Exclusive: ‘दाऊद कैसा फील करता होगा’, बड़े साहब बने दानिश इकबाल के जब खड़े हुए रोंगटे, बयां किया शूटिंग का यादगार किस्सा

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नई दिल्ली: ‘धुरंधर 2’ बॉक्स ऑफिस पर कोहराम मचा रही है. फिल्म ने ओपनिंग डे पर दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस से 241 करोड़ रुपये कमा लिए हैं. ‘धुरंधर’ के बाद ‘बड़े साहब’ उर्फ दाऊद इब्राहिम का किरदार लोगों की जुबां पर तारी था. बड़े साहब कौन होंगे, लोगों ने इसका खूब कयास लगाया. ‘धुरंधर 2’ में जब ‘बड़े साहब’ सामने आए, तो वह असरदार सीन दर्शकों के मन में चस्पा हो गया. अचानक एक्टर से ज्यादा किरदार अहम हो गया, जिसे दानिश इकबाल ने निभाया है. यही बात एक्टर की सबसे बड़ी तारीफ बनकर उभरी. उन्होंने ‘न्यूज18 इंडिया’ से खास बातचीत में ‘धुरंधर 2’, बड़े साहब के किरदार से जुड़े दिलचस्प पहलुओं पर बात की.

‘बड़े साहब’ का रोल निभाना दानिश इकबाल के लिए आसान नहीं था, मगर उन्होंने अपनी एक्टिंग और आदित्य धर के विजन की बदौलत इसे ऐसे निभाया कि यह लोगों को याद रह गया. जब दानिश इकबाल से पूछा गया कि उन्होंने दाऊद इब्राहिम के किरदार के लिए खुद को कैसे तैयार किया, तो वे बोले, ‘इस किरदार को निभाने में काफी मशक्कत लगी. साइकोलॉजिकल ज्यादा काम करना पड़ा. फिल्म में देखा होगा कि किरदार की खास फीजिकल कंडीशन है, वह उसमें रहते हुए कैसे अपना पावर गेम दिखा सकता है, इसलिए साइकोलॉजिकल काम किया. एक बीमार शख्स अपनी ताकत कैसे दिखाएगा. बीमारियों पर लोग कैसे रिएक्ट करते हैं, इन सब चीजों पर रिसर्च किया. बॉडी लैग्वेंज पर काम किया. ऐसे करते-करते काम बन गया. अब लोगों की तारीफ मिल रही है तो लगता है कि मेहनत काम कर गई है.’

‘बड़े साहब’ किरदार के लिए खुद को कैसे तैयार किया?
‘धुरंधर 2’ में बीमार दाऊद इब्राहिम नजर आता है, ऐसे में दानिश को इसके रेफ्रेंसेज कैसे मिले? जब उनसे यह सवाल किया गया, तो वे बोले, ‘मैंने दाऊद को कॉपी करने की कोशिश नहीं की. इंटरव्यू में भी उस तरह नहीं मिलेगा, जिस अवस्था में उसे दिखाया गया है. उसका कोई रेफेरेंस प्वाइंट है ही नहीं. मैंने उस किरदार की सच्चाई पर ज्यादा फोकस किया ना कि कॉपी करने पर. वह किरदार कैसा होगा, इस पर फोकस किया. इसलिए, चीजें भरोसे लायक बनीं कि यह आदमी ऐसा हो सकता है, इतना खौफनाक हो सकता है कि वह सीन काम कर गया.’

किरदार याद रह गया
दाऊद के किरदार में बिस्तर पर लेटे-लेटे एक्टिंग करनी है, तो स्कॉप काफी लिमिटेड हो जाता है. ऐसे में किरदार को क्रिमिनल के तौर पर दिखाना मुश्किल हो जाता है. दानिश इकबाल ने किरदार के इस पक्ष पर कहा, ‘बहुत सारे कयास आए कि वह कर रहे हैं बड़े साहब. इसलिए, जब मुझे करते देखा, तो दर्शक भूल गए. उन्हें वह किरदार नजर आ रहा है, जो ज्यादा अहम है, न कि एक्टर.’

दानिश इकबाल के जब खड़े हुए रोंगटे
जब दानिश इकबाल से शूट के दौरान सबसे असरदार मोमेंट के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, ’10-12 घंटे के मेकअप के बाद जब मैंने खुद को शीशे में देखा तो लगा कि मैं सच में बीमार हूं, मुझे सारी तकलीफें सच में हैं. मैं उस बैड में लेटा और सीन शुरू हुआ, तो रोंगटे खड़े होने वाले हालात पैदा हो गए कि मेरी उम्र तो उसके करीब भी नहीं है, तो वह इंसान कैसा फील करता होगा. वहां पर जो बातें हो रही थीं, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली थीं. हम सब देशभक्त हैं, लेकिन किरदार क्या बोल रहा है, उन दो चीजों को अलग-अलग करके देखने में मशक्कत लगी.’ आदित्य धर ने कमाल की स्क्रिप्ट लिखी है, जो बातें वह कहना चाहते हैं वह बड़ी खूबसूरती से कह गए.बहुत एंटरटेनिंग सिनेमा बना है, साथ ही बडे़-बड़े मुद्दे हैं ही. राकेश बेदी ने बहुत काम किया है, लेकिन ‘धुरंधर’ में उनके किरदार से उन्हें खूब पहचान दिलाई.

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