नवरात्रि 2026: तीसरे दिन करें मां चंद्रघण्टा की पूजा, जानें पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती का महत्व

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Maa Chandraghanta Puja Vidhi: नवरात्रि के तीसरे दिन विशेष रूप से मां चंद्रघण्टा की पूजा का महत्व है. यह दिन केवल श्रद्धा और भक्ति का नहीं, बल्कि मानसिक शक्ति, आत्मविश्वास और जीवन में समृद्धि लाने का प्रतीक भी माना जाता है. ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय अत्यंत शुभ होता है, जब ग्रहों की चाल और नक्षत्रों की स्थिति आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है. मां चंद्रघण्टा का यह स्वरूप ममता और तेजस्विता का अनोखा मिश्रण है, जो न केवल भय दूर करता है, बल्कि जीवन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ाता है. ज्योतिषियों के अनुसार नवरात्रि के तीसरे दिन चंद्रघण्टा की पूजा करने से मानसिक शांति, भयमुक्ति और करियर में उन्नति होती है. माता का अर्द्धचंद्राकार घंटा हमारे जीवन में समय और परिवर्तन के महत्व को दर्शाता है. इस दिन पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती का सही समय और तरीका जानना आवश्यक है ताकि मां की कृपा प्राप्त हो.

मां चंद्रघण्टा का महत्व और स्वरूप
मां चंद्रघण्टा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और मातृभाव से परिपूर्ण है. उनकी आठ भुजाओं में कमल, धनुष-बाण, खड्ग, कमंडल, त्रिशूल, तलवार और गदा हैं. उनका वाहन शेर है, जो साहस और शक्ति का प्रतीक है. मस्तक पर अर्द्धचंद्र और रत्नजड़ित मुकुट शोभायमान होते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां के इस स्वरूप की उपासना से भय दूर होता है, नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और मनुष्य के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है. जीवन में आने वाली बाधाओं को पार करने में मदद मिलती है.

संकल्प और ध्यान: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें और मां चंद्रघंटा का ध्यान करें.
पूजा सामग्री: माता को सिंदूर, अक्षत, गंध, धूप, लाल या पीले फूल अर्पित करें.

मां चंद्रघंटा पूजा विधि
-सुबह सूर्योदय से पहले उठें और शुद्ध जल से स्नान करें.
-मंदिर या पूजा स्थल की सफाई करें.
-गंगाजल से देवी का शुद्धिकरण करें.
-लाल चंदन, अक्षत और लाल-पीले फूल चढ़ाएं.
-दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करें.
-आरती करने के बाद केसर की खीर, पेड़े और अन्य मिठाइयों का भोग लगाएं.

ज्योतिषीय सलाह: सुबह 6:00 से 9:00 बजे तक पूजा करने का समय अत्यंत शुभ माना गया है.

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भोग: भोग में केसर की खीर, पंचमेवा, लौंग, इलायची और मिसरी का प्रयोग करें. पेड़ा, हलवा या अन्य पारंपरिक मिठाइयां भी शामिल की जा सकती हैं. लाल रंग के फूल और वस्‍त्र पहनना अत्यंत शुभ है, क्योंकि लाल रंग शक्ति, ऊर्जा और जीवन में वृद्धि का प्रतीक है.

मंत्र जाप: इस मंत्र का 108 बार जाप करें- ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः.

मां चंद्रघण्‍टा की आरती

जय मां चंद्रघंटा सुख धाम.
पूर्ण कीजो मेरे सभी काम.

चंद्र समान तुम शीतल दाती.
चंद्र तेज किरणों में समाती. क्रोध को शांत करने वाली.
मीठे बोल सिखाने वाली.

मन की मालक मन भाती हो.
चंद्र घंटा तुम वरदाती हो.

सुंदर भाव को लाने वाली.
हर संकट मे बचाने वाली.

हर बुधवार जो तुझे ध्याये.
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं.

मूर्ति चंद्र आकार बनाएं.
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं.

शीश झुका कहे मन की बाता.
पूर्ण आस करो जगदाता.

कांची पुर स्थान तुम्हारा.
करनाटिका में मान तुम्हारा.

नाम तेरा रटू महारानी.
भक्त की रक्षा करो भवानी.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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