एक जंगल, 6 खतरनाक शिकारी! पीलीभीत में दिखती हैं ये खास जंगली बिल्लियां, देखिए तस्वीरें

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पीलीभीत टाइगर रिजर्व भारत के प्रमुख वन्यजीव अभयारण्यों में से एक है, जहां कई दुर्लभ और खास प्रजातियों की जंगली बिल्लियां पाई जाती हैं. यहां बाघ से लेकर छोटी रस्टी स्पॉटेड कैट तक, हर जीव जंगल के संतुलन में अहम भूमिका निभाता है. इन जानवरों की जीवनशैली और शिकार करने के तरीके इसे और भी खास बनाते हैं.

बाघ पीलीभीत टाइगर रिजर्व का मुख्य रक्षक माना जाता है. यह न केवल जंगल की खूबसूरती बढ़ाता है, बल्कि पर्यावरण संतुलन का भी प्रतीक है. बाघ सांभर, चीतल और जंगली सुअर जैसे बड़े जानवरों का शिकार कर उनकी आबादी को नियंत्रित रखता है. यहां के बाघ अपने क्षेत्र तय करने के स्वभाव के लिए भी जाने जाते हैं.

तेंदुआ छिपकर वार करने में माहिर होता है. इसके शरीर पर बने फूल जैसे धब्बे इसे सूखी घास और पेड़ों की छाया में आसानी से छिपा देते हैं. बाघों की मौजूदगी के बावजूद तेंदुए ने यहां खुद को अच्छी तरह ढाल लिया है. यह छोटे जानवरों से लेकर नीलगाय के बच्चों तक का शिकार कर लेता है और अक्सर पेड़ों की ऊंची डालियों पर आराम करते देखा जाता है.

फिशिंग कैट तराई के दलदली इलाकों में रहने की माहिर मानी जाती है. इसके पंजों की बनावट ऐसी होती है, जो इसे पानी में तैरने में मदद करती है. यह सिर्फ मछलियां ही नहीं, बल्कि मेंढक और जलीय पक्षियों का भी शिकार करती है. शारदा सागर और चूका के आसपास के पानी वाले इलाके इसके पसंदीदा ठिकाने होते हैं.

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लैपर्ड कैट देखने में छोटे तेंदुए जैसी लगती है, लेकिन इसका स्वभाव बेहद शर्मीला होता है. यह ज्यादातर पेड़ों पर रहती है और रात के अंधेरे में शिकार करना पसंद करती है. चूहे, छिपकलियां और छोटे पक्षियों का शिकार कर यह जंगल में कीट-पतंगों और छोटे जीवों की संख्या को नियंत्रित रखने में मदद करती है.

जंगल कैट को स्थानीय लोग ‘बन बिल्ली’ भी कहते हैं. इसकी लंबी टांगें और छोटे कान इसे ऊंची घास में छलांग लगाने और उड़ते हुए पक्षियों को हवा में ही पकड़ने में सक्षम बनाते हैं. यह अक्सर गन्ने के खेतों और जंगल के किनारों पर भी देखी जाती है.

रस्टी स्पॉटेड कैट आकार में पालतू बिल्ली के बच्चे से भी छोटी होती है, लेकिन इसकी फुर्ती बेहद तेज होती है. इसकी आंखों के ऊपर सफेद धारियां और पीठ पर जंग जैसे रंग के धब्बे इसकी पहचान हैं. यह मुख्य रूप से दीमक और छोटे कीड़े खाती है. आकार में बहुत छोटी होने के कारण इसे देख पाना विशेषज्ञों के लिए भी चुनौतीपूर्ण होता है.

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