अभी भी हमें हक नहीं मिला.. 2027 चुनाव से पहले छलके मंत्री संजय निषाद के आंसू तो अखिलेश यादव ने क्या कहा?

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लखनऊ. निषाद पार्टी ने 2027 विधानसभा चुनाव का शंखनाद गोरखपुर में आयोजित एक भव्य बाइक रैली से किया. इस दौरान कैबिनेट मंत्री संजय निषाद अपने संबोधन को दौरान फूट-फूटकर रो पड़े. उन्होंने निषादों के साथ हुए अन्याय का जिक्र करते हुए कहा कि आज भी उन्हें न्याय नहीं मिला है. मंत्री संजय निषाद ने अनुसूचित जाति का दर्जा समेत कई अन्य मांगों के साथ कार्यकर्ताओं को 2027 के लिए जी जान से जुटने का आह्वान किया. हालांकि, संजय निषाद के आंसुओं पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि ये बीजेपी के साथ जाने पर पश्चाताप के आंसू है, या फिर प्रायश्चित के.

संजय निषाद का भरे मंच पर रोना अब सियासी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है. चर्चा है कि संजय निषाद ने अपने परंपरागत वोट बैंक को सहेजने की कोशिश की है. हालांकि, अखिलेश यादव ने संजय निषाद के आंसुओं पर सियासी बम फोड़ते हुए कहा कि “पीड़ा बढ़ रही है… पीड़ित बढ़ रहे हैं… इसीलिए पीडीए बढ़ रहा है. जनता कह रही है कि इस वीडियो के बैकग्राउंड में जो गाना हमें सुनाई दे रहा है वो हमारा भ्रम है या सच है: हम थे जिनके सहारे वो हुए न हमारे…” अखिलेश यादव ने संजय निषाद के आंसुओं को बीजेपी के साथ जाने पर प्रायश्चित के आंसू बता दिया.

भव्य बाइक रैली के बाद सभा

दरअसल, रैली पार्टी के पादरी बाजार स्थित कार्यालय से शुरू हुई, जिसमें लगभग 3,000 मोटरसाइकिलें शामिल थीं. डॉ. संजय निषाद खुद बुलेट बाइक चलाते हुए रैली की अगुवाई करते नजर आए. रैली विभिन्न चौराहों से गुजरते हुए शास्त्री चौक पहुंची और फिर नौहा विहार स्थित महंत दिग्विजयनाथ पार्क में सभा का आयोजन हुआ. हजारों की संख्या में निषाद समाज के कार्यकर्ता और समर्थक आसपास के जिलों से पहुंचे. वे पार्टी के झंडे, तख्तियां लिए उत्साह से भरे दिखे. डॉ. निषाद के मंच पर पहुंचते ही समर्थकों ने फूलों की वर्षा की और जोरदार स्वागत किया.

निषाद समाज की पीड़ा को बता हुए भावुक

सभा को संबोधित करते हुए डॉ. संजय निषाद ने निषाद समुदाय की लंबे समय से चली आ रही पीड़ा और अन्याय पर बात की. उन्होंने कहा कि तीन साल पहले लंदन यात्रा के दौरान उन्हें आजादी की लड़ाई याद आई, जहां पूर्वजों ने अंग्रेजों के खिलाफ बलिदान दिए, लेकिन आज उनके वंशज अभी भी हक से वंचित हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि समाज के वोट छीने जाते हैं, बहन-बेटियों की इज्जत लूटी जाती है और विरोधी उसमें साथ देते हैं. पहले लोग देशी शराब बांटकर समाज को गुमराह करते थे, सभी ने ठगा और लूटा है. इन बातों को कहते-कहते उनकी आवाज भर आई और आंखों से आंसू छलक पड़े. वे भावुक होकर रोने लगे और समर्थकों से अपील की कि वे निषाद पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हों, घर-घर जाकर संगठन मजबूत करें और 2027 के चुनाव में पूरी ताकत लगाएं. उन्होंने निषादवंशी जातियों को अनुसूचित जाति (एससी) में शामिल करने, आरक्षण दिलाने और समाज की गरिमा व अधिकारों की लड़ाई लड़ने का संकल्प दोहराया.

सपा-बसपा और कांग्रेस ने छिना हिस्सा

संजय निषाद ने मीडिया से बात की और कहा कि आज की यह रैली नहीं बल्कि रैला है. यह आवाज है एकता की. हमारी सारी जातियां अब एक हो गई है अपने बैनर के लिए. जिन लोगों ने हमारा हिस्सा खाया है, उनको गांव से भगाओ. यह सब को मालूम है कि हमारे समाज का हिस्सा बड़ी जातियां नहीं खा रही है, बल्कि सपा बसपा के लोग 30 सालों से खा रहे हैं और कांग्रेस खिला रही है. इसलिए सपा-बसपा को हटाओ और अपना हिस्सा पाओ क्योंकि वर्ग तीन की जमीन मेरे बच्चों का मेरे समाज का हिस्सा बहुजन समाज पार्टी ने छीना था. इसके अलावा डॉ संजय निषाद ने सपा बसपा और कांग्रेस पर कई और गंभीर आरोप लगाए.

160 सीटों पर निषाद पार्टी का प्रभाव

निषाद पार्टी का प्रभाव उत्तर प्रदेश की करीब 160 विधानसभा सीटों पर माना जाता है, जहां इसका वोट बैंक लगभग 4-5 प्रतिशत है. यह रैली समाज को एकजुट करने और एनडीए गठबंधन के साथ मजबूती दिखाने का प्रयास था. डॉ. निषाद के भावुक होने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसने निषाद समुदाय की मांगों और राजनीतिक महत्वाकांक्षा को फिर से सुर्खियों में ला दिया. पार्टी आने वाले दिनों में और भी बड़े कार्यक्रमों की योजना बना रही है.

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