Chaitra Navratri 2026 Day 5: पांचवे दिन करें स्कंदमाता की पूजा, मिलेगी मानसिक शांति और सफलता, जानें पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती

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Skandamata Puja Vidhi: नवरात्रि का हर दिन अपने साथ एक अलग ऊर्जा और संकेत लेकर आता है, लेकिन पांचवा दिन यानी स्कंदमाता की पूजा का दिन खास मायने रखता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह दिन सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह आपके ग्रहों की स्थिति और जीवन के संतुलन को भी प्रभावित करता है. कई लोग इस दिन की पूजा को केवल परंपरा मानते हैं, लेकिन जिन लोगों ने इसे आस्था और विधि से किया है, वे मानते हैं कि इससे जीवन में ठहराव टूटता है और नई संभावनाओं के रास्ते खुलते हैं. मां स्कंदमाता, जो मातृत्व और करुणा की प्रतीक हैं, अपने भक्तों को न सिर्फ संतान सुख देती हैं, बल्कि उनके जीवन में स्थिरता और शांति भी लाती हैं.

ज्योतिष दृष्टि से क्यों खास है स्कंदमाता का दिन
ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि नवरात्रि का पांचवा दिन चंद्र और गुरु ग्रह के प्रभाव से जुड़ा होता है. यही वजह है कि इस दिन की गई पूजा मानसिक शांति और पारिवारिक सुख को बढ़ाने में सहायक मानी जाती है. अगर किसी की कुंडली में चंद्र कमजोर हो, तो इस दिन मां स्कंदमाता की उपासना विशेष फल देती है. कई परिवारों में यह परंपरा रही है कि संतान की उन्नति और स्वास्थ्य के लिए इस दिन विशेष व्रत रखा जाता है. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग मानते हैं कि इस दिन मां की पूजा करने से बच्चों की पढ़ाई और करियर में आने वाली बाधाएं कम होती हैं.

पूजा विधि
-सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और साफ कपड़े पहनना चाहिए.
-ज्योतिष के अनुसार पीले या सफेद वस्त्र पहनना बेहद महत्वपूर्ण होता है.
-पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करना नकारात्मक ऊर्जा को हटाने का संकेत माना जाता है.
-मां स्कंदमाता की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें.
-इसके बाद घी का दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें.

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मंत्रों का जाप
इस दिन मंत्र जाप को विशेष महत्व दिया जाता है. ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कन्दमातायै नमः’ मंत्र को मन ही मन जपने से मन शांत होता है और एकाग्रता बढ़ती है. वहीं ‘ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः’ का उच्चारण आपके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है.

कौन-सा रंग पहनें?
पीला और सफेद रंग इस दिन विशेष शुभ माने जाते हैं. पीला रंग गुरु ग्रह का प्रतीक है, जो ज्ञान और समृद्धि से जुड़ा है. वहीं सफेद रंग चंद्रमा का प्रतिनिधित्व करता है, जो मन की शांति और भावनात्मक संतुलन देता है.

क्या भोग लगाएं?
मां स्कंदमाता को हलवा, मालपुआ और दही का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है. दूध से बनी मिठाइयां भी इस दिन विशेष फल देती हैं.
भोग लगाते समय भाव सबसे महत्वपूर्ण होता है. कई लोग कहते हैं कि जब वे सच्चे मन से भोग लगाते हैं, तो उन्हें भीतर एक अलग तरह की शांति महसूस होती है.

मां स्कंदमाता की आरती
जय तेरी हो स्कंद माता. पांचवां नाम तुम्हारा आता॥
सबके मन की जानन हारी. जग जननी सबकी महतारी॥

तेरी जोत जलाता रहू मैं. हरदम तुझे ध्याता रहू मै॥
कई नामों से तुझे पुकारा. मुझे एक है तेरा सहारा॥

कही पहाडो पर है डेरा. कई शहरों में तेरा बसेरा॥
हर मंदिर में तेरे नजारे. गुण गाए तेरे भक्त प्यारे॥

भक्ति अपनी मुझे दिला दो. शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो॥
इंद्र आदि देवता मिल सारे. करे पुकार तुम्हारे द्वारे॥

दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए. तू ही खंडा हाथ उठाए॥
दासों को सदा बचाने आयी. भक्त की आस पुजाने आयी॥

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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