गेहूं के बाद खाली खेतों में बोएं ये नकदी फसलें, कम समय में होगा जबरदस्त मुनाफा, जानिए आसान टिप्स
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गेहूं की कटाई के बाद अक्सर खेत खाली रह जाते हैं, लेकिन यही समय किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का सुनहरा मौका हो सकता है. गर्मी के मौसम में कम अवधि वाली नकदी फसलों की खेती कर किसान न सिर्फ अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं, बल्कि खेत की उर्वरता को भी बनाए रख सकते हैं. सही फसल चयन से कम लागत में बेहतर उत्पादन और अच्छा मुनाफा हासिल किया जा सकता है.
गेहूं की फसल की कटाई का समय आने के बाद खेत खाली नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि यह समय किसानों के लिए कमाई का अच्छा मौका बन सकता है. गर्मी के मौसम में कम अवधि वाली नकदी फसलों की खेती कर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. इस मौसम में मूंग, उड़द, भिंडी, टमाटर और मूली जैसी फसलें बेहतर मानी जाती हैं, जिनसे कम समय में अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है. गेहूं की कटाई के बाद इन फसलों की खेती अपनाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ खेत का बेहतर उपयोग कर सकते हैं.
जिला कृषि अधिकारी राजितराम ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि गेहूं की फसल लेने के बाद खेत खाली हो जाता है. ऐसे में किसान साग-सब्जियों व दलहन फसलों की खेती कर कम समय में अच्छी आमदनी कमा सकते हैं. इन फसलों की खासियत यह है कि इनकी खेती में लागत कम आती है और फसल जल्दी तैयार हो जाती है. इससे किसानों को कई फायदे मिलते हैं एक तो खेत की उर्वरा शक्ति बनी रहती है, दूसरा खेतों में खरपतवार का जमाव नहीं होता.
गेहूं की कटाई के बाद मूली की बुवाई कर किसान अच्छा लाभ कमा सकते हैं. मूली खाने में स्वादिष्ट होती है और कम समय में तैयार होने वाली फसल है. इसके पत्ते हरे और बिना कटे होते हैं, जिनकी सब्जी भी बनाई जाती है. मूली बुवाई के 35 से 40 दिन बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है. यदि एक एकड़ में इसकी खेती की जाए, तो लगभग 100 क्विंटल तक उपज प्राप्त की जा सकती है.
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किसान टमाटर की खेती भी कर सकते हैं. टमाटर कम समय में तैयार होने वाली नकदी फसलों में शामिल है, जो कम लागत में अच्छा मुनाफा देती है. इसे तैयार होने में लगभग 50 से 60 दिन लगते हैं और यह फसल करीब दो से ढाई महीने तक उत्पादन देती रहती है.
किसान मूंग की खेती करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. मूंग की खासियत है कि यह कम समय में तैयार होने वाली फसल है और बाजार में इसकी मांग होने से बेहतर दाम भी मिलते हैं. एक ओर इससे किसानों को अच्छी आमदनी होती है, वहीं दूसरी ओर यह दलहन फसल होने के कारण जमीन के लिए भी फायदेमंद है. इसकी खेती से मिट्टी में पोषक तत्व बढ़ते हैं और भूमि की उर्वरता बनी रहती है. इस तरह मूंग की खेती किसानों के लिए डबल फायदा देने वाली साबित होती है.
किसान तोरई की खेती करके भी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. इस सब्जी की बाजार में अच्छी मांग रहती है. किसान इस माह तोरई की पूसा स्नेह किस्म की बुवाई कर सकते हैं. इस किस्म के फल मध्यम आकार के, नरम और गहरे हरे रंग के होते हैं, जिन पर काले-सलेटी रंग की धारियां होती हैं. यह किस्म उच्च तापमान को सहन करने में सक्षम है. बुवाई के 45 से 50 दिन बाद इसकी कटाई की जा सकती है.
गेहूं के बाद किसान खाली खेत में भिंडी की सीधी बुवाई कर सकते हैं. भिंडी के बाजार भाव भी अच्छे मिलते हैं. यह कम अवधि की सब्जी फसल है, जो बुवाई के लगभग 15 दिन बाद फल देना शुरू कर देती है. इसकी पहली तुड़ाई 45 दिन बाद की जा सकती है. औसतन इसकी पैदावार 10 टन तक प्राप्त होती है. भिंडी की खेती से किसान एक एकड़ में लगभग तीन लाख रुपए तक की कमाई कर सकते है.