें जीवन का असली स्वाद सिखा रहा है. शायद संघर्ष, स्वाद और थोड़ा-सा व्यंग्य ही बलिया की असली कहानी है.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें