180 तेजस Mk1A, 156 प्रचंड और 34 ध्रुव हेलीकॉप्‍टर, कभी जिसे कहा गया डेड रबर, अब वह बम-बम – 180 Tejas Mk1A 156 Prachand helicopter HAL Order Book

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HAL News: अक्‍टूबर 1964 में जब हिन्‍दुस्‍तान एयरोनॉटिक्‍स लिमिटेड (HAL) की स्‍थापना की गई थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन पब्लिक सेक्‍टर की यह कंपनी भारत की लॉकहीड मार्टिन बनने की राह पर चलेगी. शुरुआत में HAL को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था. आलोचक इसे डेड रबर बताते हुए इसे बंद करने तक की सलाह दे डाली थी. अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में HAL में फिर से सुगबुगाहट तेज होनी शुरू हुई, जब स्‍वदेशी लाइट कॉम्‍बैट एयरक्राफ्ट तेजस डेवलप करने पर गंभीरता से काम करना शुरू हुआ. अब पिछले एक दशक में HAL ने लंबी दूरी तय कर ली है. आज के दिन HAL के पास ₹260000 करोड़ का ऑर्डर है. इनमें तेजस फाइटर जेट, एडवांस्‍ड लाइट हेलीकॉप्‍टर ध्रुव और अटैक हेलीकॉप्‍टर प्रचंड तक का ऑर्डर है. ये कॉन्‍ट्रैक्‍ट एयरफोर्स और आर्मी की जरूरतों को देखते हुए दिए गए हैं. हाल में ही HAL ने रक्षा मामलों पर संसद की स्‍थाई समिति को जो जानकारी उपलब्‍ध कराई है, उससे यह पूरी तरह से साफ है कि HAL भारत का भविष्‍य है. HAL के सामने सबसे बड़ी दिक्‍कत यह है कि उसे अभी तक एडवांस फाइटर जेट का इंजन डेवलप करने में महारत हासिल नहीं हुई है. अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक एयरेस्‍पेस द्वारा समय पर जेट इंजन मुहैया न कराने के चलते HAL समय पर तेजस फाइटर जेट की आपूर्ति नहीं कर पा रही है. इसके चलते कंपनी को आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ रहा है.

सार्वजनिक क्षेत्र की एयरोस्पेस कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने संसद की रक्षा संबंधी स्थायी समिति के समक्ष अपनी उत्पादन क्षमता, बड़े ऑर्डर बुक और चल रही परियोजनाओं का विस्तृत ब्योरा पेश किया है. कंपनी ने बताया कि उसके पास इस समय सशस्त्र बलों के लिए 34 ‘ध्रुव’ हेलीकॉप्टर, 180 तेजस Mk-1A लड़ाकू विमान और 156 प्रचंड अटैक हेलीकॉप्टर की आपूर्ति का ऑर्डर है. समिति के समक्ष पेश रिपोर्ट के अनुसार, HAL ने तेजस Mk-1A कार्यक्रम में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है. कंपनी ने बताया कि पांच विमान पूरी तरह तैयार हैं और डिलीवरी के लिए उपलब्ध हैं. इसके अलावा रडार और डिजिटल वेपन यूनिट (DWU) का सफल इंटीग्रेशन हो चुका है. एयर-टू-एयर मिसाइलों में ASRAAM और ‘अस्त्र’ बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल के ट्रायल भी सफल रहे हैं, जिससे इस प्लेटफॉर्म की युद्धक क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. HAL ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं. कंपनी ने नासिक में तेजस के लिए तीसरी असेंबली लाइन शुरू की है, जिससे सालाना उत्पादन क्षमता 24 विमानों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही HTT-40 ट्रेनर विमान के लिए दूसरी उत्पादन लाइन भी स्थापित की गई है, जहां से शुरुआती तीन विमान तैयार किए जा चुके हैं.

