Lobia Farming : लागत 4 हजार, मुनाफा 60 हजार…2 महीने में इतनी कमाई किसमें, देशी लोबिया बदल रही किस्मत
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Lobia ki ageti kheti : सब्जियों की अगेती खेती बाराबंकी के किसानों की किस्मत बदल रही है. किसान धान-गेहूं छोड़कर लोबिया उगाने में जुटे हैं. बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है. फास्टफूड में यूज होने से कीमत अच्छी मिलती है. सेहत के लिए अधिक फायदेमंद होने से हाथोंहाथ बिकती है. इसकी खेती में लागत भी कम है. बाराबंकी के किसान रवि कुमार कई साल से इसे उगाते आ रहे हैं. लोकल 18 से वे बताते हैं कि उन्होंने अपने खेत में लोबिया की अगेती फसल लगाई है. रवि बाराबंकी के बड़ेल गांव के रहने वाले हैं. रवि ने इस बार करीब ढाई बीघे में देशी लोबिया लगाई है.
बाराबंकी. प्रगृतिशील किसानों के लिए अगेती सब्जियों की खेती हमेशा से फायदे का सौदा रही है. इसी क्रम में, बाराबंकी जिले के कई किसान अब करेला, भिंडी, लौकी और लोबिया उगाने पर ज्यादा जो दे रहे हैं. बाजार में इन सब्जियों की मांग लगातार बनी रहती है. सेहत के लिए अधिक फायदेमंद होने से हाथोंहाथ बिकती हैं. इससे किसानों को भी अच्छे दाम मिल जाते हैं. इनकी खेती में लागत भी कम आती है. बाराबंकी के किसान रवि कुमार यही कर रहे हैं. उन्होंने अपने खेतों में लोबिया की अगेती फसल लगाई है. लागत के हिसाब से अच्छा मुनाफा मिल रहा है. वे कई साल से लोबिया उगाते आ रहे हैं. रवि बाराबंकी के बड़ेल गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने करीब ढाई बीघे में देशी लोबिया लगा रखी है. 50 से 60 हजार रुपये मुनाफा आराम से हो जाता है.
गर्मियों में मांग ज्यादा
लोकल 18 से किसान रवि कुमार कहते हैं कि पहले मैं धान-गेहूं और सरसों आदि की खेती करता था, लेकिन तीन-चार साल से हरी सब्जियां उगा रहा हूं क्योंकि इनमें अन्य फसलों के मुकाबले मुनाफा कहीं अधिक है. इस समय हमारे पास करीब ढाई बीघे में लोबिया लगी हुई हैं. लागत की बात करें तो एक बीघे में करीब 4 हजार रुपये आती है. मुनाफा एक फसल पर 50 से 60 हजार रुपये तक हो जाता है. गर्मियों के समय में लोबिया की मांग बाजारों मे काफी बढ़ जाती है, जिससे यह अच्छी आमदनी देकर जाती है.
ट्रैप विधि से खेती
रवि इसकी खेती ट्रैप विधि से करते हैं. इससे कीट फसल में नहीं लगते और पैदावार घटती नहीं है. कीटनाशक दवाइयां का प्रयोग भी नहीं करना पड़ता. रवि के मुताबिक, इसकी खेती बहुत ही आसान है. पहले हम खेत की जुताई करते हैं. उसके बाद पूरे खेत में मेड़ बनाकर उस पर लोबिया के बीजों की बुआई कर देते हैं. जब पौधा निकालने के बाद थोड़ा बड़ा हो जाता है तब सिंचाई करते हैं. बुवाई करने के महज दो महीने बाद फसल निकलना शुरू हो जाती है. अब इसे तोड़कर बाजारों में बिक्री कर सकते हैं.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें