chaitra navratri 2026 devi Harshad Mata rajasthan know History and Significance of Harshad Mata Temple | 9वीं सदी में बना माता का यह मंदिर बेहद अद्भुत

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राजस्थान का वो प्राचीन मंदिर, जहां विराजती हैं हर्ष और उल्लास की देवी

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Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि के दौरान हर घर में माता रानी की पूजा अर्चना की जाती है. नवरात्रि के मौके पर हम आपको माता रानी के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो राजस्थान में स्थित है और संपूर्ण सृष्टि को इन्ही माता से हर्ष और उल्लास मिलता है. बताया जाता है कि यह मंदिर आठवीं-नवीं सदी में बनवाया गया था. आइए जानते हैं माता रानी के इस मंदिर के बारे में…

राजस्थान का वो प्राचीन मंदिर, जहां विराजती हैं हर्ष और उल्लास की देवीZoom

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि चल रहे हैं और इन दिनों मां दुर्गा के नौ अलग अलग स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है. नवरात्रि में माता रानी की पूजा अर्चना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और मंगल ही मंगल बना रहता है. चैत्र नवरात्रि के मौके पर हम आपको माता रानी के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो हर्ष और उल्लास की देवी हैं. जी हां, संपूर्ण सृष्टि को हर्ष और उल्लास इन्ही माता से मिलता है. माता का यह प्राचीन मंदिर राजस्थान में मौजूद है, जो अपनी पुरानी कहानियों और धार्मिक महत्व के लिए जाने जाते हैं. यह मंदिर ना सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यहां की हर चीज में भक्तों के लिए एक अलग ही आकर्षण है. आइए जानते हैं माता के इस मंदिर के बारे में…

वास्तुकला और भव्यता के लिए प्रसिद्ध
हम बात कर रहे हैं दौसा जिले के आभानेरी गांव में स्थित हर्षद माता मंदिर की जो ना केवल अपनी वास्तुकला और भव्यता के लिए बल्कि देवी हर्षद माता के आशीर्वाद के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है. इस मंदिर को देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है. कहते हैं कि जब भी कोई भक्त यहां आता है और पूरी श्रद्धा से देवी की पूजा करता है, तो उसका मन आनंद और प्रसन्नता से भर जाता है.

भक्तों को सुख, समृद्धि और हर्ष का देती हैं आशीर्वाद
हर्षद माता का अर्थ ही है ‘हर्ष देने वाली माता’ और मान्यता है कि यह देवी हमेशा प्रसन्नचित्त रहती हैं और अपने भक्तों पर सुख, समृद्धि और हर्ष का आशीर्वाद देती हैं. मंदिर चांद बावड़ी के बिल्कुल बगल में स्थित है और यहां की वास्तुकला और मूर्तिकला देखने लायक है. मंदिर की शैलियां और डिजाइन इतनी खूबसूरत हैं कि हर आगंतुक की आंखें बस इन्हीं पर टिक जाती हैं.

हर्षद माता मंदिर का इतिहास
इतिहास की बात करें तो यह मंदिर आठवीं-नवीं सदी में बनवाया गया था. उस समय आभानेरी का नाम आभा नगरी था और यह स्थान अपनी समृद्धि और सुंदरता के लिए जाना जाता था. राजा चांद, जो उस समय आभानेरी के शासक थे, अपने राज्य और प्रजा के लिए बहुत ही समर्पित थे. कहा जाता है कि वे दुर्गा माता के बहुत बड़े भक्त थे और अपने राज्य में सुख और खुशहाली के लिए माता की कृपा मानते थे. इसी विश्वास के साथ उन्होंने हर्षद माता का यह मंदिर बनवाया.

मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता
हर्षद माता मंदिर सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि यह राजस्थान की स्थापत्य कला का भी अद्भुत उदाहरण है. मंदिर के अंदर और बाहर की मूर्तिकला और नक्काशी देखने लायक है. हर साल देश-विदेश से हजारों लोग इस मंदिर को देखने आते हैं और इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता का अनुभव करते हैं. यहां आने वाले लोग देवी के आशीर्वाद के लिए मंदिर में पूजा करते हैं और अपनी खुशहाली की कामना करते हैं.

About the Author

Parag Sharma

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें



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