किस कंपनी के पास कितना ऑर्डर
कंपनी  ऑर्डर 
HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) ₹2,60,960 करोड़
BEL (भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड) ₹73,400 करोड़
BEML ₹16,359 करोड़
BDL (भारत डायनेमिक्स लिमिटेड) ₹25,962 करोड़
MIDHANI ₹2,440 करोड़
MDL (मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड) ₹27,415 करोड़
GRSE (गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स) ₹20,205 करोड़
GSL (गोवा शिपयार्ड लिमिटेड) ₹32,400 करोड़
HSL (हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड) ₹18,308 करोड़
तेजस फाइटर जेट और लाइट वेट प्रचंड हेलीकॉप्‍टर भारतीय सशस्‍त्र बलों के लिए रणनीतिक रूप से काफी अहम है. (फाइल फोटो/PTI)

फाइटर जेट की डिलीवरी बड़ी चुनौती

हालांकि, तेजस Mk-1A की डिलीवरी में देरी एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है. इसका मुख्य कारण अमेरिकी कंपनी GE Aerospace द्वारा F404 इंजन की आपूर्ति में लगातार हो रही देरी है. HAL ने स्पष्ट किया कि विमान तैयार हैं, लेकिन इंजन उपलब्ध न होने से डिलीवरी समयसीमा प्रभावित हुई है. कंपनी ने समिति को यह भी बताया कि उसकी ऑर्डर बुक स्थिति संतोषजनक है. HAL इस समय लगभग 2.22 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है, जिनकी डिलीवरी मार्च 2034 तक निर्धारित है. इनमें तेजस Mk-1A, HTT-40, और Dornier Do-228 जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं. हेलीकॉप्टर सेगमेंट में भी HAL का प्रदर्शन मजबूत रहा है. कंपनी अब तक 72 ध्रुव हेलीकॉप्टर डिलीवर कर चुकी है और 34 अतिरिक्त का ऑर्डर उसके पास है. वहीं, प्रचंड अटैक हेलीकॉप्टर के 15 यूनिट समय से पहले डिलीवर किए जा चुके हैं, जिसके बाद सेना और वायुसेना के लिए 156 हेलीकॉप्टर का बड़ा ऑर्डर मिला. इसके अलावा, HAL ने Sukhoi Su-30MKI के उत्पादन को फिर से शुरू करने का फैसला किया है. 2019 में बंद की गई नासिक उत्पादन लाइन को दोबारा चालू कर 12 नए विमान बनाए जाएंगे. यह ऑर्डर रक्षा मंत्रालय के साथ दिसंबर 2024 में लगभग 13,500 करोड़ रुपये की लागत से साइन किया गया था. साथ ही, AL-31FP इंजन के 240 यूनिट का ऑर्डर भी HAL को मिला है, जिनकी आपूर्ति चरणबद्ध तरीके से की जा रही है.

HAL के रिसर्च सेंटर और उनका काम

  • एयरक्राफ्ट R&D सेंटर, बेंगलुरु: फिक्स्ड विंग विमानों का डिजाइन और विकास (LCA, IJT, UAV, HTT-40)
  • रोटरी विंग एयरक्राफ्ट R&D सेंटर, बेंगलुरु: रोटरी विंग (हेलीकॉप्टर) विमानों का डिजाइन और विकास (LCH, LUH, IMRH, RUAV)
  • मिशन एवं कॉम्बैट सिस्टम्स R&D सेंटर, बेंगलुरु: मिशन सिस्टम, विमान अपग्रेड और तकनीकी विकास
  • एयरो इंजन R&D सेंटर, बेंगलुरु: छोटे और मध्यम इंजन तथा टेस्ट बेड का डिजाइन (HTFE 25 KN, HTSE 1200 KW)
  • स्ट्रेटेजिक इलेक्ट्रॉनिक्स R&D सेंटर, हैदराबाद: एवियोनिक्स (विमान इलेक्ट्रॉनिक्स) उपकरणों का विकास
  • ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट R&D सेंटर, कानपुर: ट्रांसपोर्ट विमानों का विकास, संशोधन और अपग्रेड
  • एयरक्राफ्ट अपग्रेड्स R&D सेंटर, नासिक: रूसी विमानों के सिस्टम/विमान अपग्रेड कार्य
  • एयरोस्पेस सिस्टम्स एवं इक्विपमेंट R&D सेंटर, लखनऊ: मैकेनिकल, हाइड्रोलिक और इलेक्ट्रिकल उपकरणों का विकास
  • एयरोस्पेस सिस्टम्स एवं इक्विपमेंट R&D सेंटर, कोरवा: फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और डिस्प्ले सिस्टम का विकास

HAL के पास ₹260000 करोड़ का ऑर्डर

संसदीय समिति की रिपोर्ट में रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) की ऑर्डर बुक स्थिति में असमानता का भी जिक्र किया गया है. 31 दिसंबर 2025 तक HAL का ऑर्डर बुक 2.60 लाख करोड़ रुपये के साथ सबसे बड़ा है, जबकि अन्य कंपनियों की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है. समिति ने सिफारिश की है कि DPSUs को अपने उत्पादों में विविधता लाकर और नए डिजाइन विकसित कर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार करना चाहिए, जिससे उनकी ऑर्डर बुक मजबूत हो सके. रिपोर्ट में रक्षा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है. समिति के अनुसार, AI से निर्णय लेने की गति तेज होगी, कार्यकुशलता बढ़ेगी और मानव संसाधनों पर जोखिम कम होगा.

HAL की स्थापना कैसे और कब हुई?
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की शुरुआत 23 दिसंबर 1940 को बेंगलुरु में “हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड” के रूप में हुई. इसकी नींव उद्योगपति वालचंद हीराचंद और अमेरिकी एविएशन विशेषज्ञ विलियम डगलस पॉले की मुलाकात से पड़ी, जिसने भारत में विमान निर्माण उद्योग की शुरुआत कराई.

शुरुआती दौर में किन लोगों का योगदान महत्वपूर्ण रहा?
मैसूर के महाराजा जयचामराजेंद्र वाडियार ने 700 एकड़ जमीन और 25 लाख रुपये देकर इस परियोजना को मजबूत आधार दिया. इसके अलावा मैसूर के दीवान सर मिर्जा इस्माइल का भी अहम योगदान रहा, जिससे 1940 के दशक में ही भारत में विमान निर्माण संभव हो सका.

कंपनी का सरकारी नियंत्रण में आना कब शुरू हुआ?
1941 में भारत सरकार कंपनी की शेयरधारक बनी और 1942 में इसका प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया. 1951 में इसे रक्षा मंत्रालय के अधीन कर दिया गया, जिससे यह देश की रक्षा जरूरतों के लिए रणनीतिक संस्था बन गई.

HAL ने शुरुआती वर्षों में कौन-कौन से विमान बनाए?
शुरुआत में HAL ने विदेशी डिजाइन के तहत Harlow Trainer, Curtiss Hawk Fighter और Vultee Bomber जैसे विमान बनाए. बाद में HT-2 ट्रेनर जैसे स्वदेशी विमान का निर्माण किया गया, जो भारतीय वायुसेना को बड़ी संख्या में उपलब्ध कराया गया.

HAL का विस्तार और पुनर्गठन कैसे हुआ?
1964 में हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड और एयरोनॉटिक्स इंडिया लिमिटेड का विलय कर HAL का गठन किया गया. इसका उद्देश्य देश में सीमित तकनीकी संसाधनों का बेहतर उपयोग और विमान निर्माण गतिविधियों का समन्वय करना था.

HAL ने स्वदेशी विमान और तकनीक में क्या उपलब्धियां हासिल कीं?
HAL ने ‘पुष्पक’, ‘कृषक’, HF-24 ‘मरुत’ और HJT-16 ‘किरण’ जैसे स्वदेशी विमानों का विकास किया. इसके अलावा एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH), तेजस लड़ाकू विमान और विभिन्न एवियोनिक्स सिस्टम के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और उत्पादन में HAL की क्या भूमिका रही?
HAL ने ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और अमेरिका की कंपनियों के साथ मिलकर मिग-21, मिग-27, जगुआर और सुखोई-30 MKI जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों का लाइसेंस उत्पादन किया. इससे भारत की रक्षा क्षमता को मजबूती मिली.

आधुनिक दौर में HAL की क्या स्थिति और योगदान है?
HAL आज न केवल रक्षा क्षेत्र बल्कि अंतरिक्ष कार्यक्रमों में भी सक्रिय है. इसरो के लिए रॉकेट और सैटेलाइट संरचनाएं बनाने के साथ ही कंपनी ने 2018 में शेयर बाजार (BSE और NSE) में लिस्ट होकर अपने व्यावसायिक विस्तार को भी नई दिशा दी है.

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