Mango Farming Tips: मार्च के महीने में आम के बाग में करें ये काम, फलों से लद जाएगा पेड़, बंपर कमाएंगे मुनाफा

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मार्च के महीने में आम के बाग में करें ये काम, फलों से लद जाएगा पेड़

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Mango Farming Tips: मार्च का महीना आम की खेती करने वाले किसानों के लिए सबसे अहम माना जाता है. इसी समय पेड़ों पर आए बौर फल में बदलने लगते हैं. इसलिए थोड़ी सी लापरवाही भी नुकसान कर सकती है. अगर इस दौरान सही खाद, पोषण और देखभाल पर ध्यान दिया जाए तो न सिर्फ फल मजबूत बनते हैं, बल्कि पैदावार भी बढ़िया मिलती है. यहां जानिए आसान कब क्या करें, ताकि आम की फसल से अच्छा मुनाफ़ा मिल सके.

मार्च का महीना आम की फसल के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है. इस समय पेड़ों पर बौर आकर छोटे-छोटे फल बनने लगते हैं. अगर इस दौरान सही पोषण नहीं दिया जाए तो फूल झड़ने लगते हैं और उत्पादन पर असर पड़ता है. इसलिए किसानों के लिए जरूरी है कि इस समय पेड़ों की खास देखभाल करें. सही खाद और संतुलित सिंचाई से फसल मजबूत बनती है.

आम के पेड़ों के लिए सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट बहुत काम की चीज मानी जाती है. यह सिर्फ मिट्टी को उपजाऊ ही नहीं बनाती बल्कि जड़ों को भी अंदर से ताकत देती है. जब मिट्टी अच्छी रहती है तो पेड़ खुद ही बेहतर तरीके से पोषण ले पाता है. इसलिए जैविक खाद देने से पेड़ को धीरे-धीरे और लंबे समय तक पोषण मिलता रहता है, जिससे फल का आकार और स्वाद दोनों बेहतर होते हैं.<br />मार्च में इसका इस्तेमाल करने से पेड़ स्वस्थ रहता है और पैदावार भी बढ़िया मिलती है.

मार्च के महीने में आम के पेड़ों पर जब बौर आता है. तब उसकी सही देखभाल करना बहुत जरूरी हो जाता है. इसी समय छोटे-छोटे फूल बनते हैं, लेकिन हल्की सी कमी भी फूल झड़ने का कारण बन सकती है. इसलिए इस समय बोरॉन, जिंक और मैग्नीशियम का स्प्रे करना काफी फायदेमंद माना जाता है. ये पोषक तत्व फूलों को अंदर से ताकत देते हैं और उन्हें गिरने से बचाते हैं. अगर सही समय पर इनका छिड़काव किया जाए तो फल बनने की प्रक्रिया मजबूत होती है. इससे आम का आकार अच्छा होता है और गुणवत्ता भी बेहतर देखने को मिलती है.

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इस समय एनपीके 13:00:45 या पोटैशियम नाइट्रेट का इस्तेमाल करना किसानों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. इसे 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर पेड़ों पर छिड़काव करना चाहिए. इससे फल को सही मात्रा में पोटाश मिलता है, जो उसे मजबूत बनाता है. इसका असर यह होता है कि मंजर से ज्यादा आम टिकते हैं और बीच में गिरने की समस्या कम हो जाती है. साथ ही फल का आकार भी अच्छा निकलता है और क्वालिटी बेहतर होती है.

मार्च में आम के पेड़ों को ज्यादा पानी देना नुकसानदायक हो सकता है. क्योंकि यही वो समय होता है जब बौर आना शुरू होता है. इसलिए बौर आने के समय हल्की सिंचाई ही करें. अधिक पानी से नई पत्तियां निकलने लगती हैं जिससे फूल कमजोर हो जाते हैं तो जब छोटे फल दिखने लगें तभी सिंचाई शुरू करें ड्रिप सिंचाई इस समय सबसे बेहतर विकल्प है.

पेड़ों के नीचे सूखी घास पत्तियां बिछाकर मल्चिंग करने से मिट्टी की नमी लंबे बने समय तक बनी रहती है. इस पानी की बचत होती है और खरपतवार भी कम उगते हैं. मल्चिंग से जड़ों को बेहतर वातावरण मिलता है जिस पेड़ तेजी से विकसित होता है और फल अच्छी गुणवत्ता के बनते हैं.

अगर पेड़ों की टहनियां ज्यादा घनी हो जाएं तो सूखी और बीमार शाखाओं को हल्का काट देना चाहिए. इससे धूप और हवा पेड़ के अंदर तक पहुंचती है. ध्यान रखें कि इस समय ज्यादा छंटाई न करें. सही तरीके से की गई हल्की छंटाई से फल का आकार, उपज और गुणवत्ता बेहतर होती है.

इसके अलावा मार्च में आम के पेड़ों पर मधुआ, हॉपर और गुझिया जैसे कीटों का खतरा बढ़ जाता है. ये कीट फूलों को नुकसान पहुंचाते हैं और इसके अलावा झुलसा रोग भी फसल को प्रभावित करता है. समय पर दवा का छिड़काव और विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है, ताकि फसल सुरक्षित रह सके.

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