8 घंटे की शिफ्ट पर मोहित सूरी की बेबाक राय, इमरान हाशमी का दिया उदाहरण, जब 24 घंटे बिना रुके चली थी शूटिंग

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नई दिल्ली. फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों 8 घंटे की शिफ्ट को लेकर नई बहस छिड़ गई है. इसकी शुरुआत तब हुई, जब पिछले साल दीपिका पादुकोण ने ‘स्पिरिट’ और ‘कल्कि 2898 एडी’ के सीक्वल से दूरी बना ली. इसके बाद एक्टर्स के काम के घंटों को लेकर नई चर्चा शुरू हुई, जो अब तक जारी है. अब इस मुद्दे पर डायरेक्टर मोहित सूरी ने अपनी बेबाक राय रखी है. मोहित सूरी ने वो दिन याद किए, जब एक्टर्स बिना रुके लगातार काम करते थे और उस समय शिफ्ट के घंटों को लेकर कोई तय सीमा नहीं होती थी.

उन्होंने खुलासा किया कि एक दौर ऐसा भी था, जब इमरान हाशमी ने लगातार 24 घंटे तक शूटिंग की थी. मोहित का मानना है कि आज भले ही वर्क-लाइफ बैलेंस की बातें हो रही हैं, लेकिन उन्होंने अपने करियर में एक्टर्स से दिन-रात एक करवाकर काम कराया है. फिल्म जगत में काम के घंटों को लेकर छिड़ी यह बहस अब दो गुटों में बंटी नजर आ रही है.

इमरान हाशमी संग बिना रुके 24 घंटे किया काम

निर्देशक मोहित सूरी का मानना है कि काम के घंटों को लेकर चल रही बहस अब ईगो की लड़ाई बनती जा रही है. वैराइटी इंडिया से बातचीत में उन्होंने याद किया कि फिल्म आवारापन की शूटिंग के दौरान उन्हें होटल इंटरकांटिनेंटल का एक बेहद महंगा प्रेसिडेंशियल सुइट सिर्फ 24 घंटे के लिए मिला था. उस समय इमरान हाशमी ने उनके साथ लगातार 24 घंटे बिना रुके काम किया था.

12 घंटे की शिफ्ट में करना पड़ता है 14-15 घंटे काम

मोहित ने सवाल उठाया कि शिफ्ट के घंटों पर कोई पाबंदी क्यों होनी चाहिए? उनका कहना है कि हमें काम की क्वालिटी और पूरी टीम के बारे में सोचना चाहिए. उन्होंने एक कड़वी सच्चाई की तरफ इशारा करते हुए कहा कि जब एक यूनिट 12 घंटे की शिफ्ट करती है, तो असल में वे 14-15 घंटे काम कर रहे होते हैं. इसमें सामान चढ़ाना-उतारना और तैयारी शामिल होती है, लेकिन उन्हें पैसे सिर्फ 12 घंटे के ही मिलते हैं. मोहित ने जोर देकर कहा कि अगर काम के घंटों में सुधार की बात हो रही है, तो यह सिर्फ बड़े स्टार्स के लिए नहीं, बल्कि पूरी फिल्म क्रू की सेहत और भलाई को ध्यान में रखकर होनी चाहिए.

मोहित सूरी ने बताया अपना अनुभव

मोहित सूरी का कहना है कि इस पूरी बहस को सिर्फ एक्टर्स की डिमांड या उनके नखरों से जोड़कर देखना गलत है. अपने पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने एक भावुक पहलू सामने रखा. मोहित ने बताया, ‘मैं खुद एक असिस्टेंट डायरेक्टर रहा हूं और मैंने देखा है कि शूट खत्म होने के बाद भी पूरी यूनिट बारिश में भीगते हुए सामान समेटती है. लाइटमैन और बाकी क्रू मेंबर्स बस में बैठकर स्टेशन छोड़े जाने का इंतजार करते हैं. यह उनके लिए वाकई बहुत मुश्किल होता है.’

8 घंटे में काम खत्म करने में कोई बुराई नहीं

डायरेक्टर ने साफ कहा कि हमें इसे ईगो की लड़ाई नहीं बनाना चाहिए कि किसी एक्टर ने 8 घंटे की शिफ्ट का सुझाव दिया है. उनका कहना है कि आज सारा ध्यान सिर्फ एक्टर्स की ब्यूटी स्लीप पर दिया जा रहा है, जबकि असली मुद्दा पूरी टीम की इंसानियत और उनकी सहूलियत होना चाहिए. मोहित के मुताबिक, अगर 8 घंटे में काम खत्म हो सकता है, तो इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन हमें इसे बड़े नजरिए से देखने की जरूरत है, ताकि इसका फायदा सिर्फ स्टार्स को नहीं, बल्कि सेट पर मौजूद हर छोटे-बड़े कर्मचारी को मिले.

कैसे शुरू हुई 8 घंटे की शिफ्ट को लेकर बहस?

पिछले साल दीपिका पादुकोण और डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा के बीच हुआ विवाद काफी चर्चा में रहा. खबर आई थी कि दीपिका ने प्रभास की पैन इंडिया फिल्म ‘स्पिरिट’ से किनारा कर लिया है. इसकी मुख्य वजह क्रिएटिव शर्तों पर असहमति और दीपिका की 8 घंटे की शिफ्ट की मांग बताई गई थी. दीपिका के फिल्म छोड़ने के बाद उनकी जगह तृप्ति डिमरी को कास्ट किया गया. इस घटना ने नई बहस छेड़ दी. जहां कुछ लोगों ने दीपिका के स्टैंड को सपोर्ट किया, वहीं कुछ ने इसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए अव्यावहारिक बताया.

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