सुपर स्टार पति का डूब रहा था करियर, पत्नी ने लिखी ऐसी स्क्रिप्ट, बॉक्स ऑफिस पर आया जलजला

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Amitabh Bachchan Superhit Movie : 80 के दशक में जब विनोद खन्ना ने फिल्मों से संन्यास लेकर ओशो की शरण ली तो सबसे ज्यादा राहत की सांस मेगा स्टार अमिताभ बच्चन ने ली मगर 1984 में वो भी फिल्म लाइन छोड़कर राजनीति में आ गए. इलाहाबाद से रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज कर संसद पहुंचे. तीन साल में ही उनका मन राजनीति से ऊब गया. बोफोर्स कांड में नाम आने से अमिताभ और ज्यादा दुखी हुए. उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया और बॉलीवुड में फिर से वापसी का मन बनाया. अब तलाश ऐसी स्टोरी की थी जिससे उनकी वापसी शानदार हो जाए. ऐसे में उनकी पत्नी जया बच्चन ने मुश्किल वक्त में साथ दिया. एक ऐसी स्टोरी का आडिया डायरेक्टर टीनू आनंद को दिया, जिस पर बनी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया. फिल्म का डायलॉग करोड़ों लोगों की जुबान पर चढ़ गए. यह फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं….

80 के दशक में अमिताभ बच्चन के स्टारडम को सबसे बड़ी चुनौती विनोद खन्ना से मिली. विनोद खन्ना के स्टारडम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि वो अमिताभ से ज्यादा फीस लेने लगे थे. विनोद खन्ना के फिल्मों से संन्यास लेने से अमिताभ बच्चन ने राहत की सांस ली. 1983 आते-आते अमिताभ का स्टारडम भी फीका पड़ने लगा. उन्होंने राजनीति में एंट्री ले ली. 1984 में इलाहाबाद से चुनाव लड़ा मगर अमिताभ जल्द ही समझ गए कि राजनीति उनके बस की बात नहीं. उन्होंने दो-ढाई साल में राजनीति से तौबा कर ली और बॉलीवुड की राह दोबारा पकड़ ली. अब एक ऐसी कहानी की तलाश थी, जिससे अमिताभ की पर्दे पर जोरदार वापसी हो. जया बच्चन ने एक स्टोरी का आइडिया डायरेक्टर टीनू आनंद को दिया. टीनू आनंद ने इस पर फिल्म बनाई. इस फिल्म ने इतिहास ही रच दिया. यह फिल्म थी : शहंशाह. आइये जानते हैं इस फिल्म से जुड़े दिलचस्प फैक्ट्स…….

शशंशाह फिल्म एक एक्शन फिल्म थी जिसका डायरेक्शन-प्रोडक्शन टीनू आनंद ने किया था. फिल्म 12 फरवरी 1988 को रिलीज हुई थी. फिल्म की स्क्रिप्ट जया बच्चन ने लिखी थी. प्रोड्यूसर बिट्टू आनंद, टीनू आनंद और नरेश मल्होत्रा थे. मूवी में अमिताभ बच्चन, मीनाक्षी शेषाद्रि लीड रोल थे. प्राण, अमरीश पुरी, प्रेम चोपड़ा और शरत सक्सेना जैसे सितारे सपोर्टिंग कास्ट में थे. आफताब शिवदसानी ने अमिताभ बच्चन के बचपन का रोल निभाया था.

यह भी दिलचस्प है कि टीनू आनंद ने हमेशा कहा कि ‘शहंशाह’ उनका ओरिजनल आइडिया था मगर अजीब बात यह है कि फिल्म के स्टोरी का क्रेडिट जया बच्चन को ही दिया गया है. फिल्म का स्क्रीनप्ले संतोष सरोज, डायलॉग इंदर राज आनंद, गीतकार आनंद बख्शी, संगीतकार अमर उत्पल थे. टीनू आनंद डायलॉग राइटर इंदर राज आनंद के बेटे थे. टीनू आनंद ने बतौर डायरेक्टर अपनी पहली फिल्म ‘दुनिया मेरी जेब में’ शुरू की थी. फिर उन्होंने 1981 में अमिताभ बच्चन के साथ ‘कालिया’ फिल्म बनाई.

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बताया जाता है कि ‘कुली’ फिल्म की शूटिंग के दौरान टीनू आनंद ने अमिताभ बच्चन से ‘शहंशाह’ फिल्म के प्लॉट के बारे में बात की थी. अमिताभ को आइडिया पसंद आया था. कुली के सेट पर अमिताभ के चोट लग जाने के वजह से फिल्म ठंडे बस्ते में चली गई. इसी बीच टीनू आनंद ने ऋषि कपूर के साथ ‘ये इश्क नहीं आसां’ फिल्म बनाई जो कि फ्लॉप रही. इसके बाद एक बार फिर से टीनू आनंद के मन में ‘शहंशाह’ फिल्म को बनाने का ख्याल आया. अमिताभ चोट से उबर चुके थे. शूटिंग करने लगे थे.

टीनू आनंद ने अपने एक इंटरव्यू में 1987 में अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘बतौर प्रोड्यूसर हमारे परिवार की आर्थिक हालत बहुत खराब थी. हमें पता था कि अमिताभ ही हमें उबार सकते हैं. मैंने अमिताभ के भाई अजिताभ से बात की तो उन्होंने कहा कि वो बहुत बिजी हैं. मैंने कहा कि मेरी स्टोरी उन्हें बहुत पसंद आएगी. कहानी एक पुलिस इंस्पेक्टर की है जो दिन में करप्ट नजर आता है लेकिन रात में वेष बदलकर सुपरहीरो बन जाता है. जरूरतमंदों की मदद करता है और जालिमों को मारता है. अमिताभ को मेरा आइडिया पसंद आया. पूरे 9 माह में स्किप्ट लिखी. अमिताभ को स्क्रिप्ट पसंद आई. उन्होंने 6 माह की डेट्स दे दीं.’

फिल्म के गाने रिकॉर्ड हो चुके थे. मद्रास में गाने फिल्माए जाने थे. सबकुछ इंतजाम हो चुके थे लेकिन अमिताभ ने शूटिंग शुरू होने के 3 दिन पहले शेड्यूल कैंसल कर दिया. उन्हें मायस्थेनिया ग्रेविस बीमारी डिस्कवर हुई. वो असपताल में भर्ती हो गए. अमिताभ ने एक बार तो यह भी कह दिया था कि शायद वो शहंशाह नहीं कर पाएंगे. यहां तक कि साइनिंग अमाउंट भी लौटा दिया था. अमिताभ ने किसी और हीरो को लेने की बात भी कही थी.

टीनू आनंद ने अमिताभ की जगह जीतेंद्र के साथ ‘शहंशाह’ बनाने का फैसला किया. अमिताभ बच्चन, उनके भाई अजिताभ और टीनू आनंद जीतेंद्र से मिले. जीतेंद्र ने कहानी सुनी. पूरे 3 माह बाद उन्होंने फिल्म करने से इनकार कर दिया. जीतेंद्र का कहन था कि कहानी अमिताभ को ध्यान में रखकर लिखी गई है, वही इस रोल को बेहतर ढंग से कर पाएंगे. फिर जैकी श्रॉफ से टीनू आनंद ने संपर्क किया. जैकी श्रॉफ ने भी 6 माह लगा दिए और फिल्म में काम करने से इनकार कर दिया.

टीनू आनंद ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि ‘शहंशाह’ के लिए खास तौर पर ड्रेस डिजाइन करवाए गए थे. ये ड्रेस अकबर शाहपुरवाला ने डिजाइन किए थे. अकबर शाहपुरवाला ने जो ड्रेस ‘शहंशाह’ के लिए डिजाइन किया था, उसे जीतेंद्र को ‘आग और शोला’ फिल्म के लिए दे दिया. इधर, अमिताभ की सेहत सुधर गई. उन्होंने ‘मर्द’ और ‘आखिरी रास्ता’ फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी. टीनू आनंद को ‘शहंशाह’ के लिए सिर्फ 20 दिन का समय दिया था. टीनू आनंद ने अमिताभ के लिए नई ड्रेस डिजाइन करवाई जिसका वजन करीब 15 किलो था.

टीन आनंद के पिता आनंद राज आनंद ने इस फिल्म के लिए एक ऐसा डायलॉग लिखा जो अमिताभ बच्चन की और फिल्म की पहचान बन गया. यह डायलॉग था : ‘रिश्ते तो हम तुम्हारे बाप लगते हैं लेकिन नाम है शहंशाह…’ कहा जाता है कि उन दिनों आनंद राज आनंद की तबीयत खराब थी. उन्होंने अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान 20 पेज का क्लाइमैक्स सीन लिखा था. क्लाइमैक्स की शूटिंग 10 दिन हुई थी. कहा जाता है कि क्लाइमैक्स की शूटिंग के पहले ही दिन आनंद राज आनंद का निधन हो गया था.

जब फिल्म रिलीज होने ही वाली थी, तब बोफोर्स स्कैम ने जोर पकड़ा. अमिताभ की फिल्म को बैन करने की मांग होने लगी, तब उन्होंने बाला साहेब ठाकरे से मुलाकात की और कहा कि बोफोर्स कांड में उनका कोई हाथ नहीं है. टीनू आनंद ने डिस्ट्रीब्यूटर्स से प्रत्येक टेरोटरी में फिल्म की कीमत 75 लाख मांगी थी. फिल्म को जबर्दस्त ओपनिंग मिली. 1986 के बाद उनकी कोई फिल्म रिलीज हुई थी. उन्हें पर्दे पर देखने की दीवानगी दर्शकों में बहुत ज्यादा थी. यह 1988 की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई.

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