कौन सी ट्रेनें और रूट सबसे ज्यादा हो गया है सुरक्षित, पता है आपको!
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भारतीय रेलवे की प्राथमिकता ट्रेनों को सुरक्षित ऑपरेट करना है. इसके लिए लगातार काम चल रहा है. इसी दिशा में रेलवे ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. दिल्ली-हावड़ा के व्यस्त कॉरिडोर के प्रयागराज से कानपुर तक के 190 किलोमीटर लंबे खंड पर कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली शुरू कर दी गई है.

160 की स्पीड से दौड़ सकेंगी ट्रेनें.
नई दिल्ली. भारतीय रेलवे की प्राथमिकता ट्रेनों को सुरक्षित ऑपरेट करना है. इसके लिए लगातार काम चल रहा है. इसी दिशा में रेलवे ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. दिल्ली-हावड़ा के व्यस्त कॉरिडोर के प्रयागराज से कानपुर तक के 190 किलोमीटर लंबे खंड पर कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली शुरू कर दी गई है. यह कवच प्रणाली ट्रेनों की सुरक्षा को बहुत मजबूत बनाती है. इस सेक्शन पर ट्रेनें अब 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकेंगी. इससे कम समय में यात्रा पूरी होगी और ऑपरेशन ज्यादा बेहतर हो सकेगा.
कवच को पहली बार ट्रेन संख्या 14163 के जरिए शुरू किया गया. रेलवे के जीएम ने सूबेदारगंज से मनौरी तक ट्रेन में जाकर खुद इसका जायजा लिया. इस मौके पर कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे.शुरुआत में आठ जोड़ी ट्रेनों पर कवच लगाया जाएगा.हालांकि पहले ही दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा के 1,452 किलोमीटर मार्ग पर कवच 4.0 सफलतापूर्वक चल रहा है.
ये ट्रेनें सुरक्षित
ट्रेन नंबर 14113/14114, 14163/14164, 12307/12308, 12417/12418, 22437/22438, 15003/15004, 20433/20434 और 12403/12404. बाद में और ट्रेनों तथा वंदे भारत ट्रेनों को भी इसमें शामिल किया जाएगा. कवच शुरू करने से पहले बहुत सारे कड़े परीक्षण किए गए. इनमें WAP-7 इंजन वाली 8, 16 और 22 कोच की ट्रेनों के साथ-साथ 20 कोच वाली वंदे भारत ट्रेन का भी इस्तेमाल हुआ. साथ ही चौरी चौरा एक्सप्रेस (15003/15004) में यात्री परीक्षण भी सफल रहे. कुल 20,000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी पर ट्रायल पूरे हो चुके हैं जो पूरी तरह सफल रहा है.
कवच प्रणाली की खासियत
स्वचालित ट्रेन सुरक्षा, लाल सिग्नल पार करने से रोकना, चालक की गलती होने पर खुद ब्रेक लगाना शामिल है. यह पूरी तरह मेक इन इंडिया के तहत भारत में बनी स्वदेशी तकनीक है. पहले ही दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा के 1,452 किलोमीटर मार्ग पर कवच 4.0 सफलतापूर्वक चल रहा है.भारतीय रेलवे लगातार आधुनिक सुरक्षा तकनीक अपनाकर यात्रियों को सुरक्षित, तेज और भरोसेमंद सफर देना चाहता है. यह कदम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.