स्टेज 4 कैंसर और कीमो का दर्द भी नहीं डिगा सका हौसला, GATE 2026 में हासिल की 75वीं रैंक
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Gurudutt Dave GATE 2026 Success Story: वडोदरा के गुरुदत्त दवे ने स्टेज 4 लिंफोमा कैंसर और कीमोथेरेपी के दर्द को हराकर गेट 2026 में ऑल इंडिया रैंक 75 हासिल की है. पढ़िए मुश्किलों से लड़कर जीत हासिल करने वाले होनहार स्टूडेंट की सक्सेस स्टोरी.

Gurudutt Dave GATE 2026 Success Story: गुरुदत्त दवे ने कैंसर के दर्द से लड़ते हुए गेट परीक्षा की तैयारी की
नई दिल्ली (GATE 2026 Success Story). सफलता की कहानियां अक्सर कड़ी मेहनत और लगन से जुड़ी होती हैं. लेकिन गुजरात के वडोदरा निवासी गुरुदत्त दवे की कहानी इन सबसे कहीं ऊपर है. महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय (MSU) के इंजीनियरिंग फाइनल ईयर के छात्र गुरुदत्त ने गेट 2026 परीक्षा में जो उपलब्धि हासिल की है, वह वाकई कमाल है. उन्होंने न केवल इलेक्ट्रॉनिक्स में ऑल इंडिया रैंक 75 हासिल की, बल्कि इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में भी AIR 333 प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है.
कीमो के दर्द में की तैयारी
मार्च 2024 में जब गुरुदत्त को लगातार पीठ दर्द और सूजन की शिकायत हुई तो जांच में पता चला कि वह स्टेज IV लिंफोमा से जूझ रहे हैं. यह खबर किसी को भी तोड़ देने के लिए काफी थी, लेकिन गुरुदत्त ने हार मानने के बजाय लड़ने का फैसला किया. मुनि सेवा आश्रम, गोरज में उनके 6 कीमोथेरेपी सेशन हुए. गुरुदत्त बताते हैं कि हर सेशन के बाद का पहला हफ्ता बहुत दर्दनाक होता था और वह पूरी तरह बेड रेस्ट पर रहते थे. जैसे ही शरीर थोड़ा संभलता, वह किताबों के साथ बैठ जाते.
असफलता को बनाया जीत की सीढ़ी
कैंसर के निदान से पहले भी गुरुदत्त दवे की शैक्षणिक राह आसान नहीं थी. दूसरे से तीसरे वर्ष के ट्रांजिशन के दौरान बैक लॉग के कारण उन्हें डिटेन कर दिया गया था. लेकिन इन झटकों ने उन्हें और ज्यादा फोकस्ड रहने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने पहली बार 2025 में GATE परीक्षा दी और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में AIR 1,334 हासिल की. हालांकि, वह इससे संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने 2026 में फिर से कोशिश की. इस बार की उनकी स्ट्रैटेजी और 2 विषयों (इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल) में परीक्षा देने का फैसला रंग लाया.
IISc बेंगलुरु से रिसर्च करने का है सपना
साधारण बैकग्राउंड से आने वाले गुरुदत्त दवे के पिता MSU में ही गैर-तकनीकी पद पर कार्यरत हैं. अपनी इस ऐतिहासिक सफलता के बाद गुरुदत्त अब भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु से उच्च शिक्षा हासिल करना चाहते हैं. उनकी रुचि विशेष रूप से रिसर्च (अनुसंधान) के क्षेत्र में है. वह मानते हैं कि उनके मेंटर्स, दोस्तों और परिवार के सहयोग के बिना यह सफर मुमकिन नहीं था. उनके शिक्षक मृणाल सर ने उन्हें हर कठिन मोड़ पर मोटिवेट किया और सही गाइडेंस दिया.
संघर्ष से सफलता तक का सबक
गेट 2026 रिजल्ट लिस्ट में शामिल गुरुदत्त दवे की कहानी बताती है कि जीवन में सेटबैक्स (झटके) हमें पीछे धकेलने के लिए नहीं, बल्कि और मजबूती से आगे बढ़ने के लिए तैयार करते हैं. कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के बावजूद उनकी एकाग्रता और कड़ी मेहनत ने उन्हें आज उस मुकाम पर पहुंचा दिया है, जहां से वह देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान में रिसर्च करने का सपना देख रहे हैं. गुरुदत्त का कहना है- मुश्किलों ने ही मुझे लक्ष्य पर टिके रहने की ताकत दी.
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With more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys…और पढ़ें