रावण वध के बाद यहीं मिली राम को ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्ति, ये नदी यूपी की लाइफ लाइन, जानें पीलीभीत से कनेक्शन
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Gomti River Pilibhit : गोमती नदी यूपी की लाइफलाइन मानी जाती है. ये नदी महज एक जलधारा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है. पीलीभीत के दलदली इलाकों से निकलकर गाजीपुर के रेतीले किनारों तक का इसका सफर रोचक है. लोकल 18 से पीलीभीत के पत्रकार डॉ. अमिताभ अग्निहोत्री कहते हैं कि हिंदू धर्म में गोमती का स्थान अलग है. भगवान राम ने लंका विजय और रावण वध के बाद ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए इसी गोमती के पावन जल में स्नान किया था.
पीलीभीत. उत्तर प्रदेश की लाइफलाइन मानी जाने वाली गोमती नदी महज एक जलधारा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है. पीलीभीत के दलदली इलाकों से निकलकर गाजीपुर के रेतीले किनारों तक का इसका सफर उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को खुद में समेटे हुए है. प्राचीन काल से इस नदी को आदि गंगा के नाम से भी जाना जाता है, जिसकी महिमा का वर्णन पुराणों में भी मिलता है. गोमती नदी का जन्म पीलीभीत जिले की तहसील कलीनगर के माधोटांडा क्षेत्र में स्थित फुलहर झील से होता है, जिसे अब दुनिया ‘गोमत ताल’ के नाम से जानती है. इस शांत सरोवर से निकलकर गोमती उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में अपनी यात्रा शुरू करती है. लगभग 960 किलोमीटर लंबी यह नदी शाहजहांपुर, खीरी, सीतापुर, लखनऊ, सुल्तानपुर और जौनपुर जैसे प्रमुख जिलों से गुजरती है. इसका यह सफर गाजीपुर जिले के सैदपुर के पास ‘कैथी’ नामक स्थान पर समाप्त होता है, जहां यह अत्यंत श्रद्धा के साथ गंगा नदी में विलीन हो जाती है.
कैसे पड़ा आदिगंगा नाम
लोकल 18 पीलीभीत के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अमिताभ अग्निहोत्री कहते हैं कि हिंदू धर्म में गोमती का स्थान अत्यंत पवित्र है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंका विजय और रावण वध के पश्चात ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए इसी गोमती के पावन जल में स्नान किया था. सुल्तानपुर का प्रसिद्ध धोपाप घाट इसी ऐतिहासिक घटना का गवाह है, जहां आज भी श्रद्धालु अपने पापों के निवारण की कामना लेकर आते हैं. एकादशी के दिन गोमती में स्नान करने से वही पुण्य प्राप्त होता है, जो गंगा स्नान से मिलता है. यही कारण है कि इसके तटों पर बसे शहरों में गोमती की आरती और पूजन की परंपरा सदियों से चली आ रही है. इस नदी की उत्पति दुर्गानाथ नामक तपस्वी साधु की तपस्या से प्रसन्न मां गंगा के आशीर्वाद स्वरूप हुई थी. यही कारण है कि इस नदी को आदिगंगा कहते हैं.
उत्तर प्रदेश सरकार ने गोमती नदी के पुनरुद्धार के लिए क्लीन गोमती अभियान की शुरुआत की है. इस योजना के तहत नदी को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त और अविरल बनाने के लिए भारी बजट और ठोस रणनीति तैयार की गई है. मुख्य फोकस शहरों के गंदे नालों को टैप करने और आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण पर है. नदी के तटों का सौंदर्यीकरण और जलस्तर बढ़ाने के लिए उद्गम स्थल से लेकर संगम तक विशेष कार्य किए जाएंगे. सरकार की इस पहल से न केवल पर्यावरण सुरक्षित होगा, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी नई ऊंचाई मिलेगी.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें