हीरो ने जब मचाया हथियारों से तांडव, 5 फिल्मों ने की छप्पर फाड़ कमाई, ग्लोबल लेवल पर इंडियन एक्शन का मनवाया लोहा
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बीते कुछ सालों में इंडियन सिनेमा में ‘अल्फा मेल’ और भरपूर एक्शन वाली फिल्मों और शोज की आमद बढ़ी है. ‘एनिमल’ और ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों ने नैतिकता से परे जाकर जबरदस्त एक्शन और हिंसा दिखाई, जिसने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया. ‘केजीएफ’ ने जहां 1500 करोड़ की कमाई के साथ नए कीर्तिमान रचे, वहीं ‘मार्को’ मलयालम की पहली 100 करोड़ी ‘ए’ रेटेड फिल्म बनी. कम बजट की ‘किल’ ने भी अपनी एक्शन से भरपूर कहानी से ग्लोबल स्टेज पर पहचान बनाई. ये फिल्में साबित करती हैं कि मॉडर्न दर्शक अब पर्दे पर मस्कुलर और ग्रे शेड वाले किरदारों के साथ हाई-ऑक्टेन एक्शन देखना पसंद कर रहे हैं.
नई दिल्ली: सिनेमा की दुनिया में पिछले कुछ सालों में एक बड़ा बदलाव आया है. वो चॉकलेट बॉय वाले हीरो और पुरानी घिसी-पिटी लव स्टोरी का दौर अब लगभग खत्म सा हो गया है. आज के दर्शकों को पर्दे पर ‘अल्फा मेल’ यानी ऐसे किरदार पसंद आ रहे हैं जो ताकतवर हैं, थोड़े गुस्सैल हैं और जरूरत पड़ने पर हिंसा का रास्ता चुनने से पीछे नहीं हटते. ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों की कामयाबी ने साबित कर दिया है कि अगर फिल्म में एक्शन और जुनून सही मात्रा में हो, तो बॉक्स ऑफिस पर नोटों की बारिश तय है.
मलयालम सिनेमा की बात करें तो ‘मार्को’ ने हिंसा के मामले में सारी हदें पार कर दीं. उन्नी मुकुंदन स्टारर इस फिल्म में दिखाया गया कि कैसे एक गोद लिया हुआ बेटा अपने भाई की मौत का बदला लेने के लिए किसी भी लेवल तक गिर सकता है. फिल्म में खून-खराबा सिर्फ दिखाने के लिए नहीं था, बल्कि वह कहानी की रूह थी. यही वजह है कि यह मलयालम की पहली ‘ए’ रेटेड फिल्म बनी, जिसने 100 करोड़ का आंकड़ा पार करके एक नया इतिहास रच दिया.
साल 2023 में आई संदीप रेड्डी वांगा की ‘एनिमल’ ने पूरे देश में एक नई बहस छेड़ दी. रणबीर कपूर ने रणविजय के रोल में जिस तरह की सनक और हिंसा दिखाई, उसने सबको हैरान कर दिया. हाइड्रोलिक गन से लेकर कुल्हाड़ी तक, फिल्म में हथियारों का ऐसा तांडव था कि कमजोर दिल वालों के लिए इसे देखना मुश्किल था. पिता और पुत्र के पेचीदा रिश्तों पर आधारित इस फिल्म ने दुनियाभर में करीब 917 करोड़ रुपये से ज्यादा का बिजनेस किया.
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कन्नड़ सिनेमा को ग्लोबल पहचान दिलाने वाली ‘केजीएफ’ फ्रेंचाइजी को भला कौन भूल सकता है. प्रशांत नील के निर्देशन में यश ने ‘रॉकी भाई’ बनकर जो तबाही मचाई, उसने बॉक्स ऑफिस के पुराने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए. अपनी मां को दिया एक वादा निभाने के लिए रॉकी जिस तरह गोल्ड माफिया की दुनिया में खून की नदियां बहाता है, वह सिनेमा प्रेमियों के लिए किसी ट्रीट से कम नहीं था. दोनों पार्ट्स ने मिलकर लगभग 1500 करोड़ रुपये का विशाल कलेक्शन किया.
कम बजट में बड़ा धमाका करने वाली फिल्म ‘किल’ ने यह साबित किया कि हिंसा को भी कलात्मक तरीके से पेश किया जा सकता है. एक चलती ट्रेन के भीतर फिल्माई गई फिल्म में एनएसजी कमांडो की जो लड़ाई दिखाई गई, वह बेहद ‘रॉ’ और हिंसक थी. राघव जुयाल और लक्ष्य के शानदार अभिनय ने इस छोटे बजट की फिल्म को 48 करोड़ की कमाई तक पहुंचाया और ग्लोबल लेवल पर भी भारतीय एक्शन का लोहा मनवाया.
इन सब फिल्मों के बीच ‘धुरंधर’ ने तो जैसे हिंसा की परिभाषा ही बदल कर रख दी. आदित्य धर के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने दिखाया कि एक्शन सिर्फ बंदूकों से नहीं, बल्कि अनोखे प्रॉप्स और दिमागी खेल से भी किया जा सकता है. रणवीर सिंह और संजय दत्त जैसे दिग्गजों से सजी इस फिल्म ने एक जासूस की खतरनाक दुनिया को पर्दे पर उतारा. फिल्म की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसने 1354 करोड़ रुपये की भारी-भरकम कमाई की.
आजकल के फिल्म मेकर्स यह समझ चुके हैं कि दर्शकों को अब सिर्फ ‘अच्छे हीरो’ नहीं चाहिए, उन्हें ऐसे किरदार चाहिए जो अपनी मंजिल पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकें. चाहे वो ‘एनिमल’ का पागलपन हो या ‘धुरंधर’ की चालाकी, इन फिल्मों ने दिखाया है कि अगर कहानी में दम हो और एक्शन ग्लोबल लेवल का हो, तो भाषा की दीवारें टूट जाती हैं. यही कारण है कि हिंसक और डार्क फिल्में आज के दौर की सबसे बड़ी ‘मनी-मेकर’ मशीन बन गई हैं.
कुल मिलाकर, सिनेमा का यह नया चेहरा थोड़ा डरावना जरूर है, लेकिन यह हकीकत है कि लोग इसे देखना पसंद कर रहे हैं. आने वाले समय में ‘धुरंधर 2’ जैसी फिल्मों से उम्मीदें और बढ़ गई हैं. अब देखना यह होगा कि क्या भविष्य के फिल्ममेकर्स हिंसा के इस स्तर को और ऊपर ले जाते हैं या फिर कहानी में कुछ नयापन भी जोड़ते हैं. बॉक्स ऑफिस के ये आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि भारतीय सिनेमा में ‘अल्फा मेल’ और हाई-ऑक्टेन एक्शन का राज अभी लंबा चलने वाला है.