बाहर से पतली परत, ऊपर से मक्खन…बड़े रेस्टोरेंट को सीधी टक्कर, जानें नैनताली मोमो की सीक्रेट रेसिपी
नैनीताल. उत्तराखंड का खूबसूरत शहर नैनीताल अपनी झीलों, पहाड़ों और ठंडी वादियों के लिए दुनियाभर में मशहूर है, लेकिन यहां का स्वाद भी किसी पहचान का मोहताज नहीं है. इसी शहर की गलियों में एक ऐसा छोटा सा ढाबा मौजूद है, जो बिना किसी चमक-दमक के सिर्फ अपने स्वाद के दम पर लोगों के दिलों में खास जगह बना चुका है. ‘नैनताली मोमो’ नाम से मशहूर यह स्टॉल आज भी कई लोगों के लिए अनजान है, लेकिन जो एक बार यहां का स्वाद चख लेता है, वह बार-बार लौटकर जरूर आता है. शहर के ओके पार्क इलाके में स्थित यह छोटा सा ढाबा सादगी की मिसाल है. यहां न तो बड़े रेस्टोरेंट जैसी सजावट है और न ही कोई हाई-फाई माहौल, लेकिन इसके बावजूद यहां मिलने वाले मोमो बड़े-बड़े रेस्टोरेंट को कड़ी टक्कर देते हैं. खास बात यह है कि यहां के मोमो में तिब्बती स्वाद की झलक साफ महसूस होती है, जो इसे बाकी जगहों से अलग बनाती है.
सबसे अलग स्वाद
इस ढाबे के मालिक सुरेंद्र लाल लोकल 18 से बताते हैं कि उन्होंने मोमो बनाने की कला नैनीताल के ही प्रसिद्ध ‘सोनम मोमो’ को देखकर सीखी. शुरुआत में उन्होंने छोटे स्तर पर काम शुरू किया, लेकिन धीरे-धीरे अपने अनोखे स्वाद के कारण उनकी पहचान बनती चली गई. आज उनके ‘नैनताली मोमो’ स्थानीय लोगों के बीच एक भरोसेमंद और पसंदीदा नाम बन चुका है. ‘नैनताली मोमो’ की सबसे बड़ी खासियत इसकी पारंपरिक रेसिपी और सादगी है. यहां मोमो की बाहरी परत पतली और मुलायम होती है, जबकि अंदर की स्टफिंग बेहद स्वादिष्ट होती है. सुरेंद्र बताते हैं कि वे मोमो में सोयाबीन का चूरा, गोभी, बीन्स और लहसुन का इस्तेमाल करते हैं, जिससे इसका स्वाद और भी लाजवाब हो जाता है. परोसते समय ऊपर से अमूल मक्खन लगाया जाता है, जो इसे एक अलग ही फ्लेवर देता है. उनके यहां अभी वेजिटेरियन मोमो, थूकपा और चाउमीन परोसी जाती है, जो स्वाद में बेहद लाजवाब होती है.
जल्द शुरू करेंगे नॉन वेज
कीमत की बात करें तो यहां 80 रुपये में एक प्लेट वेज मोमो मिलते हैं, जिसमें 8 पीस होते हैं. कम कीमत में बेहतरीन स्वाद मिलने की वजह से यह जगह खासकर स्थानीय लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है. हालांकि, पहले यहां नॉन-वेज मोमो भी मिलते थे, लेकिन पिछले तीन सालों से उन्हें बंद कर दिया गया है. सुरेंद्र का कहना है कि वे जल्द ही दोबारा नॉन-वेज मोमो शुरू करने की योजना बना रहे हैं. इस छोटे से ढाबे की एक और खास बात इसकी साफ-सफाई है.
रोज कितनी बिक्री
सुरेंद्र बताते हैं कि वे हाइजीन का पूरा ध्यान रखते हैं, जिससे ग्राहक बिना किसी झिझक के यहां खाना पसंद करते हैं. यही वजह है कि यहां आने वाले ज्यादातर ग्राहक नियमित होते हैं और बार-बार यहां लौटते हैं. सुरेंद्र बताते हैं कि उनके यहां रोजाना करीब 25 से 30 प्लेट मोमो की बिक्री होती है. भले ही यह ढाबा अभी भी बड़े स्तर पर प्रसिद्ध नहीं हो पाया है, लेकिन इसका स्वाद लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बना चुका है. नैनीताल की भीड़-भाड़ और प्रसिद्ध रेस्टोरेंट के बीच छुपा यह छोटा सा स्टॉल लोगों की पहली पसंद बना गया है.